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LITERATURE

शरद कोकास की कविता – रोहित वेमुला का आखिरी खत

रोहित वेमुला ने अपनी आत्महत्या से पूर्व जो ख़त लिखा था उसे पढ़ने के बाद जो तकलीफ़ मुझे हुई उसने इस कविता को जन्म दिया- शरद कोकास रोहित वेमुला का आखिरी खत“जब आप यह ख़त पढ़ रहे होंगेमैं इस दुनिया में नहीं होऊंगा”…

नज्म ‘हम देखेंगे’ की व्याख्या…सत्ता की चिंता धर्म नहीं,  जनता के जाग जाने का डर है

Vijay Shankar Singhपाकिस्तान, भारत और बांग्लादेश, एक ही वतन और एक ही बदन के दो हिस्से थे, अब तीन हैं. 1947 का बंटवारा, एक बहुत बड़ी ऐतिहासिक भूल, राजनीतिक महत्वाकांक्षा, पागलपन भरे दौर, और अंग्रेजों की साज़िश का दुष्परिणाम था. यह बंटवारा…

फैज अहमद फैज की वो मशहूर नज्म जिस पर विवाद छिड़ा हुआ है- हम देखेंगे

पाकिस्तानी शायर फ़ैज़ अहमद फैज की नज़्म 'हम देखेंगे' को पिछले दिनों आइआइटी कानपुर में छात्रों ने कैंपस में गाया था. इसके बाद इस नज्म पर विवाद छिड़ गया. आइआइटी कानपुर के डिप्टी डायरेक्टर मनिंद्र अग्रवाल को कुछ छात्रों ने शिकायत की. शिकायत…

नाटक ‘हमेशा देर कर देता हूं मैं’ का तीसरा शो, भटके कश्मीरी युवा के जद्दोजहद को आकार देने की कोशिश

मुंबई के वर्षोवा आरामबाग में एम्ब्रोज़िया थियेटर ग्रुप का नाटक ‘हमेशा देर कर देता हूं मैं’ का तीसरा शो 28 दिसंबर को होने जा रहा है. पहले दो शो को लोकप्रियता मिलने के बाद ग्रुप का यह तीसरा आयोजन है. मनोज वर्मा के कंसेप्ट और निर्देशन में…

सीमा मिश्रा की कविता – एक अजन्मी  बेटी का डर

एक अजन्मी  बेटी का डरहे मां डर लगता है मुझे,तुम्हारी उस दुनिया में आने सेमैंने सुना है तुम्हारी उस दुनिया मेंहैं, कुछ हिंसक दानव रूपी मानवपहले तो मैं थी बेताबलेकिन अब डर लगता है बाहर आने सेहे मां कैसे…

अजमल खां की कविता – लिख दो कि एक भारतीय हूं मैं

(फिलिस्तीन के महमूद दरवेश, कश्मीर के आगा साहिद अली और असम के मिया कवियों की कड़ी में)लिख दो कि एक भारतीय हूं मैंलिख दोकि एक भारतीय हूं मैंउसके नीचे लिखोकि मेरा नाम अजमल हैएक मुसलमान हूं मैंऔर भारतीय…

वर्तमान पर टिप्पणी करती शिरोमणि महतो की कविता – जो मारे जाते हैं

जो मारे जाते हैंवे एक हांक मेंदौड़े आते सरपट गौओं की तरहवे बलि-वेदी पर गर्दन डालकरमुंह से उफ्फ भी नहीं करतेबिलकुल भेड़ों की तरहवे मंदिर और मस्जिद मेंगुरुद्वारे और गिरिजाघर मेंकोई फर्क नहीं…

इमारतों में मजदूरी करने वाले ईरानी कवि साबिर हका की कविताएं

ईरानी मजदूर साबिर हका की कविताएं तडि़त-प्रहार की तरह हैं. साबिर का जन्म 1986 में ईरान के करमानशाह में हुआ. अब वह तेहरान में रहते हैं और इमारतों में निर्माण-कार्य के दौरान मज़दूरी करते हैं. साबिर हका के दो कविता-संग्रह प्रकाशित हैं और ईरान…

अष्टभुजा शुक्ल की एक कविता जो आज़ भी प्रासंगिक है – गणित का एक सवाल

गणित का एक सवाल किसी धर्मस्थल केविवाद मेंतीन हजार लोग बम सेदो हजार गोली सेएक हजार चाकू सेऔर पांच सौजलाकर मार डाले जाते हैंचार सौ महिलाओं कीइज़्ज़त लूटी जाती हैऔर तीन सौ शिशुओं कोबलि का बकरा बनाया जाता…

चंडीगढ़ का कवि दरबार और आर चेतनक्रांति की कविता – मर्दानगी

हाल में, चंडीगढ़ में पंजाब यूनिवर्सिटी में एक कवि सम्मेलन आयोजित किया गया था. पंजाबी में उसे कवि दरबार कहते हैं. यह आयोजन वहां के बड़े सम्माननीय प्रोफेसर केसर सिंह केसर की याद में हर बरस किया जाता है.डॉ. सुरजीत पातर की अध्यक्षता में हुए…