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स्टार्ट-अप उद्योग और समग्र अर्थव्यवस्था पर कोरोना वायरस का प्रभाव

Vivek Bindra

(Motivational speaker and Entrepreneur coach)

Delhi: घातक कोरोना वायरस का प्रभाव दुनियां भर में फैल गया है जिसका मानव जीवन और अर्थव्यवस्था पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है. आइए हम इसका अनुमान लगाएं कि यह समग्र व्यवसाय को कैसे प्रभावित करेगा. कोरोनो वायरस उन कंपनियों पर प्रभाव डाला है जो विश्व स्तर पर एक असाधारण चुनौती का सामना कर रहे हैं. आधिकारिक तौर पर कोरोना को विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा महामारी घोषित किया गया है.

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कोरोना वायरस का प्रभाव केवल चिकित्सा चुनौती तक ही सीमित नहीं है, बल्कि हम इससे आर्थिक रूप में भी एक अद्वितीय परीक्षा का सामना कर रहे हैं. कई नेता भविष्यवाणी कर रहे हैं कि यह स्थिति 2008 की वैश्विक मंदी से भी बदतर होगी.

पहले से ही एविएशन, टूर एंड ट्रैवल, हॉस्पिटैलिटी, इवेंट्स और स्पोर्ट्स जैसे कुछ उद्योग बुरी तरह प्रभावित हुए हैं. सामान्य जनता इससे सीधी जुड़ी हुई है. और जरूरी चीजों को भारी नुक्सान हुआ है. साथ ही कैब सेवाएं, सिनेमा, होटलों के व्यवसाय पहले से ही एक बड़े अंतर से नीचे गिर चुके हैं.

स्थिति की गंभीरता को समझते हुए, कॉर्पोरेट्स पहले से ही प्लान बी पर काम करना शुरू कर चुके हैं, विशेष तौर पर स्टार्ट-अप पर कोरोनो वायरस का प्रभाव बहुत गंभीर रूप से पड़ा है.

कई पूंजीपतियों ने, जो संभावित स्टार्ट-अप की आर्थिक सहायता करते हैं, इस स्थिति में खर्चों में कटौती और संरक्षण के लिए अपने चयनित स्टार्ट-अप को सलाह दी है:

  1. शुरुआती स्टार्ट-अप की स्थिति क्या है: इस स्थिति में नए स्टा र्ट-अप को बहुत अधिक कठिनाई का सामना नहीं करना पड़ेगा. क्योंकि इनकी लागत बहुत कम या सीमित है. इसके अलावा स्टार्ट-अप जो एंजेल फंडिंग की तलाश कर रहे हैं वे स्थानीय स्तर पर अपनी व्यवस्था कर सकते हैं.
  2. फंडिंग करना बहुत मुश्किल होगा: स्टार्ट-अप पर इस कोरोना वायरस के प्रभाव की मुख्य समस्या उन लोगों के लिए होगी जो सीरीज़ फंडिंग के बीच में हैं चाहे वो ए, बी या सी राउंड में हों क्योंकि ऐसी स्थिति में निवेशकों और स्टार्ट-अप संस्थापकों के बीच निवेश के लिए कई दौर की बैठकें होंगी और ऐसी गंभीर स्थिति में निवेश के दौर को अंतिम रूप देना बेहद मुश्किल है.
  • बड़े और प्रसिद्ध निवेशक दुनिया के विभिन्न हिस्सों में व्याप्त हैं और इस कोरोना के प्रकोप में सभी कुछ स्थगित है जिसे कई कंपनियों ने घोषित भी किया है.
  • लेकिन अधिकांश कंपनियां अन्य योजनाओं पर भी काम कर रही हैं. जैसे कि दूरदराज के क्षेत्रों के माध्यम से सौदों को कैसे बंद किया जाये क्योंकि लंबे समय तक इंतजार करना सभी के लिए भारी व्यावसायिक नुकसान उठाना होगा.
  1. शेयर बाजार भी नीचे है: स्टॉक मार्केट भी बुरी तरह से प्रभावित हुए हैं और इसका व्यापक प्रभाव पड़ेगा. हम सभी जानते हैं कि स्टार्ट-अप आम तौर पर बड़े व्यापारिक परिवारों के पास जाता है. ताकि निवेश के बीच में अपने ऋणों को पाट सकें जब तक की निवेश आये.
  • लगभग सभी बड़े व्यापारिक समूहों ने दुनिया भर के शेयर बाजार में अपना पैसा लगाया है. और वैश्विक स्तर पर इस कोरोना वायरस के प्रभाव से स्टॉक मार्केट में भारी अंतर से गिरावट आ रही है, इसलिए वर्तमान परिदृश्य में किसी भी व्यावसायिक परिवार से ऋण प्राप्त करना भी मुश्किल है.
  1. किस स्टार्ट-अप पर निवेश किया जाये: प्रत्येक स्टार्ट-अप को अपने वैल्यूएशन के बढ़ाने या बनाने के लिए काफी पैसे की जरूरत पड़ती है. पिछले 2 महीनों तक यही रणनीति पूरे स्टार्ट-अप सेक्टर में लागू की गई थी.
  • अब अचानक कोरोनो वायरस प्रभाव के कारण धन पूरी तरह से सूख गया है और स्टार्ट-अप जिनमें काफी पैसे लग रहे थे, मुनाफे को बढ़ाने के लिए उनपर भारी दबाव आ गया है. लेकिन अब सभी उद्योगों में लगे स्टार्ट-अप को ग्राहक और बिक्री के आंकड़ों को बढ़ाना बहुत ही असंभव होगा. ऐसी स्थिति में पूंजीपति बड़ी ही दुविधा में होते हैं कि कौन से स्टार्ट-अप की सहायता करें.

भारत सरकार भी इस स्थिति से उबरने के लिए कई कदम उठा रही है, देखना होगा कि अगले कुछ तिमाहियों में स्थितियां कैसा आकार लेती हैं.

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