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झारखंड में बढ़ रहे साइबर क्राइम, रोकथाम के लिए सभी जिलों में अब तक नहीं खुला साइबर थाना

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Ranchi: देश में कहीं भी साइबर अपराध हो तो उसमें झारखंड का जुड़ ही जाता है. साइबर अपराध का गढ़ माना जाने वाले झारखंड में अब साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहा है. बढ़ते साइबर अपराध पर रोकथाम लगाने के लिए झारखंड के सभी जिलों में साइबर अपराध से जुड़े मामलों में अनुसंधान के लिए हर जिले में साइबर फॉरेंसिक लैब खोले जाने की बात कही गई थी.

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राज्य पुलिस मुख्यालय को साइबर मामलों के नोडल अधिकारी आईजी नवीन कुमार सिंह ने सभी जिलों में साइबर फॉरेंसिक  लैब खोलने का प्रस्ताव तैयार कर गृह विभाग को भेजा भी था.

राज्य में साइबर अपराध के अनुसंधान के लिए सभी जिलों में साइबर थाना खोलने की घोषणा तत्कालीन डीजीपी डीके पांडेय ने भी की थी. लेकिन हालात ये हैं कि वर्तमान में राज्य के सिर्फ छह जिलों में ही साइबर थाना चल रहे हैं. जबकि 18 जिलों में साइबर थाना नहीं खुल पाया है.

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24 में 22 जिलों में साइबर अपराधी सक्रिय

झारखंड में साइबर अपराध की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं. जामताड़ा साइबर अपराध के लिए पूरे देश में अपनी अलग पहचान तो बना ही चुका है. लेकिन  इस बीच हैरत करने वाली एक और बात सामने आयी है. झारखंड के 24 में 22 जिलों में साइबर अपराधी सक्रिय हो गये हैं. यहां लगातार बढ़ रहे साइबर अपराध पर पुलिस अंकुश लगाने में विफल साबित हो रही है.

 150 से ज्यादा साइबर अपराध के गिरोह हैं सक्रिय

जानकारी के अनुसार, झारखंड में साइबर अपराध के 150 गिरोह सक्रिय हैं. इनमें से कई गिरोहों को झारखंड पुलिस ने चिह्नित भी कर लिया है. हालांकि, झारखंड पुलिस के लिए ये गिरोह बड़ी चुनौती बनी हुई है.

लेकिन पुलिस अब इनका सफाया करने के लिए सक्रिय दिख रही है. कई अपराधियों की संपत्ति जब्त करने की भी तैयारी चल रही है.

साइबर क्राइम के ज्यादातर मामले एटीएम से जुड़े होते हैं. अपराधी बूढ़े-बुजूर्ग या महिलाओं को शिकार बनाते हैं. ये लोग एटीएम के बाहर अकेले में लोगों को शिकार बनाते हैं.

बैंक अधिकारी बनकर फर्जी तरीके से लोगों का बैंक खाता खाली कर देते हैं. साइबर अपराध के गिरोह में 20-30 वर्ष के बीच के अपराधी शामिल होते हैं. जो साइबर अपराध की घटना को अंजाम देते हैं.

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किस तरह के हो रहे हैं साइबर क्राइम

बैंक फ्रॉड : बैंक, इंश्योरेंस कंपनी कर्मचारी बनकर एटीएम ब्लॉक, आधार कार्ड अपडेट करने का झांसा देकर ठगी एसएमएस, कॉल,ईमेल के जरिये की जा रही है. साथ ही लॉटरी लगने का मैसेज देकर ठगी होता है और डेबिट, क्रेडिट कार्ड एटीएम में लगाने, पीओएस मशीन से भुगतान के दौरान कार्ड क्लोनिंग कर ली जाती है.

एटीएम हैक : एटीएम में हैकर डिवाइस लगाकर मशीन को हैक कर लेता है. मशीन स्लीपिंग मोड में करके क्यूआर-कोड हैकर हासिल करके पैसा निकाल लेता है.

सोशल मीडिया से क्राइम : मैसेंजर या एसएमएस के जरिये कोई लिंक हैकर भेजता है. इसपर क्लिक करते ही फेसबुक आईडी, पासवर्ड उसके पास पहुंच जाता है, फिर हैकर इसका इस्तेमाल करता है. फेक आईडी का इस्तेमाल बदनाम करने और भड़काऊ पोस्ट करने में किया जा रहा है.

कई राज्यों की पुलिस कर चुकी है छापामारी

साइबर अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए छत्तीसगढ़, दिल्ली, पश्चिम बंगाल, हरियाणा, उत्तराखंड और महाराष्ट्र की पुलिस की टीम गिरिडीह, देवघर दुमका, जामताड़ा और हजारीबाग सहित कई अन्य जिलों में अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए छापामारी करने आ चुकी है.

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