
Palamu : देश में जारी लॉकडाउन के बीच मजदूरों का अपने घर जैसे-तैसे पहुंचना जारी है. पलामू जिले में रविवार को छत्तीसगढ़ के रायपुर और भिलाई से चार दर्जन से अधिक मजदूरों पहुंचे. 46 मजदूर जहां ट्रकों से पहुंचे, वहीं छह मजदूर भिलाई से साइकिल से 650 किलोमीटर की यात्रा करते हुए हैदरनगर पहुंचे.
मेदिनीनगर में सद्वीक चौक पर 46 मजदूरों को एक ट्रक से उतारा गया. शहर थाना की पुलिस सभी को पीएमसीएच ले गयी. यहां सभी की मेडिकल स्क्रीनिंग गयी. बाद में मुख्यमंत्री दाल-भात केन्द्र में उन्हें भोजन कराया और सभी को पाटन स्थित उनके घर पर भेज दिया गया. सभी को होम क्वारंटाइन में रखा जायेगा. उन्हें 14 दिनों तक घर में ही रह कर अपनी स्थिति की जानकारी स्वास्थ्य विभाग को देनी होगी.
इसे भी पढ़ें – #Jharkhand में Lockdown3.0 में भी नहीं मिलेगी किसी तरह की कोई छूट
क्यों लौटे मजदूर
रायपुर से आनेवाले मजदूरों ने कहा कि जिस फैक्ट्री में काम करते थे. लॉकडाउन के कारण वह बंद हो गयी है. कई दिनों तक जैसे तैसे रहे. इधर, कुछ दिनों से खाने पीने का संकट हो गया था. इसलिए घर लौटना मुनासिब समझा. रायपुर से आने के क्रम में कुछ दूर पैदल तो कुछ दूर ट्रक से यात्रा की.
हैदरनगर में शपथनामा व स्क्रीनिंग के बाद आधा दर्जन भेजे गये घर
उधर, भिलाई से साइकिल चला कर आये छह मजदूरों की जिले के हैदरनगर हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर में चिकित्सा प्रभारी डॉ अशोक कुमार के द्वारा स्क्रीनिंग की गयी. सभी मजदूरों को 14 दिन घर में क्वारंटाइन रहने की हिदायत देकर घर भेज दिया गया. इस दौरान मजदूरों से शपथनामा लिया गया. रास्ते में मिली सुविधा से मजदूर खुश नजर आये.
इसे भी पढ़ें – #CoronaOutbreak: भारत में कोरोना के केस 39 हजार के पार, मृतकों की संख्या बढ़कर 1,301
घर पहुंचने के जज्बे के साथ साइकिल से निकले
मजदूरों ने कहा कि लॉकडाउन में हर हाल में घर पहुंचने की सोच थी. इसी जज्बे के साथ भिलाई से साइकिल से निकल गये. भिलाई से 670 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ा. रास्ते में स्थानीय पुलिस प्रशासन की पूरी सहानुभूति, सहयोग व सुविधा मिली. छत्तीसगढ़ से झारखंड की सीमा में प्रवेश से पूर्व उन्हें जिला कलेक्टर के माध्यम से राह खर्च व साइकिल खराब होने पर मरम्मत के लिए एक-एक हजार रुपए भी दिये गये. यह सफर उनके लिए यादगार बन गया.
इन मजदूरों में बहरपूरा गांव के 3, बिलासपुर, हेमजा व मोकहर कला के 1-1 मजदूर शामिल हैं. जो सभी एक साथ रह कर एक ही कंपनी में काम करते थे. लॉकडाउन का समय बढ़ता गया तो उन्हें रहने खाने में परेशानी होने लगी. सारा पैसा खर्च होने से पहले उन्होंने साइकिल खरीदी. घर वापस लौटने के संकल्प के साथ वहां से चल दिये. थकान के बावजूद घर पहुंच पाने पर उन्होंने खुशी व राहत की बात कही.
इसे भी पढ़ें – लॉकडाउन : भगवान के घर में भी सुरक्षित नहीं हैं नौकरियां, तिरुपति बालाजी मंदिर से हटाये 1300 कर्मचारी



