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5 हों या 10 लाख प्रवासी मजदूर, मोबाइल एप की मदद से अगले एक सप्ताह में मिलेगी आर्थिक मदद : हेमंत

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  • मुख्यमंत्री ने लांच किया मोबाइल एप, कहा – अन्य राज्यों में फंसे प्रवासी मजदूरों की मदद में मील का पत्थर साबित होगा एप

Ranchi : कोरोना महामारी के दौरान राज्य के बाहर फंसे झारखंडी मजदूरों को आर्थिक मदद मिले, इसके लिए प्रोजेक्ट भवन में गुरुवार को एक कार्यक्रम में राज्य सरकार ने एक मोबाइल एप की शुरुआत की. मुख्यमंत्री विशेष सहायता योजना के तहत लांच किये गये इस मोबाइल एप का मुख्य उद्देश्य लोगों की फरियाद सहजता से सरकार तक पहुंचाना है.

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मोबाइल एप लांच कार्यक्रम में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, वित्त मंत्री रामेश्वर उरांव, स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता, मुख्य सचिव सुखदेव सिंह सहित कई अधिकारी उपस्थित थे. सीएम ने इस मोबाइल एप को लांच करने के पीछे का लक्ष्य भी बताया. उन्होंने कहा कि इसकी मदद से सरकार बाहर फंसे मजदूरों चाहे वह 5 लाख हो या 10 लाख, उन सभी को अगले एक सप्ताह में आर्थिक सहायता पहुंचायेगी. सीएम ने कहा कि कोरोना महामारी के दौरान प्रवासी मजदूरों को मदद पहुंचाने में यह एप एक मील का पत्थर साबित होगा.

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एप को https://covid19help.jharkhand.gov.in से डाउनलोड किया जा सकता है

टूटती जा रही है मजदूरों की सहनशीलता, सरकार देगी आर्थिक मदद

मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोना महामारी के संकट में देश के अन्य राज्यों में फंसे मजदूरों के लिए यह एप शुरू हुआ है. एप के द्वारा सरकार प्रवासी मजदूरों तक पहुंच उन्हें आर्थिक मदद देने का काम करेगी. यह आर्थिक मदद संख्या बल के आधार पर सीधे उनके बैंक खाते में डाली जायेगी.

सीएम ने कहा कि लॉकडाउन के दौरान फंसे प्रवासी मजदूरों की सहनशीलता टूटती जा रही है. इसमें कोई शक नहीं कि हालत गंभीर होते जा रहे हैं. मुख्यमंत्री ने उम्मीद जतायी कि इस आर्थिक मदद से फंसे लोगों को काफी मदद मिलेगी. एप को डाउनलोड करने के बाद मदद लेनेवाले मजदूरों द्वारा इसमें आकंड़े भरेंने होंगे. इसके बाद राज्य सरकार इस आंकड़े की सत्यता की जांच करेगी. इसमें नाम और आधार नंबर मिलान करने, उनके बैंक खाते राज्य के अंदर के किसी बैंक में होने के साथ वैध मोबाइल नंबर जिस पर ओटीपी भेजी जायेगी, शामिल है.

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100 प्रतिशत तो नहीं, लेकिन सीमित स्तर पर ही लोगों को पहुंचायी गयी है मदद

हेमंत सोरेन ने कहा कि लॉकडाउन के पहले चरण की समाप्ति के बाद केंद्र सरकार ने 3 मई तक लॉकडाउन-2 की घोषणा की है. लेकिन दूसरे राज्य में फंसे प्रवासी मजदूरों की समस्याएं जैसी की तैसी बनी रहीं. आज लगभग 7 लाख लोग दूसरे राज्य में फंसे हुए हैं. इसमें मजदूर वर्ग की संख्या सबसे अधिक है. सीएम ने कहा कि लॉकडाउन के शुरुआती चरण के समय से ही झारखंड सरकार ने अपने सीमित संसाधनों में तैयारी की है. सरकार जानती है कि राज्य में गरीबों और मजदूरों की संख्या काफी है. राज्य में इनके समक्ष रोजगार नहीं होने के कारण वे दूसरे राज्य में काम की तलाश में गये हैं. लॉकडाउन की बढ़ायी अवधि के कारण सरकार उन्हें राशन तो उपलब्ध नहीं करा पा रही है. लेकिन सरकार का यह प्रयास बना है कि बनाये गये नोडल अधिकारियों द्वारा संबंधित राज्य के अधिकारियों से बातचीत कर फंसे प्रवासी लोगों को मदद दी जाये. उन्होंने कहा कि इस प्रयास से 100 प्रतिशत लोगों को मदद पहुंचायी गयी है. लेकिन अधिकारियों के प्रयासों से सीमित स्तर पर ही, लेकिन लोगों तक मदद पहुंचायी गयी है.

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