
Dhanbad : धनबाद के गांधी सेवा सदन में धनबाद जिला डेकोरेटर्स एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने गुरुवार को प्रेस वार्ता की. इस पदाधिकारियों ने कहा कि इस वैश्विक महामारी की वजह से धनबाद जिला डेकोरेटर्स एसोसिएशन के लगभग 1500 सदस्यों का व्यवसाय पूर्णरूप से खत्म होने के कगार पर है.
इस साल के मार्च महीने से ही लगे लॉकडाउन की वजह से सभी तरह के कार्यक्रम बंद हैं. मार्च से लेकर मई तक कोई भी कार्यक्रम नहीं होने की वजह से लगभग एक लाख कर्मचारियों और मजदूरों के साथ-साथ सभी व्यवसायियों के यहां चूल्हा-चौका बंद होने के कगार पर है.
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शादी में 200 लोगों के शामिल होने की मिलेगी अनुमति तो सोशल डिस्टेंसिंग का रखेंगे पूरा ध्यान
इस बैठक में शामिल एसोसिएशन के महासचिव पुरुषोत्तम कुमार ने कहा कि डेकोरेटर्स वालों के लिए अब भी एक महीने का व्यवसाय बचा है. जून महीने में कुछ लगन है. अगर सरकार इस लगन के दौरान शादी शमारोह में 20 आदमी के बजाए कम से कम 200 से 250 सौ व्यक्तियों के शामिल होने की अनुमति दे तो हम सभी डेकोरेटर्स वालों की स्थिति में कुछ सुधार होगा. उन्होंने कहा कि इसके लिए हम सभी डेकोरेटर्स के लोग एग्रीमेंट में सोशल डिस्टेंस का पूर्ण रूप से ख्याल रखेंगे.
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जून में अगर मिलेगी छूट तो सुधरेगी सबकी हालत
वहीं एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रदीप कुमार सिंह ने कहा कि शादी के सीजन में इस व्यवसाय से अनेक लोग जुड़े हुए रहते हैं. जैसे डेकोरेटर्स, कैटरर्स, लाइट, फ्लावर, वैंक्वेट, हॉल, बैंड, वीडियोग्राफी, हलवाई, ट्रांसपोर्टर, पंडित, नाई, कलाकार के अलावा सभी प्रकार के सामान के दुकानदार. ये सभी लोग डेकोरेटर्स के बंद होने से बेरोजगारी की स्थिति में आ गये हैं. अगर सरकार जून महीने के लगन में हमारी मांगें पूरी करती है तो डेकोरेटर्स वालों की स्थिति में कुछ सुधार आ सकता है. उन्होंने कहा कि जून महीने का लगन खत्म होने के बाद नवंबर-दिसंबर तक कोई भी अनुष्ठान नहीं होता है.
... तो सड़क पर आने को होंगे बाध्य
अध्यक्ष ने यह भी कहा कि इस लॉकडाउन के कारण परिवार और अपने मजदूरों के साथ-साथ गोदाम का भाड़ा, बैंक का लोन, बच्चों की स्कूल फीस, बिजली का बिल, दुकान का भाड़ा और अपने पारिवार के लिए भोजन की व्यवस्था करना बहुत ही मुश्किल हो गया है. अध्यक्ष ने यह भी कहा कि इस व्यवसाय से ही सरकारी काम हो या राजनीतिक दलों का मंच, साउंड हो या कोई अन्य काम, हम सभी के बिना नहीं हो सकता है. उन्होंने कहा कि अगर सरकार हमारी बातों पर ध्यान नहीं देती है तो एसोसिएशन आगे कड़ा रुख अपनाते हुए 9 लाख मजदूरों और कर्मचारियों को लेकर सड़क पर आने को बाध्य होगा.
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