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बलदेव भाटिया + एजाज ढेबर + छत्तीसगढ़ कनेक्शन = झारखंड का शराब कारोबार

आंकड़ों में शहंशाह, सुविधाओं में फिसड्डी

Akshay Kumar Jha

Ranchi : दावा है कि झारखंड की किसी खुदरा शराब दुकान पर ठंडी बीयर नहीं मिलेगी. न ही पॉपुलर ब्रांड की शराब मनचाही साइज में मिलेगी. आपको वही शराब लेनी होगी जो तय किया गया है. तय उत्पाद विभाग की तरफ से किया गया है. 1 मई से झारखंड में शराब नीति लागू है. 1 जून को विभाग के सचिव विनय चौबे और कमिश्नर अमित कुमार ने मीडिया के सामने कई तथ्य रखे और दावे पेश किये. ज्यादातर दावे फेल साबित हो रहे हैं. कहा गया था कि जल्द ही सारी व्यवस्था कायम हो जायेगी. नहीं हुई. उत्पाद विभाग के कमिश्नर अमित कुमार ने मीडिया के सामने दावा किया था कि हर शराब दुकान में यूपीआइ सिस्टम बहाल हो जायेगा. नहीं हुआ.

ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि उस प्रेस कॉन्फ्रेंस का क्या यह मतलब था कि जनता को ये बताया जाये कि सरकार को विभाग राजस्व उपबल्ध करा रहा है?  शराब नीति बहाल होने के बाद विभाग के सारे दावे फेल हो रहे हैं.

छत्तीसगढ़ सिंडिकेट है हावी, जो चाहेगा वही बिकेगा

न्यूज विंग के पास ऐसी पुख्ता जानकारी है छत्तीसगढ़ का बलदेव भाटिया और एजाज ढेबर के हाथों में शराब कारोबार के सिंडिकेट का नियंत्रण है. बताया जा रहा है कि इस काम में छत्तीसगढ़ सरकार के वरीय मंत्री भी शरीक हैं. जानकारी यह भी है कि झारखंड में नयी शराब नीति की देखभाल करने वाले हर महीने 50-75 करोड़ की कमाई कर रहे हैं. इसकी जानकारी उत्पाद विभाग को भी है. लेकिन किसी तरह की कोई कार्रवाई नहीं हो रही है. बाकायदा सिंडिकेट के प्लान को चलाने के लिए उत्पाद विभाग एड़ी चोटी का जोर लगाये हुए है.

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उत्पाद कमिश्नर का ये है दावा

इस मामले पर न्यूज विंग ने उत्पाद कमिश्नर अमित कुमार से बात की. उन्होंने कहा कि हर चीज की जानकारी मेरे पास नहीं होती है. आप जिले के अधिकारियों से बात कर लें. लेकिन न्यूज विंग की पड़ताल में यह सामने आया है कि झारखंड के किसी खुदरा शराब दुकान में डिजिटल पेमेंट की सुविधा नहीं है और न ही पॉपुलर शराब हर साइज में उपलब्ध है.

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