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‘लाल’ होती झारखंड की सड़कें: रोड एक्सीडेंट में बढ़ोतरी, पिछले एक साल में 3256 लोगों की गई जान

ज्यादात्तर हादसों में हेलमेट नहीं पहनना या कार की सीट बेल्ट नहीं लगाना बना मौत का कारण

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Saurav Singh

Ranchi: कहते हैं ‘सावधानी हटी-दुर्घटना घटी’. कुछ ऐसी ही असावधानी और लापरवाही का नतीजा है, सड़क हादसे. जिसके कारण झारखंड की काली सड़कें, खून से लाल हो रही है. जी हां, आंकड़ें इस बात की तस्दीक कर रहे हैं कि राज्य में सड़क हादसों की घटना में इजाफा हुआ है. और असमय होनेवाले मौत में भी.

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झारखंड में जिस रफ्तार से वाहनों की संख्या में वृद्धि हुई है. उसी रफ्तार से सड़क दुर्घटनाओं में भी बढ़ोतरी हुई है. आंकड़े के मुताबिक, पिछले एक साल में पूरे झारखंड में 5198 सड़क दुर्घटनाएं हुई, जिसमें 3256 लोगों की जान चली गई. पुलिस के पास सड़क दुर्घटनाओं में घायल होने वाले सभी मामले नहीं आते, इसलिए घायलों की संख्या में अधिक हो सकती है.

मरने वालों में ज्यादातर 20 से 40 वर्ष के उम्र वाले

आंकड़े के अनुसार, झारखंड में सड़क दुर्घटनाओं में मरने वाले ज्यादातर लोग 20 से 40 वर्ष के बीच की उम्र के हैं. आंकड़ें ये भी बताते है कि जरा सी लापरवाही और ट्रैफिक नियम का पालन नहीं करना, किस तरह से प्राणघातक साबित होता है. क्योंकि दुपहिया वाहन से हुए हादसे में मरने वाले लोगों में से अधिकांश के सिर पर हेलमेट नहीं थे. वही जिन दुर्घटनाओं में चारपहिया वाहन क्षत्रिग्रस्त हुए, उनमें अधिकतर लोगों ने सीट बेल्ट नहीं लगा रखी थी.

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आंकड़े के अनुसार, पिछले एक साल में सड़क हादसे में 3256 लोगों की मौत हुई है. इनमें से 443 लोगों की मौत सिर्फ इसलिए हुई क्योंकि उनलोगों ने हेलमेट नहीं पहना था. वहीं, चार पहिया के 618 हादसे हुए जिनमें 383 लोगों की जान गई. इनमें से 141 लोगों ने सीट बेल्ट नहीं बांधा था.

राजधानी रांची में हर महीने 40 सड़क दुर्घटना

राजधानी रांची में हर महीने लगभग 40 से अधिक सड़क दुर्घटनाएं होती है. जिसमें लगभग हर महीने 30 लोगों की मौत हो जा रही. जनवरी से लेकर सितंबर 2018 के बीच रांची में 362 सड़क दुर्घटनाएं हुई. जिसमें 247 लोगों की जान चली गई. रांची में जनवरी महीने में सबसे अधिक 60 दुर्घटनाएं हुई. जबकि सबसे अधिक 41 मौत जून महीने में हुई है. सड़क दुर्घटना में लगातार वृद्धि ही हो रही है. लेकिन इसे कम करने के नाम पर कोई उपाय नहीं हो रहे है.

सड़क दुर्घटना के मामले में देश के टॉप 5 राज्य

सड़क दुर्घटना में मौत के मामलों में पूरे देश में इन पांच राज्यों को टॉप पर रखा गया है. यूपी में जहां 38783 हादसे हुए और उसमें 20124 लोगों की मौत हुई, वहीं मध्यप्रदेश में 53399 हादसे हुए जिनमें 10177 लोगों की मौत हुई. बिहार में 8855 हादसों ने 5554 लोगों को शिकार बनाया और झारखंड में कुल 5198 हादसों में 3256 लोगों की मौत हुई. इनके अलावा ओडि़शा में 10855 हादसे हुए, जिसमें 4790 लोगों की मौत हुई.

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स्पीड गवर्नर के नाम पर लापरवाही

झारखंड में स्पीड गवर्नर के नाम पर लापरवाही बरती जा रही है. यहां बिना अप्रूव वाली कंपनियों के स्पीड गवर्नर वाहनों में लगाए जा रहे हैं. साथ ही इन स्पीड गवर्नर के टेस्टिंग की भी कोई व्यवस्था नहीं है. सरकार ने वाहनों के लिए स्पीड गवर्नर को अनिवार्य कर दिया है, लेकिन इसे चेक करने के लिए किसी तरह का इंतजाम नहीं किया गया है. वाहनों में लगे स्पीड गवर्नर के क्वालिटी की ना तो जांच हो रही है और ना ही उसपर मुहर लगा रही है. ऐसे में यहां वाहनों में स्पीड गवर्नर लगाने के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति ही हो रही है.

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कार एक्सीडेंट होते हैं ज्यादा

झारखंड में कार एक्सीडेंट का आंकड़ा भी तेजी से बढ़ा है. यहां प्राइवेट कारों की वजह से जहां 12 प्रतिशत एक्सीडेंट होते हैं, वहीं कमर्शियल कारों से होने वाले रोड एक्सीडेंट का आंकड़ा 45 परसेंट है. इसकी मुख्य वजह है इन कारों को ड्राइवर का अनट्रेंड व कम पढ़ा-लिखा होना.

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