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नामकुम लैंड स्कैम : तीन माह बाद भी तत्कालीन सीओ श्वेता वर्मा ACB की गिरफ्त से बाहर

Ranchi News : मामला धुर्वा थाना क्षेत्र के डुंडू गांव स्थित खाता नंबर 32 के प्लॉट नंबर 776, 820, 821 और 822 की करीब 1.22 एकड़ जमीन से जुड़ा है. शिकायत के अनुसार, मूल रैयत की मां ने वर्ष 1978-79 में तीन पंजीकृत विक्रय विलेखों के माध्यम से कुल 5.93 एकड़ जमीन खरीदी थी. बाद में पारिवारिक बंटवारा हुआ और शिकायतकर्ता ने खुद को जमीन का वैध उत्तराधिकारी बताया. आ

एसीबी ऑफिस

Ranchi News :  नामकुम अंचल से जुड़े जमीन घोटाले मामले में एसीबी द्वारा प्राथमिकी दर्ज करने के तीन महीने बाद भी तत्कालीन सीओ श्वेता वर्मा को गिरफ्तार नहीं कर पाई है. तत्कालीन सीओ श्वेता वर्मा कहां हैं, एसीबी को अभी तक कुछ पता नहीं चल पाया है.

हालांकि इस मामले में तत्कालीन सीआई मनोज कुमार दीक्षित और तत्कालीन बड़ा बाबू दीपक कुमार को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि दो आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद भी एसीबी तत्कालीन सीओ तक क्यों नहीं पहुंच पाई है.

4 मई से कार्यालय नहीं आ रही श्वेता वर्मा

जानकारी के अनुसार, तत्कालीन सीओ श्वेता वर्मा 4 मई 2026 से कार्यालय नहीं आ रही है. वह रांची के भविष्य निधि कार्यालय में डिप्टी डायरेक्टर के पद पर तैनात थीं. कुछ दिन पहले उनका तबादला राजस्व विभाग में एडीएम रैंक के पद पर किया गया था. लेकिन उन्होंने वहां पदभार ग्रहण नहीं किया था.

दो आरोपियों से पूछताछ, दस्तावेज गायब होने पर स्पष्ट जवाब नहीं

इस मामले में एसीबी ने तत्कालीन सीआई मनोज कुमार दीक्षित और तत्कालीन बड़ा बाबू दीपक कुमार को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है. दोनों से पूछताछ के दौरान जमीन से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज गायब होने के संबंध में सवाल किए गए. दोनों ने दस्तावेज राजस्व कर्मचारी महली के पास होने की बात कही, जिसकी मौत हो चुकी है. दोनों आरोपी यह स्पष्ट नहीं कर सके हैं कि दस्तावेज उन्हें किस तारीख को सौंपे गए थे. एसीबी उनके जवाब से संतुष्ट नहीं है.

1.22 एकड़ जमीन की जमाबंदी निजी कंपनी के नाम करने का आरोप

मामला धुर्वा थाना क्षेत्र के डुंडू गांव स्थित खाता नंबर 32 के प्लॉट नंबर 776, 820, 821 और 822 की करीब 1.22 एकड़ जमीन से जुड़ा है. शिकायत के अनुसार, मूल रैयत की मां ने वर्ष 1978-79 में तीन पंजीकृत विक्रय विलेखों के माध्यम से कुल 5.93 एकड़ जमीन खरीदी थी. बाद में पारिवारिक बंटवारा हुआ और शिकायतकर्ता ने खुद को जमीन का वैध उत्तराधिकारी बताया.

आरोप है कि अंचल कार्यालय में जमीन के रिकॉर्ड में हेरफेर कर प्रकाश कमर्शियल प्राइवेट लिमिटेड के नाम पर करीब 1.22 एकड़ जमीन की जमाबंदी कर दी गई. शिकायत में करीब दो एकड़ जमीन के म्यूटेशन और डिमांड खोले जाने को लेकर भी आरोप लगाए गए हैं. 17 अगस्त 2016 को दोहरी जमाबंदी से संबंधित नोटिस मिलने के बाद मामला सामने आया.

झारखंड हाईकोर्ट के निर्देश के बाद एसीबी ने 26 अगस्त 2026 को कांड संख्या 18/2026 दर्ज किया था. इसके बाद 22 सितंबर को तत्कालीन सीआई मनोज कुमार दीक्षित और बड़ा बाबू दीपक कुमार को गिरफ्तार किया गया. हालांकि तत्कालीन सीओ श्वेता वर्मा की वर्तमान स्थिति और लोकेशन को लेकर अब तक कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है. वह प्राथमिकी दर्ज होने के तीन माह बाद भी एसीबी की गिरफ्त से बाहर है.

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