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झारखंड में शिक्षा का हाल : 58.7% युवा आबादी को नहीं आता है पढ़ना-लिखना

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Ranchi : नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने झारखंड में शिक्षा की स्थिति को बेहतर बताया है. पर आंकड़े इसके उलट हैं. राज्य भर के 14 से 18 आयु वर्ष के 58.7 प्रतिशत युवाओं को लिखना-पढ़ना ही नहीं आता है. यह राष्ट्रीय औसत से काफी अधिक है. इस आयु वर्ग के 21 फीसदी युवा आज भी स्कूल नहीं जाते हैं.

राज्य में देश भर के कुल स्कूलों की संख्या में विद्यालयों की संख्या मात्र 3.3 फीसदी ही है. राज्य में सरकारी स्कूलों की कुल संख्या 2016-17 में 47749 से बढ़ कर 49530 हो गयी है. 115.2 प्रतिशत स्कूल एक लाख बच्चों पर है.

इसमें से 43.7 फीसदी अपर प्राइमरी, 8.2 फीसदी माध्यमिक और 2.6 फीसदी उच्चतर माध्यमिक स्कूल हैं. कुल स्कूलों में से 79 प्रतिशत स्कूलों को स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग की तरफ से संचालित किया जाता है. इनमें दो प्रतिशत सरकारी अनुदान पानेवाले स्कूल हैं, जबकि 3 फीसदी निजी स्कूल हैं, जो सरकार से अनुदान लेते हैं.

14 फीसदी निजी अनरिकगनाइज्ड स्कूल हैं. राज्य में 17 जवाहर नवोदय विद्यालय, 54 केंद्रीय विद्यालय, 140 अनरिकगनाइज्ड मदरसा, 194 एनसीएलपी विद्यालय और 169 जनजातीय कल्याण विभाग के संचालित विद्यालय भी शामिल हैं. 203 कस्तुरबा और 55 आवासीय विद्यालय समर्थ के नाम से संचालित हो रहे हैं. कुल 60 लाख बच्चों को सरकार शिक्षा देने का दावा करती है, जिसमें से 40 लाख माध्यमिक स्कूलों में पढ़नेवाले बच्चे हैं.

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क्या है शिक्षकों की स्थिति

प्रति छात्र शिक्षकों की स्थिति राज्य में कम हो रही है. शिक्षक-छात्र अनुपात भी 2013-14 की तुलना में 2017-18 में पांच फीसदी कम हुआ है. यह लगभग सभी स्तर की स्कूली शिक्षा की औसत गिरावट है.

सिर्फ उच्चतर माध्यमिक शिक्षा की संख्या बढ़ी है. माध्यमिक स्तर में शिक्षक 34.1 फीसदी से घट कर 29.1 तक पहुंच गये हैं. अपर प्राइमरी में यह दर 47.8 फीसदी से घट कर 41.5 फीसदी तक हो गया है. माध्यमिक शिक्षा में सबसे अधिक शिक्षकों की कमी हुई है. माध्यमिक शिक्षा में 74.3 फीसदी का दर घट कर 66.4 फीसदी तक हो गया है.

अभी भी पहली कक्षा में 7834 शिक्षकों की संख्या बतायी जाती है. दूसरी कक्षा के लिए 16528 शिक्षक हैं. तीसरी के बाद शिक्षकों की संख्या में कमी आयी है. यह कमी 4382 तक आकर रुकी हुई है. सरकारी स्कूलों में 91.49 फीसदी माध्यमिक विद्यालय अच्छी स्थिति में हैं, जबकि 95.3 फीसदी उच्च विद्यालयों का भवन और अन्य आधारभूत संरचना ठीक है.

4.33 प्रतिशत माध्यमिक विद्यालयों को मेजर रीपेयर की जरूरत है. जबकि 2.03 फीसदी उच्चतर स्कूल के भवनों की मरम्मत आवश्यक है. सरकारी स्कूलों में 95 फीसदी शौचालय होने का दावा सरकार करती है. जबकि 42.5 फीसदी विद्यालयों में ही बिजली का कनेक्शन है. निजी क्षेत्र के 71.2 स्कूलों में पर्याप्त बिजली है.

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14-18 आयु वर्ग के बच्चों की स्थिति

विषयबालकबालिकाकुल
जो स्कूल नहीं गये21 फीसदी
पढ़ने-लिखने वाले52.8 फीसदी31.7 फीसदी41.37 फीसदी
अनपढ़47.2 फीसदी68.3 फीसदी58.7 फीसदी

 

टीचर स्टूडेंट रेशियो

वित्तीय वर्षप्राइमरीअपर प्राइमरीसेकेंडरीउच्चतर माध्यमिक
2013-1434.1 फीसदी47.8 फीसदी74.3 फीसदी50.8 फीसदी
2014-1533.1 फीसदी47.9 फीसदी81.9 फीसदी79.0 फीसदी
2015-1631.7 फीसदी43.8 फीसदी69.9 फीसदी86.1 फीसदी
2016-1730.1 फीसदी41.2 फीसदी62.5 फीसदी76.7 फीसदी
2017-1829.1 फीसदी41.5 फीसदी66.4 फीसदी87.3 फीसदी

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