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तो क्या पीएम मोदी ने चीनी घुसपैठ पर “देश से झूठ” बोल कर चीन को फायदा पहुंचाया!

Surjit Singh

20 जूनः चीनी घुसपैठ के मसले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी राजनीतिक दलों के साथ बैठक की थी. इस बैठक में प्रधानमंत्री ने स्पष्ट कहा थाः “न कोई भारतीय सीमा में घुसा, न ही हमारी किसी चौकी पर कब्जा हुआ.” उन्होंने यह भी कहा थाः “कोई भी हमारी एक इंच जमीन पर आंख उठा कर नहीं देख सकता.”

06 अगस्तः रक्षा मंत्रालय ने एक दस्तावेज अपनी वेबसाइट पर डाला. दस्तावेज Defence Ministry Ducument On Chines Transgression का था. इस दस्तावेज में आधिकारिक तौर पर बताया गया कि चीनी सैनिकों ने 17-18 मई को पूर्वी लद्दाख में भारतीय क्षेत्र में अतिक्रमण किया था. हॉट स्प्रिंग के उत्तर में पेट्रोलिंग प्वाइंट 15 के पास स्थित कुगरांग नाला, पेट्रोलिंग प्वाइंट 17ए के निकट गोगरा और पैंगोंग सो के उत्तरी किनारे पर अतिक्रमण किया था.

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रक्षा मंत्रालय के इस आधिकारिक दस्तावेज के सामने आने के बाद विपक्ष हमलावर हुआ. तब मंत्रालय ने तुरंत ही दस्तावेज को वेबसाइट से हटा लिया.

रक्षा मंत्रालय द्वारा डाला गया दस्तावेज.

20 जून को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जो बयान आया था, वह चीन के लिए फायदेमंद साबित हुआ था. उसने दुनिया के सामने यह प्रचारित किया कि उसकी सेना ने किसी तरह का घुसपैठ या अतिक्रमण नहीं किया था.

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तब यह सवाल भी उठा था कि जब चीनी सैनिकों ने अतिक्रमण, घुसपैठ या कब्जा किया ही नहीं था तो हमारे सैनिक क्यों शहीद हुए?

तो अब यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या 20 जून को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने “देश से झूठ” बोला था. पर, क्यों? वह भी ऐसा झूठ जिससे चीन को फायदा हुआ और देश के शहीद सैनिकों की शहादत का अपमान.

नरेंद्र मोदी आज की तारीख में लोकप्रियता के सर्वोच्च शिखर पर हैं. करोड़ों लोग उनकी बात पर आंख बंद कर विश्वास करते हैं. जिस कारण अंधभक्त की उपाधि तक को गर्व से स्वीकार करते हैं. उन्होंने अपनी छवि भी एक मजबूत राष्ट्रनेता के तौर पर बनायी है.

ऐसे में यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या प्रधानमंत्री मोदी ने सिर्फ विपक्ष को नीचा दिखाने के लिए झूठा बयान दिया. जिससे दुश्मन देश को डिप्लोमेटिक फायदा पहुंचा. तो क्या वह देश के करोड़ों लोगों के विश्वास व भरोसे को खुद तोड़ रहे हैं, जो उनकी बातों पर आंख बंद करके विश्वास करते हैं.

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