
Akshay Kumar Jha
Ranchi : टेंडर के माध्यम से काम मिलने के बाद काम की गुणवत्ता से समझौता कर मोटी कमाई की बात आम है. लेकिन रांची जिला प्रशासन की तरफ से अब टेंडर अवार्ड करने में भी घोटाला कर मनचाहों को काम देने की कवायद हो रही है. न्यूज विंग को कुछ ऐसे ही सबूत मिले हैं. एक-एक कर न्यूज विंग आपको सारे घोटालों के बारे बतायेगा. फिलहाल शुरुआत रांची जिले के एनआरईपी (नेशनल रूरल इम्प्लाइमेंट प्रोग्राम) विभाग से करते हैं. यहां मनचाहों को टेंडर देने के लिए पीडब्ल्यूडी के कोड को ताक पर रख कर काम किया जा रहा है. सभी वरीय अधिकारी को इसकी जानकारी भी है. लेकिन कोई इस घोटाले पर नकेल कसने को तैयार नहीं.
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जैनें कैसे कायदों के साथ कर रहे खिलवाड़
-किसी भी टेंडर को निकालने की एक प्रक्रिया होती है. टेंडर निकालने से लेकर काम आवंटित करने तक पीडब्ल्यूडी कोड के नियमों का पालन किया जाता है. लेकिन जिला प्रशासन के एनआरईपी में सारे कायदों को ताक पर रख कर टेंडर निकाले जा रहे हैं. पीडब्ल्यूडी कोड के मुताबिक टेंडर निकालने से ठीक सात दिनों पहले स्थानीय अखबारों में विज्ञापन के माध्यम से इसकी सूचना दी जाती है. लेकिन एनआरईपी से निकाले गये टेंडर में ऐसा नहीं होता. अगर सूचना देने में सात दिनों से कम का समय लेना हो तो ऐसा सिर्फ अति आवश्यक कार्यों के लिए किया जाता है. साधारण भवन बनाने के लिए नहीं. लेकिन रांची जिला के बुड़मू में सात स्कूली भवनों को बनाने के लिए ऐसा किया गया. आखिर स्कूल भवन बनाने के लिए सात दिनों पहले सूचना देकर इंतजार क्यों नहीं किया गया. इसे अति अल्पकालीन बता कर एक दिन पहले सूचना देने के पीछे क्या तर्क हो सकता है. क्या वहां पुराने भवन ढह रहे थे? या फिर ऐसा करने के पीछे कुछ और ही सबब है.
-पीडब्ल्यूडी कोड के मुताबिक बीओक्यू (bill of quantitie या फिर परिमाण विपत्र) जिस दिन संवेदकों को देने की घोषणा होती है, उसके ठीक एक दिन के बाद टेंडर डाला जाता है. एनआरइपी की तरफ से बीओक्यू 24 दिसंबर को निकाला गया लेकिन टेंडर डालने की तारीख 27 तारीख तय की गयी. अब विभाग को टेंडर देने या जल्दी काम शुरू करने की जल्दी नहीं थी. सिर्फ बीओक्यू संवेदकों के बीच बेचे जाने की जल्दी थी. ताकि इस काम में कम से कम संवेदक हिस्सा ले सकें और मनचाहों को काम दिया जा सके.
-एनआइईपी की तरफ से इस काम के लिए कई तरह की शर्तें रखी गयीं. इनमें से एक शर्त यह थी कि इस काम में वही हिस्सा ले सकते हैं, जो ग्रामीण विकास विभाग में निबंधित हों. जबकि सारे स्कूल भवन को भवन विभाग की तरफ से बनाया जाता है. यह बात भी समझ से परे है कि आखिर भवन विभाग में निबंधित संवेदकों को टेंडर में भाग लेने क्यों नहीं दिया गया.
पूछे जाने पर ईई ने कहा- टेंडर तय तारीख पर खुला, लेकिन अब भी नहीं खोला गया
इस मामले पर न्यूज विंग ने एनआरईपी के कार्यपालक अभियंता सागर प्रताप से बात की. सागर प्रताप ने कहा कि यह टेंडर अति अल्पकालिक है. टेंडर निकाले जाने में सारे कायदों का पालन हुआ है. उन्होंने बताया कि तय तारीख को ही टेंडर खोला गया है. जबकि पुख्ता सूत्रों का कहना है कि अभी तक टेंडर नहीं खोला गया है. इतनी सारी अनियमितता बरतने के बाद मीडिया को गलत जानकारी देकर गुमराह करने की मंशा अच्छे से समझी जा सकती है.
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