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LITERATURE

मिट्टी की सोंधी गंध में लिपटी नाहीद साहिबा की नागपुरी कविता

गांव कर दशासुना हय गांव काले...?सोचत ही...ना झिंगुर कर झिंग-झिंग...?ना बेंगकर टर्रर्र-टर्रर्र....?ना फन जोरल उफनत नदी!ना ढापल करिया बदरी....!ना डाँड़-टिकुर हरियर!भेत भूइयाँ बजंर हियां.सुखल-पखल रोपा खेत,बनत…

फिलीस्‍तीनी कवि महमूद दरवेश की कविता- हमारे देश में

(रामकृष्णा पाण्‍डेय द्वारा अनूदित फिलीस्‍तीनी कविताओं के संकलन ‘इन्तिफ़ादा’ से)हमारे देश मेंलोग दुखों की कहानी सुनाते हैंमेरे दोस्त कीजो चला गयाऔर फ़िर कभी नहीं लौटाउसका नाम………नहीं उसका नाम मत लोउसे…

मनोज रूपड़ा की कहानी – ईश्वर का द्वंद्व

Manoj Rupraउस स्त्री का जीवन दो पहलुओं में बंटा हुआ था. उसने दो प्रेम किए और दो अलग-अलग पिताओं की दो अलग-अलग संतानों को जन्म दिया.वह जब बहुत छोटी थी तब से जॉब और रोजर से प्रेम करती थी. वह बचपन से बिना किसी भेदभाव के अपनी सब चीजें दोनों…

आजादी के “मायने” बताती देवब्रत सिंह की बांग्ला कविता – स्वाधीनता

झूठी नहीं हैं ये बातेंलालगढ़ के जंगलमहल के तमाम लोग जानते हैंडुमुरगडा, बेनाचापरा, बांकिशोल, हातिगोसा, शालडांगामोहनपुर, कोलाईमुड़ी सभी जानते हैंदिन में पुलिसरात में वे लोगपुलिस कहती है स्वाधीनतावे लोग कहते हैं झूठ है सबफिर…

चौधरी मदन मोहन समर की दो कविताएं

चौधरी मदन मोहन समर ने अपनी पुलिस सेवा का लगभग 25 वर्ष का समय स्वैच्छिक रूप से धार, खंडवा व बैतूल के आदिवासी क्षेत्रों में बिताया है. इस दौरान उन्होंने अनेक अवसरों पर वहां ठेठ गांवों में जाकर मीलों पैदल चलकर रात गुजारी है. उस दौरान उन्हीं…

पलामू किले को मौजूदा हालात से जोड़ती है “द सिक्रेट्स ऑफ द पलामू फोर्ट”

Ranchi : कांके रांची के रहने वाले डॉ रजी अहमद मेडिका के क्रिटिकल केयर यूनिट में कार्यरत हैं. मेडिकल की आपात स्थिति को संभालने के साथ उन्होंने बड़े ही संजिदगी से अपने कलम के हुनर को भी बचाये रखा है. अपने स्कूल के दिनों से ही सफेद कागज पर अपनी…

लघुकथाः भादो की एक रात

Dr. Urmila Sinhaभादों का महीना. काली अंधेरी रात. मुसलाधार बारिश. गंगा का विकराल रूप. एक दूजे को पछाड़ती लहरें. सबकुछ उसके गर्भ में. कोई ओर न छोर. उसी के बीच एक मछुआरा नंगे बदन हाथ में चप्पू लिए पूरी शक्ति से धारा से जंग लड़ता है. चारों…

संजय राज की पांच कविताएं

Sanjay Rajहुंकारआंखों के पोरों में फंसा हुआ है पानी फिर निकल आया है उबला हुआ सूरज घर के कच्चे आंगन में उग आयी है संभावना की घास. बदलाव लिये नारों के बीच दिल्ली में बैठा आदमी बजा रहा है ताली... और इन सबके बीच नहर पर बैठा भूख से तिलमिलाया…

अभी सवाल करना मना है!

Dr Mahfooz Alamप्रतिदिन की तरह मॉर्निंग वॉक के बाद चाय लेने मैं जुम्मन के ढाबे में आ गया. जुम्मन और उसका स्टाफ बर्तनों की सफाई पर तैनात थे. मिट्टी के चूल्हे से कच्चे कोयले का सफेद धुआं वातावरण को दूषित कर रहा था. इसी बीच बाबू भाई बगल में…

पुलवामा के शहीद की विधवा

Firoz  Aliपुलवामा हमले की अब मैं बात क्या करूं,जख्मी हैं लब के जिकर-ए-वारदात क्या करूं.कभी बेगम, कभी पत्नी, कभी अर्धांगनी थी मैं,था फौजू सुहाग मेरा और सांगनी थी मैं.साजन बगैर आई है बारात क्या करूंमुझ से बिछड़ने की उन्हें…