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Opinion

एग्जिट पोल 23 को आने वाले एग्जेक्ट पोल के कितने करीब

Faisal Anuragएग्जिट पोल 23 को आने वाले एग्जेक्ट नतीजों के कितने करीब हैं?  यह प्रश्न इसलिए जरूरी है कि भारत में एग्जिट पोल अपनी साख को चुके हैं और गलत साबित होने के बाद भी न तो खेद व्यक्त करते हैं और न ही प्रक्रियागत भूल को स्वीकार करते…

कौन जीतेगा यह तो तय नहीं, लेकिन चुनाव आयोग तो हार ही गया है

Faisal Anuragयह पहला अवसर ही है जब किसी चुनाव की प्रक्रिया की स्ववंत्रता और निष्पक्षता को लेकर इतने सारे सवाल उठे हैं. चुनाव आयोग पर केवल विपक्षी दलों ने ही सवाल नहीं उठाये हैं.बल्कि देश के कई अन्य तबकों ने पूरी प्रक्रिया को लेकर तीखे…

मोदी राज में बदतर हुई भारतीय अर्थव्यवस्था

Girish Malviyaअर्थव्यवस्था मंदी के दौर में प्रवेश कर चुका है. बाजार से ग्राहक ऐसे गायब है जैसे गधे के सिर से सींग. यकीन न आये तो अपने पहचान के दो चार लोगों के फोन घनघना लीजिए, व्यापारी मायूस है ओर बाजार में उमंग और उत्साह कहीं नजर नहीं आ…

मोदी की राह इस बार आसान नजर नहीं आ रही

Girish Malviya  कल 16 मई थी, पांच साल पहले 16 मई 2014 को ही मोदी सरकार को एक स्पष्ट मेंडेट मिला था, लेकिन इस बार देखें तो मोदी की राह उतनी आसान नजर नहीं आ रही है, पिछली बार मोदी जनता के लिए एक साफ स्लेट के समान थे. लेकिन इस बार उस स्लेट…

एकलव्य की श्रद्धा बनाम द्रोणाचार्य की क्षुद्रता ! (संदर्भ मोदी का देवघर में भाषण)

गत 15 मई को देवघर (झारखंड) में महाभारत के चर्चित पात्र एकलव्य को याद करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मन में जनजातीय समुदायों या आदिवासियों के प्रति श्रद्धा और सम्मान बढ़ गया. उनके मुताबिक, जब वे एक आदिवासी फिल्म की शूटिंग देख रहे थे…

संदेह किया जा रहा है कि चुनाव आयोग के तरीकों से राजनीतिक हिंसा पर अंकुश संभव नहीं

Faisal Anuragदरअसल राजनीतिक हिंसा को लेकर राजनीतिक दलों का दोहरापन बारबार उजागर होता है. बंगाल तो कई दशकों से चुनाव में भी और चुनावों के बाद राजनीतिक हिंसा का शिकार प्रदेश रहा है. सत्तर के दशक के बाद बंगाल के लिए इसमें कुछ भी नया नहीं है.…

क्या नरेन्द्र मोदी देश के डिवाईडर इन चीफ हैं?

Ram Puniyaniटाइम दुनिया की सबसे प्रभावशाली पत्रिकाओं में से एक है. इस पत्रिका ने अपने ताजा अंक (20 मई 2019) के मुखपृष्ठ पर मोदी के पोट्रेट को प्रकाशित करते हुए उन्हें ‘इंडियास डिवाईडर इन चीफ (भारत को बांटनेवालों का मुखिया)’ बताया है.…

इतिहास से टकराते सत्तापक्ष की भविष्य पर खामोशी अंतिम चरण में भी जारी

Faisal Anuragआर्थिक सवालों को लेकर सत्तापक्ष की खामोशी इस चुनाव का मुख्य ट्रेंड है. एक ओर जहां आर्थिक तंत्र का गतिरोध ग्रामीण और अर्द्धशहरी इलाकों में अपना असर दिखाने लगा है, वहीं चुनावी विमर्श में इसे गौण करने में सत्तापक्ष पक्ष की…

क्या आदिवासी और दलितों के हक के लिए राजनीतिक नजरियों को कारपारेट नियंत्रण से मुक्त कर सकेंगे…

Faisal Anuragआदिवासियों और दलितों के लिए अचानक उमड़ते लगाव से चुनाव के समय तो यह पूछा ही जाना चाहिए जिन नीतियों के कारण इन समुदायों को लगातातार मुसीबतों का सामना करना पड़ता है, उसे ले कर राजनीति दलों में कितनी बेचैनी होती है. जाहिर है कि…

वेंटिलेटर पर भारतीय अर्थव्यवस्था

Girish Malviyaअब तो आप समझिए कि हम लोग क्यों कह रहे हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था की हालत वेंटिलेटर पर लिटाने जैसी हो गयी हैं! आज खबर आयी है कि इस साल मार्च में इंडस्ट्रियल ग्रोथ 5.3 फीसदी से घटकर -0.1 फीसदी पर आ गई है.ये आंकड़े 23 महीने…