
- केंद्रीय कंपनियों की बकाया राशि राज्य को उपलब्ध कराये केंद्र
Ranchi : कोरोना महामारी से लड़ाई के लिए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने केंद्र से हरसंभव मदद किये जाने की मांग की है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ वीडियो कांफ्रेसिंग के दौरान सीएम ने कहा है कि झारखंड आदिवासी एवं दलित बाहुल्य राज्य है.
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लॉकडाउन के कारण राज्य सरकार की आर्थिक स्थिति दबाव में है. उन्होंने कहा कि लॉकडाउन के कारण राज्य सरकार के अपने राजस्व स्रोत बंद हो गये हैं. केंद्र सरकार से भी वांछित मदों में राशि प्राप्त नहीं हो पा रही है. ऐसे में उनकी अपील है कि राज्य द्वारा ऋण प्राप्त करने की जो सीमा GSDP के 3% तक सीमित है उसे बढ़ा कर 5% किया जाये. ऐसा करने से राजस्व में संभावित कमी को कुछ हद तक पूरा किया सकेगा.
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा प्रतिमाह इसके मूलधन की किस्त तथा सूद का भुगतान किया जाता है, उस पर मोरेटोरियम (MORETORIUM) लगाया जाये. इसके साथ ही वर्तमान वित्तीय वर्ष (2020-21) के लिए ऋण पर देय सूद की राशि और ऋण पर लगनेवाले ब्याज को भी माफ किया जाये.
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केंद्रीय कंपनियों ने नहीं किया बकाया राशि का भुगतान, जल्द उपलब्ध कराये केंद्र
सीएम ने कहा है कि राज्य में केंद्र के कई उपक्रम कार्य कर रहे हैं. इसमें सीसीएल, बीसीसीएल, सेल जैसी कंपनियां शामिल हैं. इसके बावजूद इन लोक उपक्रमों द्वारा भी बकाया राशि का भुगतान अबतक राज्य को नहीं किया गया है. उन्होंने पीएम से मांग की कि इन कंपनियों के बकाया का भुगतान जल्द से जल्द कराया जाये.
हेमंत सोरेन ने पीएम से अनुरोध किया कि रिलीफ कोड में प्रति वयस्क 60 रुपये का जीआर ग्रांट का प्रावधान है. रिलीफ कोड के अनुसार आपदा की घड़ी में प्रत्येक वयस्क नागरिक को 60 रुपया प्रतिदिन के हिसाब से जीआर का भुगतान किया जाता है. लेकिन कोविड-19 के संदर्भ में इस राशि के भुगतान की स्वीकृति भारत सरकार से नहीं प्राप्त हुई है. ऐसे में केंद्र से उनकी मांग है कि आपदा की इस घड़ी में जीआर ग्रांट के अनुरूप भुगतान की स्वीकृति प्रदान की जाये.
मनरेगा मजदूरी को 300 रुपये किये जाने की सीएम की मांग
पीएम से हुए संवाद में मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने प्रधानमंत्री के समक्ष मनरेगा मजदूरी की बातों को भी रखा. उन्होंने कहा कि देश में मनरेगा मजदूरी दर झारखंड में सबसे कम है. ऐसे में मनरेगा मजदूरी दर को बढ़ा कर 300 रुपये की जाये. उन्होंने पीएम को बताया कि लॉकडाउन समाप्त होने के पश्चात लगभग 5.30 लाख मजदूरों के वापस झारखंड लौटने की संभावना है. इनके लौटने के बाद राज्य सरकार को उन्हें क्वारंटाइन करने तथा रोजगार उपलब्ध कराने के लिए केंद्र सरकार से मदद की आवश्यकता पड़ेगी. ऐसे में मनरेगा के तहत निर्धारित कार्य दिवस की सीमा को बढ़ाया जाये ताकि वापस झारखंड लोटे मजदूरों को रोजगार उपलब्ध कराया जा सके.
मुख्यमंत्री ने पीएम को बताया कि रोजगार उपलब्ध ना होने की स्थिति में विधि व्यवस्था एवं सामाजिक तनाव की स्थिति राज्य में उत्पन्न हो सकती है. साथ ही मुख्यमंत्री ने पीएम से यह भी मांग किया कि राज्य सरकार में पर्याप्त संख्या में टेंट शौचालय निर्माण के लिए पारा मिलिट्री जैसे संस्थानों से तकनीकी सहयोग को उपलब्ध कराया जाये.



