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Jamshedpur : घाटशिला महाविद्यालय का मुख्य द्वार एवं बाउंड्री वाल इसी माह से बनेगा – रामदास सोरेन

घाटशिला महाविद्यालय में राष्ट्रीय संगोष्ठी संपन्न, मदन मोहन सोरेन ने कहा - संताली साहित्य के विकास में साहित्य अकादमी का अहम योगदान

Ghatshila : घाटशिला महाविद्यालय के संताली विभाग द्वारा मंगलवार को एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया. उक्त संगोष्ठी का उद्घाटन घाटशिला के विधायक रामदास सोरेन ने दीप प्रज्वलित कर किया. मौके पर विधायक रामदास सोरेन ने इस राष्ट्रीय संगोष्ठी की सराहना करते हुए कहा कि संताली भाषा के विकास को लेकर वे संघर्ष करते रहे हैं. साहित्य अकादमी द्वारा जो भी आयोजन कॉलेज में होगा, उसमें वे पूर्ण सहयोग करेंगे. उन्होंने प्राचार्य डॉ. चौधरी के मांग पर कहा कि इसी माह घाटशिला कॉलेज के मुख्य द्वार एवं बाउंड्री वाल का निर्माण कार्य उनके विधायक निधि से प्रारंभ करवा दिया जायेगा. साथ ही कॉलेज के विकास कार्य में जब भी उनके सहयोग की आवश्यकता पड़ेगी, वे सहयोग करेंगे.

इस दौरान संगोष्ठी की अध्यक्षता प्राचार्य डॉ. आरके चौधरी ने की. उन्होंने अपने स्वागत भाषण में अतिथियों का स्वागत करते हुए संगोष्ठी के महत्व को बताया और कहा कि साहित्य अकादमी, नयी दिल्ली भारतीय साहित्य के विकास के लिए सक्रिय कार्य करने वाली राष्ट्रीय संस्था है, जो संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार से संबद्ध है. इस संस्था द्वारा भारतीय संविधान के अष्टम अनुसूची में दर्ज 24 भाषाओं के विकास के लिए कार्य किए जाता हैं. इसमें संताली भाषा के विकास को लेकर वर्ष 2004 से कार्य किया जा रहा है.

संताली साहित्य के विकास में साहित्य अकादमी का अहम योगदान
संगोष्ठी में बतौर मुख्य अतिथि साहित्य अकादमी, नयी दिल्ली में संताली परामर्श मंडल के संयोजक मदन मोहन सोरेन ने कहा कि संताली साहित्य के विकास में साहित्य अकादमी का अहम योगदान है. उन्होंने संताली साहित्य के विकास में साहित्य अकादमी द्वारा किये जा रहे कार्यक्रम को विस्तार से बताते हुए कहा कि अगले माह घाटशिला महाविद्यालय एवं साहित्य अकादमी के संयुक्त तत्वावधान में दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन घाटशिला में करवाया जायेगा. संगोष्ठी में डॉक्टर माही मार्डी द्वारा ओलचिकी लिपि में लिखित उपन्यास मनुष्य जैसा मानुष का लोकार्पण किया गया. कार्यक्रम में आये अतिथियों को प्राचार्य डॉ. आरके चौधरी ने अंग वस्त्र एवं स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया. मौके पर संथाली साहित्यकार भुजंगो टुडू, शोभा नाथ बेसरा, सालखू मुर्मू, जगदीश भगत, डॉ. नरेश कुमार, मानिक मार्डी, बसंती मार्डी, डॉ. एस के सिंह, डॉ. संदीप चंद्रा, प्रो. महेश्वर प्रमाणिक, प्रो. इंदल पासवान, गुनाराम मुर्मू, दीपक तोपो, हीरालाल सीट, मनिंद्र मार्डी के अलावे काफी संख्या में समाजसेवी, शिक्षक, स्टाफ एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित थे.

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