
Gaurav/Saurav
Muri: मूरी में मंगलवार को दोपहर करीब 1.20 बजे एक ऐसी आफत आयी जो चंद सेकेंडों में ही विकराल हो गयी. यह कैसी आफत रही होगी इसका अंदाजा मलबे के उस पहाड़ को ही देख कर लग रहा था जिसका टूटा हिस्सा सिल्ली से ही दिख रहा था. लगाम (घटनास्थल) पहुंचने के बाद जो लोग दिखे उनकी आंखों में इस हादसे का खौफ अब तक बरकरार था. कुछ आगे कर उस घटना की भयावहता को बताना चाह रहे थे, तो कुछ अब भी डर के मारे चुप थे. जहां यह हादसा हुआ था वहां से मुरी स्टेशन करीब आधा किलोमीटर है. क्या हुआ वहां इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 35 फीट ऊंचा और करीब 40 इंच चौड़ा गार्ड वॉल आधा किलोमीटर तक बह कर मुरी स्टेशन पहुंच गया था. हाईवा और जेसीबी इस तरह से गिरे पड़े थे जैसे किसी बच्चे ने अपने खिलौने को बिखेर रखा हो. इतना सब कुछ सिर्फ छह सेकेंड में हुआ था.
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नहीं शुरू हो सका है बचाव अभियान
मुरी के लगाम, मारदू और कुसमाटांड़ के बीच में बनी हिंडालको कंपनी का रेड मड कास्टिक तालाब महज छह सेकेंड में तबाह हो गया. ग्रामीणों की मानें तो इसी छह सेकेंड के अंदर ही करीब 70 से 80 मजदूरों की जान उसके मलबे में फंस गयी. लंच के समय दुर्घटना घटी, नहीं तो करीब 200 लोगों की जान चली जाती. राहत और बचाव कार्य के लिए एनडीआरएफ की टीम पहुंच चुकी है, पर राहत का काम रास्ता नहीं मिलने की वजह से 24 घंटे के बाद भी शुरू नहीं हो पाया है. ग्रामीणों के अनुसार दिन में यहां करीब 200 से 250 मजदूर ठेका के तहत काम करने पहुंचते थे. काम मेकाफेरी नामक कंपनी को मिला हुआ था.
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बंगाल के मजदूर वहीं खाना खा रहे थे
ग्रामीणों ने कहा कि फंसनेवालों की संख्या और अधिक होती अगर हादसा लंच के समय नहीं हुआ होता. प्रत्यक्षदर्शी धनंजय महतो ने बताया कि 1 बज कर 15 मिनट पर जब घटना घटी उस वक्त आसपास के ग्रामीण अपने घर चले गये थे. बंगाल से आनेवाले मजदूर अपना टिफिन लाकर वहीं खाते और आराम करते थे. उसी वक्त ये घटना घटी और छह सकेंड में ही पूरा पहाड़ गार्ड वाल के साथ बह गया. 15 मिनट के बाद जाकर धंसान रुका. हिंडाल्को भले ही किसी के हताहत होने की बात से इंकार कर रही हो, पर जांच को पहुंची प्रमंडलीय आयुक्त ग्रामीणों को कह रहीं थी कि जो लोग वहां फंसे हैं, उनकी भी जान है, समय रहते रास्ता मिलने पर जान बचायी जा सकती है.
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सिल्ली थाना के असुरकोडा गांव के 12 लोगों के गायब होने का ग्रामीण कर रहे दावा
सिल्ली थाना के असुरकोडा गांव के 12 लोगों के गायब होने की बात ग्रामीण कर रहे हैं. 48 वर्षीय धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि गायब लोगों में 3 महिलाएं और 9 युवक हैं. इस मलबे के कारण दो तालाब भी भर चुके हैं, जिसमें नहा रहे ग्रामीणों के भी दब जाने की बात वे कह रहे हैं. धर्मेंद्र आगे बताते हैं कि कंपनी के लोग गांव में जाकर मामले को सामने नहीं लाने के लिए छिप कर मीटिंग कर रहे हैं. चौंकाने वाली बात ये थी कि आसपास के गांव के लोग घटनास्थल पर आने से बच रहे हैं. वे कहते हैं कि सिल्ली बहुत राजनीतिवाला गांव है. कुछ बोल कर फंसना नहीं चाहते.
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मलबा हटाने का रास्ता ही नहीं, एक महीने लग जायेगा पूरा मलबा हटाने में
मलबा जहां जमा है उसके पूरब में स्वर्णरेखा नदी है, पश्चिम में रेलवे ट्रैक है. दक्षिण में लगाम गांव है और उत्तर में रांची-पुरुलिया रोड है. मलबा हटाने का फिलहाल कोई रास्ता नहीं दिख रहा है. दक्षिणी छोटानागपुर प्रमंडल की आयुक्त शुभ्रा वर्मा घटनास्थल पर पहुंची थीं. वे ग्रामीणों से ही पूछ रहीं थी कि रास्ता किधर से दीजियेगा. साथ ही कहा कि स्टेशन को प्रभावित नहीं करना है. ग्रामीणों की मानें तो सिर्फ एक रास्ता बचता है स्वर्णरेखा नदी होकर हटाना पड़ेगा, जिससे नदी पूरी तरह से पॉल्यूटेड हो जाएगी.
दो साल पहले ही बना था गार्ड वाल
हिंडाल्को प्लांट का मलबा 40 साल से जमा था. ग्रामीणों ने बताया ये जितना ऊंचा अभी दिख रहा है, उससे दोगुने गड्ढे से ही चालू हुआ था. 40 साल से जमा हो रहे इस मलबे के किनारे मात्र दो साल पहले ही गार्ड वाल बनाया गया है. उसका काम अब भी चल ही रहा था. ग्रामीणों ने बताया कि सीपीसीबी ने जब कंपनी को बंद कराने के आदेश जारी किये थे, तब आइआइटी मुंबई और रुड़की से जांच करा कर बोल दिया कि 40 साल तक कुछ नहीं होगा. विडियो रिकॉर्डिंग नहीं करने की शर्त पर बताया कि कंपनी और पॉल्यूशन बोर्ड की मिलीभगत से ऐसा हुआ है. अगर वे सतर्क रहते तो ऐसी घटना नहीं होती.
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500 मीटर तक बहकर आ गया है मलबा
लगाम गांव के पास पटरी के किनारे जमा मलबा देख कर ही वीभत्स मंजर का अंदाजा लगाया जा सकता है. शुरुआत में ही एक हाईवा गिरा दिख गया. 35 फीट ऊंचा और 40 इंच चौड़ा मजबूत गार्ड वाल आधा किलोमीटर तक पहुंच गया है. मलबा तक पहुंचने से भी ग्रामीण और भीड़ डर रही है. आपस में वे बात करते हुए कह रहे हैं कि लाश तक नहीं मिल पाएगी. पौंड का मलबा आधे किलोमीटर तक फैल चुका है. जिसमें चार पांच गाड़ियां सामने से फंसी दिख रही हैं. एनडीआरएफ की टीम का कहना है कि रास्ता मिलने पर ही बचाव कार्य शुरू किया जा सकेगा.
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भरी होने के वजह से बच गयी मालगाड़ी, खाली होने से पलट जाती
रेलवे साइडिंग पर काम करनेवाले गैंगमैन ने बताया कि यहां करीब 200 लोग हर दिन काम करने आते हैं. वे बताते हैं कि बहुत लोग फंस गये हैं. निकालना भी मुश्किल है. एक बजे से पहले होता तो 200 से अधिक लोगों की जान चली जाती. उन्होंने बताया कि ट्रैक के किनारे माल लदी मालगाड़ी खड़ी थी इसलिए मलबी पूरी पटरी तक नहीं पहुंच पाया. खाली रहने पर या पैसेंजर ट्रेन रहने पर ट्रेन को ही पलट देता.
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नहीं मिल पाएगी लाश
ग्रामीण और मौके पर मौजूद लोग दावा कर रहे हैं कि 48 घंटे तक राहत कार्य चालू नहीं होने पर लाश भी नहीं मिल सकेगी. मलवे में एसीड होने के वजह से तुरंत गल जाएगी. अगर मिलेगा तो सिर्फ हड्डी. लोगों का कहना है कि पहले मिट्टी हटाने के लिए रास्ता तय होगा उसके बाद मिट्टी को हटाया जाएगा. तब जाकर लाश निकलेगा जिसमें अभी देरी है. हिंडाल्को भले ही किसी के हताहत होने की बात नहीं स्वीकार कर रहा हो पर मौके पर पहुंचीं प्रमंडलीय आयुक्त लोगों से यह कह रहीं थीं कि रास्ता तो दीजिये इंसान फंसे हुए हैं, हमारी तरह उनकी भी जान है. समय रहने पर उन्हें बचाया जा सकता है.
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टिप्पणी
दुर्घटनास्थल पर जब हम पहुंचे तो हमें लगा था कि कंपनी के लोग वहां होंगे. हमारे वहां पहुंचते ही यह भ्रम टूट गया. तीन से चार घंटे में हमने दर्जनों ग्रामीण से बात की. मौके पर ग्रामीण एसपी, सिल्ली डीएसपी और प्रमंडलीय आयुक्त पहुंची थीं. एनडीआरएफ की टीम भी पहुंची थी. दूर दराज के ग्रामीण भी इस मंजर को देखने पहुंचे पर कंपनी के एक भी कर्मचारी और अधिकारी का वहां नहीं पहुंचना हमें चौंका रहा था. कंपनी के अलावा ठेका कंपनी के एक भी लोग मौजूद नहीं थे.
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