न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें

बालिग हुआ झारखंड, स्थापना दिवस पर सरकार को करनी पड़ी स्टन गन ग्रेनेड से फायरिंग, पत्रकारों को भी पीटा

प्रशासन ने फायरिंग से किया इनकार, कहा आंसू गैस के गोले छोड़े गये

1,031

Akshay Kumar Jha

Ranchi: सुबह झारखंड के सभी अखबारों में स्थापना दिवस के मौके पर मुख्यमंत्री रघुवर दास का एक लेख छपा था. जिसमें उन्होंने इस बात का जिक्र किया है कि झारखंड बालिग हो गया है. 18 सालों से झारखंड हर साल स्थापना दिवस मनता देखता आया है. लेकिन इस बार जो हुआ वो हर बार से अलग था. ऐसा पहली बार हुआ कि कार्यक्रम स्थल से ज्यादा शोर कार्यक्रम स्थल के बाहर हो रहा था. रघुवर दास हाय-हाय और रघुवर दास छत्तीसगढ़ वापस जाओ जैसे नारे लग रहे थे. कार्यक्रम के दौरान ही पुलिस-प्रशासन को स्टन गन ग्रेनेड (इस प्रकार की फायरिंग में बहुत तेज आवाज होता है पर जानमाल का कोई नुकसान नहीं होता) से फायरिंग करनी पड़ी. कुछ ऐसी बेशर्मी भी करने की कोशिश की गयी, जिसे कैमरे में कैद होने से पुलिस-प्रशासन को परहेज था. लिहाजा पत्रकारों पर भी लाठियां चलीं. हर ओर काले झंडे हवा में लहरा रहे थे. पुलिस पारा शिक्षकों की भीड़ को खदेड़ने के लिए कभी मोरहाबादी मैदान के बांए तो कभी दांए भागती दिखी. जिले के आला अधिकारियों को इस बात का ज्यादा ध्यान रखना पड़ रहा था कि कहीं कोई उनकी तस्वीर न खींच ले. गलती से किसी ने फोटो खींच भी लिया तो उसे डिलीट करा दिया गया. इन सभी बातों से ये साबित होता है कि सच में झारखंड बालिग और साथ में उदंड हो गया है.

इसे भी पढ़ें – गोलियों की गूंज और धमाकों के बीच मना राज्य का स्थापना दिवस, नौ कैबिनेट मंत्रियों ने नहीं की शिरकत

सरकार का सारा तंत्र हुआ फेल, पारा शिक्षकों ने नाकों चने चबवाया

पारा शिक्षकों की मुख्य सचिव से वार्ता विफल होने के बाद ही पारा शिक्षकों ने स्थापना दिवस के दिन विरोध करने की घोषणा की थी. जवाब में सरकार ने यह साबित करने की कोशिश की कि पारा शिक्षकों को जिले से बाहर ही रोक लिया गया है. सुबह एक पारा शिक्षक ने फोन पर जानकारी दी कि उनके साथी बीजेपी के पास पर ही कार्यक्रम स्थल में एंट्री लेंगे. और ऐसा हुआ भी. सीएम के मोरहाबादी मैदान पहुंचते ही पारा शिक्षकों ने हंगामा शुरू कर दिया. हंगामा बढ़ता देख पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा. कुछ देर के लिए भीड़ तितर-बितर तो हुई. लेकिन दोबारा पारा शिक्षक इकट्ठा हुए और हंगामा शुरू हुआ. एसडीएम गरिमा सिंह और एसएसपी अनीश गुप्ता के आदेश के बाद कुछ पारा शिक्षकों को जबरन बस में ठूंसने का काम शुरू हुआ. लेकिन वो कामयाब नहीं हुए. इतना हो ही रहा था कि कार्यक्रम स्थल से काफी शोर होने लगा. हवा में कुर्सियां उड़ती नजर आने लगीं. सरकार के खिलाफ नारेबाजी शुरू हो गयी. सीएम को निशाना बनाते हुए नारेबाजी की गयी. इसमें काफी संख्या में महिला पारा शिक्षक भी शामिल थीं. हालांकि दस मिनट के बाद सभी को कार्यक्रम स्थल से बाहर निकाल दिया गया. इससे यह साबित हुआ कि पारा शिक्षक पास लेकर अंदर जाने में कामयाब हुए थे.

इसे भी पढ़ें – सुबोधकांत का सीएम रघुवर से सवाल- क्या उनके पहले के भाजपा सीएम निकम्मे व जाहिल थे?

पत्रकारों का कैमरा छीना और पीटा

कार्यक्रम स्थल से पारा शिक्षकों को भगाने के बाद फिर से हंगामा शुरू हुआ. इस बार पुलिस को पारा शिक्षकों को खदेड़ने के लिए स्टन गन ग्रेनेड से फायरिंग करनी पड़ी. रैफ के जवानों के साथ पत्रकार भी कवरेज करने के लिए दौड़े लेकिन रैफ के कुछ जवान पारा शिक्षकों के बजाय पत्रकारों पर अपना गुस्सा निकालने लगे. एक ने कैमरा छीनने की कोशिश की तो कुछ ने एक पत्रकार पर लाठी बरसा दी. पत्रकार को धक्का दिया. वो जमीन पर गिर गया. बाद में पत्रकारों ने विरोध किया तो बेचारे पत्रकार की जान बची. वहां मौजूद सीनियर पुलिस अधिकारियों के सामने पत्रकारों ने इस बात का विरोध भी किया. इसके बाद पारा शिक्षकों को दौड़ा-दौड़ा कर पीटा गया. सभी अपनी जान बचा कर भागे.

इसे भी पढ़ें – स्थापना दिवस अपडेटः पारा शिक्षकों के प्रदर्शन को रोकने के लिए मोरहाबादी में हवाई फायरिंग

कार्यक्रम खत्म होने के बाद हुई और फजीहत

स्थापना दिवस का कार्यक्रम खत्म होने के बाद ऐसा लगा कि अब सब ठीक हो गया है. लेकिन पिक्चर अभी बाकी थी. पारा शिक्षकों ने महिलाओं को आगे ला कर मोरहाबादी से कचहरी जानेवाली सड़क को जाम कर दिया. यह काम एक जगह नहीं बल्कि कई जगहों पर पारा शिक्षकों ने किया. रांची डीसी राय महिमापत रे, एसएसपी अनीश गुप्ता और लॉ एंड ऑर्डर मजिस्ट्रेट अखिलेश सिन्हा ऐसा होता देख एक्शन में आ गए. महिला दस्ता बुलाया गया. महिलाओं को हिरासत में लेकर जीप में बैठाया गया. लेकिन इन सब की तस्वीर उतारना प्रशासन को नागवारा लगा. पत्रकारों से बदतमीजी करते हुए उन्हें ऐसा करने से रोका गया. पास में एक अस्पताल को कैंप जेल की तरह इस्तेमाल किया गया. पारा शिक्षकों को पकड़-पकड़ कर लाया गया और जेल में रखा गया. करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद प्रशासन सड़क जाम हटवा सकी.

इसे भी पढ़ें – पारा शिक्षकों को रोकने की काम न आई रणनीति, हर स्कूल में पारा शिक्षकों को उपस्थित रहने का दिया गया था निर्देश

सरकारी खुफिया तंत्र फेल, कुछ नहीं कर सके आला अधिकारी

ऐसा नहीं था पारा शिक्षकों ने स्थापना दिवस के दिन हंगामे करने की बात एक या दो दिन पहले कही हो. फिर भी सरकार पारा शिक्षकों से निबटने की सही तैयारी नहीं कर सकी. जो भी तैयारी सरकार की तरफ से की गयी थी, सभी धरी-की-धरी रह गयी. आला अधिकारी मौके पर बेबस दिखे. उनके हाथ में कुछ नहीं था. पारा शिक्षकों की रणनीति इस बाबत ज्यादा सही थी. उन्होंने पूरे मोरहाबादी ग्राउंड को घेर रखा था. पुलिस गोल-गोल घूमते रही और पारा शिक्षकों को जो करना था वो बड़ी ही आसानी से करते दिखे. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर सरकारी तंत्र कर क्या रहा था. तैयारी की नहीं गयी थी या हंगामे को खुला न्योता दिया गया था. दिखावे के लिए सरकार की तरफ से राज्य परियोजना पदाधिकारी की तरफ से एक चिट्ठी दी गयी थी. जिसमें पारा शिक्षकों को हंगामा करने से मना किया गया था और आज के दिन अपनी सेवा स्कूल में देने की बात कही गयी थी. लेकिन पारा शिक्षकों ने सरकार के इस आदेश को ठेंगा दिखा दिया.

हमें सपोर्ट करें, ताकि हम करते रहें स्वतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता...

Comments are closed.

%d bloggers like this: