
Jamtara: जिले में स्वास्थ्य व्यवस्था की हालत खस्ता है. वहीं जामताड़ा का बर्न यूनिट वर्षों से बंद है.जामताड़ा सदर अस्पताल में बर्न यूनिट रहने के बाद भी लोगों को इसका लाभ नहीं मिल रहा है. जामताड़ा सदर अस्पताल में बर्न मरीजों के पहुंचने पर उसे धनबाद रेफर कर दिया जाता है.
लोगों को इस बात का मलाल है कि जिला में बर्न यूनिट रहने के बाद भी ये बेकार है. इस पर किसी जनप्रतिनिधि का ध्यान नहीं जा रहा है. जामताड़ा के लोगों को बर्न मरीजों को बाहर ले जाने पर कई सारी परेशानी होती हैं. आर्थिक परेशानी के साथ-साथ मानसिक परेशानी का भी सामना करना पड़ता है.
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जिला सदर अस्पताल में सुविधाओं का अभाव
जामताड़ा सदर अस्पताल तो बना दिया गया है, लेकिन लोगों को कई सारी बुनियादी सुविधाओं के लाभ से वंचित रहना पड़ता है. जामताड़ा सदर अस्पताल में अल्ट्रासाउंड, आइसीयू व अन्य जांच की सुविधा नहीं है. मरीजों को इन छोटी-छोटी जांच के लिए रेफर कर दिया जाता है.
जिला में डॉक्टर के कुल 89 पोस्ट हैं, लेकिन वर्तमान में मात्र 26 चिकित्सक ही उपलब्ध हैं. जिले के कई सीएचसी स्तर पर भी सरकारी चिकित्सक उपलब्ध नहीं है. ऐसे में आयुष चिकित्सक के भरोसे जिले के कई सीएचसी का ओपीडी चल रहा है.
आज भी लोग दूसरे शहरों की लगाते है दौड़
जामताड़ा को जिला बने 19 साल हो गए. लेकिन लोगों को स्वास्थ्य संबंधी सुविधाएं आज भी नहीं मिल रही हैं. जिले के लोगों को अक्सर छोटी-छोटी बीमारियों में भी बाहर की दौड़ लगानी पड़ती है. इससे लोगों को समय के साथ-साथ आर्थिक और मानसिक परेशानी से भी दो चार होना पड़ता है.
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