
Ranchi : कोरोना काल में श्रमिकों को मनरेगा के जरिये सबल बनाने का दावा राज्य सरकार लगातार कर रही है. पर सच कुछ और है. मनरेगा कर्मियों की हड़ताल जारी है. रोजगार उपलब्धता दिखाने के नाम पर मुर्दों को भी काम दिये जाने का प्रमाण सामने आ चुका है. इसके अलावे मनरेगा योजना के कई प्रावधानों के उल्लंघन का मामला भी नजर आ रहा है.
मनरेगा योजनाओं के चयन में 2016 से ग्राम सभाओं की भूमिका को गौण कर दिया गया है. 2020-21 की योजनाओं में भी यही स्थिति बनी हुई है. राज्य रोजगार गारंटी परिषद की हालत खस्ता है. जुलाई 2016 के बाद से उसकी कोई बैठक ही नहीं हुई है. जुलाई 2020 के बाद से पूरे राज्य में एक भी मनरेगा लोकपाल कार्यरत नहीं है. सोशल ऑडिट में आये गंभीर मामलों पर भी सरकार कार्रवाई करने से बचती रही है. इसे लेकर मनरेगा वाच ने राज्य सरकार को लेटर लिखा है.
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चार सालों से राज्य रोजगार गारंटी परिषद् की बैठक नहीं
मनरेगा वाच के मुताबिक राज्य में मनरेगा अधिनियम 2005 की कई धाराओं का लगातार उल्लंघन जारी है. धारा 12 (1) के अनुसार झारखंड राज्य रोजगार गारंटी परिषद् की बैठक जरुरी है. पर इसकी अंतिम बैठक 4 साल पहले 27 जुलाई 2016 को ही हुई थी. अब बैठक नहीं होने के कारण मनरेगा योजनाओं पर नीतिगत निर्णय और अनुश्रवण का काम नहीं हो रहा है. इसी तरह मनरेगा योजनाओं के चयन एवं क्रियान्वयन में ग्राम सभाओं की भूमिका को लगातार कमजोर किया जा रहा है. 2020-21 में जो भी योजनाएं ली गयी हैं, उनमें ग्राम सभाओं की कोई भी भूमिका नहीं है. पेसा अधिनियम के तहत गठित ग्राम निगरानी समितियों को भी दरकिनार किया गया है.
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मनरेगा लोकपालों पर उदासीनता
प्रत्येक जिले स्तर पर मनरेगा से सम्बंधित शिकायतों को प्राप्त करने, जांच करने और आदेश पारित करने के लिए मनरेगा लोकपालों की नियुक्ति का प्रावधान है. लेकिन झारखंड में जुलाई 2020 से मनरेगा लोकपालों की भूमिका को निष्प्रभावी कर दिया गया है. मनरेगा योजना में ग्राम पंचायत और प्रखंड स्तर पर शिकायत निवारण प्रणाली कमजोर है. जिला एवं राज्य स्तर पर सिर्फ उन्हीं मामलों पर आंशिक कार्रवाई की जाती है जिनमें वित्तीय गड़बड़ियां शामिल हैं. प्रखंड स्तर पर मनरेगा श्रमिकों और आम नागरिकों की समस्याओं का निदान नहीं हो रहा है.
मनरेगा के कानूनी प्रावधान हों लागू
नरेगा वाच ने ग्रामीण विकास विभाग से मांग की है कि मनरेगा योजना के तय क़ानूनी प्रावधानों को राज्य में सख्ती से लागू कराया जाये. इससे मनरेगा को सुचारू रूप से चलाया जा सकेगा. मनरेगा श्रमिकों और कमजोर वर्गों के हित में नीतिगत निर्णय लिए जा सकेंगे. अनियमितताओं पर नियमित निगरानी रखी जा सकेगी.
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