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Opinion

देशभर में उभरते नये ‘शाहीनबाग’ इमरजेंसी की भयावहता की यादें ताजा कर रहे हैं

Faisal  Anuragशाहीनबाग की आग जैसे-जैसे रोशन हो रही है, देश के शहर दर शहर प्रतिरोध और लोकतंत्र के सेलिब्रेशन के केंद्र बन उभर रहे हैं. औरतें लोकतंत्र की बेमिसाल व्याख्या का केंद्र बन कर एक ऐसे देश में उभरी हैं, जहां सामंती संस्कारों की…

उम्मीदों को हर बार निराशा में बदल देने का कारनामा भारतीय राजनीति का पर्याय बन चुका है

Faisal Anuragउम्मीदों को हर बार निराशा में बदल देने का हुनर भारतीय राजनीति का पर्याय बन गया है. राजनीतिक दल और नेता तो जैसे वोटरों को इगनोर करने में माहिर हो गये हैं. दलबदल की परिघटना इसी का हिस्सा है.झारखंड उन राज्यों की सूची में…

..तो ये सही है, संसद में जो कहा जाना चाहिये था, नहीं कहा गया, लोग इसलिए सड़कों पर हैं

Faisal Anuragसंसद में जो कहा जाना चाहिये था, नहीं कहा गया, इसलिए लोग सड़कों पर हैं. यह दिल्ली के तीस हजारी कोर्ट के एक जज की टिप्प्णी है. आदलत ने भीम सेना के चीफ चंद्रशेखर रावण की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए यह बात कही.साथ ही…

सीएए और एनआरसी के विरोध में देशभर में बन चुके हैं कई नये शाहीनबाग

Faisal  Anuragशाहीनबाग न केवल प्रतिरोध का अपराजेय स्वर बन कर उभरा है बल्कि उसकी प्रेरणा से देशभर में कई शाहीनबाग आवाज बुलंद कर रहे हैं. निर्भीक और साहस का जो तेवर उभरा है, उसकी मिसाल भारत के इतिहास में नहीं के बराबर है.इन प्रतिरोधों…

अर्थव्यवस्था को भंवर से निकालने के लिए आरबीआइ से मदद लेगा केंद्र!

Girish Malviyaमोदी सरकार एक बार फिर चालू वित्तवर्ष में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया से 45 हजार करोड़ की मदद मांग सकती है. जबकि कुछ महीने पहले ही आरबीआइ के इतिहास में पहली बार रिजर्व बैंक पर केंद्र को लाभांश (डिविडेंड) के तौर पर 1.76 लाख करोड़…

लोकतांत्रिक शासन की मुख्य पहचान विरोध में उठे स्वर को सम्मान देना है, न कि उसे कुचलना

Faisal  Anuragलोकतांत्रिक शासन की मुख्य पहचान विरोध में उठे स्वर को सम्मान देने से होती है. लेकिन नागरिकता संशोधन कानून ओर नागरिकता रजिस्टर के सवाल पर जिस तरह सरकार अड़ी हुई है, इससे जाहिर होता है  कि वह सड़कों से उठी आवाज को अनसुनी कर…

चुनाव दर चुनाव मतदाता के जनादेश की धज्जियां उड़ाना लोकतंत्र के लिए खतरा है

Faisal Anuragलोकतंत्र के इतिहास में भारत के राजनीतिक नेताओं और कई बार पार्टियों ने जनादेश और पार्टी के आंतरिक लोकतंत्र को जिस तरह माखौल बनाया है, वैसा दुनिया में कम ही देखने को मिलता है. चुनाव दर चुनाव मतदाता के जनादेश की धज्जियां उड़ती…

बिहार में भाजपा बनायेगी अकेले सरकार या फिर नीतीश का नेतृत्व है स्वीकार?

Murali Manohar Srivastavaबिहार में भाजपा नेताओं द्वारा आए दिन कुछ न कुछ बयान दिया जा रहा है, जिसका जदयू जवाब तो दे रहा है. मगर इस तरह से नीतीश पर उठ रहे सवालों से एनडीए के रिश्तों में खटास बढ़ने की काफी संभावनाएं बढ़ सकती हैं. भाजपा…

SC के फैसले के बाद अब आसान नहीं होगा विरोध-प्रदर्शन व असहमति की आजादी को दबाना

Faisal Anuragएक ऐसे दौर में जब भारत में धारा 144 लगाना सरकारों का फैशन जैसा हो गया है. सुप्रीम कोर्ट ने यह कहकर कि असहमति को दबाने के लिए इस धारा का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है. इसके साथ ही इंटरनेट आर्टिकल 19 के तहत दिए गए अभिव्यक्ति…

हिन्दू-मुस्लिम में उलझाकर बेचते जा रहे देश की संपत्ति, इतिहास से भी नहीं सीखते

Girish Malviyaपता नहीं, हम कब समझेंगे कि मोदी सरकार जनता को हिन्दू-मुस्लिम बाइनरी में उलझाकर देश की संपत्ति को एक-एक करके निजी हाथों के हवाले करती जा रही है. बुधवार को ही रेलवे के निजीकरण का रास्ता साफ कर दिया गया.केंद्र सरकार की एक…