
- अंगद के पैर की तरह है फैसला, पीछे हटने का सवाल ही नहीं : रामटहल चौधरी
- अटल-अडवाणी युग को बताया वर्तमान से बेहतर
Ranchi: भाजपा के खिलाफ पिछले कुछ दिनों से बगावती तेवर अपनाये हुए रांची के सांसद रामटहल चौधरी ने पार्टीकी प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने रांची से निर्दलीय चुनाव लड़ने की घोषणा की. राजधानी के एक होटल में बुधवार को प्रेस वार्ता कर उन्होंने अपने फैसले को अंगद के मजबूत पैर के समान बताया. उन्होंने कहा कि जिस पार्टी को सींचने के लिए उन्होंने अपना पूरा जीवन लगा दिया, आज उन्हें दरकिनार कर दिया गया. अब पीछे हटने का सवाल ही नहीं. वह 16 अप्रैल को नामांकन भरेंगे. इस दौरान उन्होंने भाजपा के पांच सालों की नीतियों और पार्टी को अपने दिये योगदानों का भी खुल कर जिक्र किया.
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कार्यकर्ताओं का पूरा सपोर्ट
रामटहल चौधरी ने कहा कि जनसंघ को उन्होंने रांची और ग्रामीण इलाकों में कांके सीट से पहली बार चुनाव जिताया था. बीजेपी वालों की यह भूल है कि आज रांची सीट पूरी तरह से भाजपामय हो गयी है. पार्टी जिसे चाहेगी, उसे चुनाव जीतवा देगी. बातों ही बातों में उन्होंने केंद्र की मोदी और राज्य की रघुवर सरकार पर निशाना साधा. कहा कि अटल–अटवाणी युग के विपरीत आज पार्टी तानाशाही रवैये पर काम कर रही है. पार्टी नेतृत्व की यह बड़ी भूल है कि वे उनके कारण चुनाव जीतते रहे हैं. रांची के कार्यकर्ताओं का पूरा सपोर्ट उनके साथ है.

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जब हटाना ही था तो पहले बताना चाहिए था
रामहटल चौधरी ने कहा कि उनसे स्वेच्छा से चुनाव न लड़ने की घोषणा करने को कहा गया था. जब यही होना था कि तो उन्होंने पिछले पांच वर्ष तक पार्टी को सींचने के लिए इतनी मेहनत क्यों की. जब पार्टी केंद्रीय नेतृत्व ने उन्हें हटाने का फैसला किया था, तो एक बार उनसे बात तो करनी चाहिए थी. लेकिन ऐसा नहीं कर एकतरफा निर्णय ले लिया गया. यहां तक कि पार्टी किसे टिकट देगी, इसपर भी उनसे राय लेने की किसी ने पहल नहीं की. उम्र की बात कर उन्हें बाहर कर दिया गया. इसे उन्हें काफी ठेस पहुंची है. इसलिए उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला किया है.
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तानाशाही की तरह चल रहा पार्टी नेतृत्व
सांसद ने कहा कि मोदी युग से पहले अटल-अडवाणी की सरकार में पार्टी सांसदों को पूरा सम्मान मिलता था. जिस मुद्दे पर कोई विचार करना हो, सभी सांसदों से राय ली जाती थी. लेकिन आज ऐसा लगता है कि केंद्र और राज्य नेतृत्व पूरी तरह से तानाशाही पर चल रही है. जहां तक टिकट कटने की बात है, तो इसके पीछ केवल गलती यही थी कि उन्होंने जनता के मुद्दे को खुल कर पार्टी नेतृत्व के समक्ष रखा. इनमें पारा शिक्षकों की मांग, आंगनबाड़ी सेविकाओं की समस्याओं, सीएनटी एक्ट का विरोध, कुर्मी को आदिवासियों की सूची में शामिल करना, जाति प्रमाण पत्र में हो रही गड़बड़ियां, पिछले वर्गों को उनकी जनसंख्या के हिसाब से आरक्षण देने, बाहरी छात्रों को नौकरियां देकर राज्य में बेरोजगारी बढ़ाने, स्थानीय नीति में सुधार आदि मुद्दे शामिल हैं.
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