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खनन परियोजना से झरिया सबसे ज्यादा प्रभावित, फिर भी डीएमएफ फंड से नहीं हो रहा कोई काम

Pravin Kumar

Ranchi: धनबाद जिले का झरिया इलाका खनन परियोजनाओं से सबसे ज्यादा प्रभावित है. इसके बावजूद डिस्ट्रिक मिनरल फंड (डीएमएफ) के माध्यम से प्रभावित आबादी के लिए किसी भी योजना की स्वीकृति जिला प्रशासन ने नहीं दी है. जबकि वर्ष 2018 तक धनबाद जिला में 935.5 करोड़ रुपये की योजनाओं की मंजूरी डीएमएफ फंड से दी जा चुकी है.

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खनन से प्रभावित इलाके की आबादी को बेहतर सुविधा मुहैया कराने के मकसद से डीएमएफ फंड का गठन किया गया था. धनबाद जिले में हर वर्ष डीएमएफ में करीब 300 करोड़ रुपये जमा होने का आकलन है. राज्य भर में सबसे अधिक धनबाद जिले में डीएमएफ राशि इकट्ठा हो रही है. मार्च 2018 तक 715 करोड़ रुपये से अधिक खनन रॉयल्टी से मिल चुका है.

क्या है डिस्ट्रिक मिनरल फंड

झारखंड के खनन प्रभावित क्षेत्र में रहनेवाली आबादी को लाभ पहुंचाने के लिए डिस्ट्रिक मिनरल फाउंडेशन के तहत 2015 में बने कानून के आधार पर राज्य के 24 जिलों में डीएमएफ ट्रस्ट का गठन किया गया. ट्रस्ट में 2015 से पहले दिये गये खनन लीज की 30% और इसके बाद की लीज की 10% रॉयल्टी राशि डिस्टिक मिनरल फंड में जमा करने का नियम देश स्तर पर बनाया गया है.

इसके तहत खनन क्षेत्र के लाभार्थियों की पहचान कर उनके विकास के लिए खर्च किया जाना है. धनबाद जिले के डीएमएफ में 300 करोड़ जमा होने का अनुमान लगाया गया था. हाल के अनुमान के अनुसार धनबाद जिले में 111 कोयला खानों से लगभग 38 मिलियन टन कोयले का उत्पादन प्रतिवर्ष किया जाता है. भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (बीसीएल) 84 खानों के साथ जिले में सबसे बड़ा कोल ऑपरेटर है. अन्य में ईस्टर्न कोलफील्ड लिमिटेड, स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया, टाटा आयरन एंड स्टील कंपनी और इंडियन आयरन एंड स्टील कंपनी भी बड़े ऑपरेटर हैं.

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धनबाद में कोयला खनन से प्रभावित क्षेत्र

धनबाद के बाघमारा और कतरास प्रखंड में ग्रामीण जनसंख्या की 66.6 प्रतिशत, शहरी जनसंख्या की 33.3 प्रतिशत, निरसा के कुल ग्रामीण जनसंख्या की 61.4, बलियापुर की 86.2 प्रतिशत, गोविंदपुर की 89.7 प्रतिशत, गोविंदपुर की 89.7 प्रतिशत और तोपचांची की कुल 68.6 प्रतिशत ग्रामीण आबादी खनन से प्रभावित है.

प्रखंडकुल पंचायतखनन प्रभावित पंचायत 
घनबाद12 9 
बाघमारा6148 
निरसा2718 
एगारकुंड2011 
कलियासोल2004 
बलियापुर2312 
तोपचांची286 
गोविंदपुर395 

किन योजनाओं पर डीएमएफ से किया गया है खर्च

धनबाद जिले में डीएमएफ फंड से 935.5 करोड़ रुपये से अधिक योजना को मंजूरी दी गयी है, जिसमें झरिया का इलाका शामिल नहीं है. 856 करोड़ की 19 जलापूर्ति योजना एवं 79.5 करोड़ की स्वच्छता परियोजना स्वीकॉत की गयी है, जिसमें झरिया शामिल नहीं है. बाघमारा प्रखंड में 4 जलापूर्ति योजना, गोविंदपुर निरसा में चार, तोपचांची में एक और एगारकुंड प्रखंड में एक जलापूर्ति योजना को स्वीकृत किया गया है.

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कितनी लागत की कौन सी योजना

  • बाघमारा प्रखंड की ग्रामीण जलापूर्ति योजना 92.6 9 करोड़
  • महुदा बस्ती ग्रामीण जलापूर्ति योजना 11.55 करोड़
  • सौर आधारित मिनी ग्रामीण जल आपूर्ति योजना की नौ परियोजना में 1.37 करोड़
  • धर्मा बांध माइन पिट जलापूर्ति योजना में 0.14 करोड़
  • सदरियाडीह ग्रामीण जलापूर्ति योजना में 0.21 करोड़
  • गोविंदपुर निरसा उत्तरी प्रक्षेत्र ग्रामीण जलापूर्ति योजना 483.97 करोड़
  • गोविंदपुर निरसा दक्षिणी प्रक्षेत्र ग्रामीण जलापूर्ति योजना 233.17 करोड़
  • बेरबेन्दिया जलापूर्ति योजना के लिए 0.57 करोड़
  • तोपचांची में 28.7 करोड़
  • गोविंदपुर जगलपुर पंचायत ग्रामीण जलापूर्ति के लिए 3.72 करोड़
  • एगारकुंड प्रखंड में पाइप की आपूर्ति और मरम्मत कार्य में 0.35 करोड़

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परियोजना की गुणवत्ता पर ध्यान नहीं

डीएमएफ फंड से संचालित परियोजना के डीपीआर में गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखा जा रहा है. धनबाद के ग्रामीण जलापूर्ति परियोजना के लिए विशेष कंसलटेंट द्वारा तैयार किये गये कई डीपीआर में यह कहा गया कि दामोदर नदी से पानी की उपलब्धता में कोई समस्या नहीं है, क्योंकि यह बारहमासी नदी है. जबकि एक अन्य कंसलटेंट द्वारा रामगढ़ जिले में पाइप जलापूर्ति परियोजना का डीपीआर बताता है कि दामोदर नदी को जलस्रोत के रूप में नहीं माना जा सकता है और लंबे समय तक पानी की उपलब्धता पर चिंता व्यक्त की गयी. वहीं पेयजल स्वच्छता विभाग के अधिकारियों द्वारा स्थल भ्रमण के दौरान इस बात की भी पुष्टि की गयी कि दामोदर नदी से जल स्रोतों पर बनी योजनाओं को खारिज कर दिया गया. इसके बाद भी अधिकतर जलापूर्ति योजनाएं दामोदर नदी के जल स्रोत पर ही निर्भर हैं.

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