
Akshay Kumar Jha
Ranchi: आज से ठीक 10 महीने दो दिन पहले यानी 15 जून 2022 को ही http://newswing.com झारखंड के शराब नीति का छत्तीसगढ़ कनेक्शन का पर्दाफाश किया था. खबर का शीर्षक था बलदेव भाटिया + एजाज ढेबर + छत्तीसगढ़ कनेक्शन = झारखंड का शराब कारोबार इस खबर में वो सभी बातें लिखी हुई थी जिसका हवाला देकर अब ईडी की तरफ से उत्पाद विभाग के सचिव विनय चौबे और कमिश्नर करण सत्यार्थी को नोटिस भेजा गया है.
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क्या कहा गया है नोटिस में
ईडी की छत्तीसगढ़ टीम ने नोटिस भेजकर झारखंड के इन दोनों अधिकारियों से छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड (सीएसएमसीएल) के साथ शराब की विवादित नीति का पालन के वैधानिक करार से संबंध मामले में अपना पक्ष रखने को कहा है. करार में छत्तीसगढ़ में हुए शराब घोटाले के किंगपिन अरुणपति त्रिपाठी और सिद्धार्थ सिंघानिया की भूमिका के बारे में भी पूछा है. झारखंड में शराब की दुकानों के माध्यम से अवैध शराब की आपूर्ति की छानबीन की जा रही है.
बता दें कि छत्तीसगढ़ शराब घोटाले का किंगपिंन अरुणपति त्रिपाठी सीएसएमसीएल का एमडी था. वो अपने पार्टनर सिद्धार्थ सिंघानिया के साथ मिलकर झारखंड में भी शराब व्यापार का काम देखता था. झारखंड में शराब के खुदरा व्यापार के लिए नियुक्त की गई मैनपावर एजेंसियों के लिए सिद्धार्थ सिंघानिया लाइजनर की भूमिका निभा रहा था. उक्त दोनों लोग अनवर ढेबर के नामक शराब माफिया के साथ मिलकर काम करते थे. अनवर ढेबर रायपुर के मेयर एजाज ढेबर का भाई है. माना जा रहा है कि शराब व्यापार के सरकारीकरण में अनवर ढेबर, अरुणपति त्रिपाठी और सिद्धार्थ सिंघानिया की महत्वपूर्ण भूमिका है.
क्या छापा था न्यूजविंग ने
अपनी खबर में न्यूजविंग ने छापा था कि न्यूजविंग के पास ऐसी पुख्ता जानकारी है कि छत्तीसगढ़ का बलदेव भाटिया और एजाज ढेबर के हाथों में शराब कारोबार के सिंडिकेट का नियंत्रण है. बताया जा रहा है कि इस काम में छत्तीसगढ़ सरकार के वरीय मंत्री भी शरीक हैं. जानकारी यह भी थी कि झारखंड में नयी शराब नीति की देखभाल करने वाले हर महीने 50-75 करोड़ की कमाई कर रहे हैं. इसकी जानकारी उत्पाद विभाग को भी थी लेकिन किसी तरह की कोई कार्रवाई नहीं हो रही है. बाकायदा सिंडिकेट के प्लान को चलाने के लिए उत्पाद विभाग एड़ी चोटी का जोर लगाये हुए है.
उत्पाद कमिश्नर ने कहा था
इस मामले पर न्यूजविंग ने पूर्व उत्पाद कमिश्नर अमित कुमार से बात की थी. उन्होंने कहा था कि हर चीज की जानकारी मेरे पास नहीं होती है. आप जिले के अधिकारियों से बात कर लें. लेकिन न्यूजविंग की पड़ताल में यह सामने आया था कि झारखंड के किसी खुदरा शराब दुकान में डिजिटल पेमेंट की सुविधा नहीं है और न ही पॉपुलर शराब हर साइज में उपलब्ध है. मनचाहे तरीके से शराब की आपूर्ति मैनपावर एजेंसियां करती आई है. आज भी बढ़ी हुई कीमत पर शराब की बिक्री की जा रही है. हर जिले के कमिश्नर को इस बात की जानकारी शिकायत के जरिए मिलती है. लेकिन ना ही विभाग और ना ही विभाग के वरीय अधिकारी इस मामले में किसी तरह की कोई कार्रवाई करते हैं.




