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मुआवजे के 20 करोड़ पर भू-अर्जन अधिकारी की नजर ! रातों-रात एसबीआई से एक्सिस बैंक में रकम ट्रांसफर

अनुमंडल पदाधिकारी सह तत्कालीन प्रभारी जिला भू-अर्जन पदाधिकारी जय प्रकाश झा ने सरकार के आदेशों को धत्ता बता कर मुआवजा की 20 करोड़ रूपये भारतीय स्टेट बैंक से एक्सिस बैंक में हस्तांतरित की

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Latehar: भूमि अधिग्रहण की राशि को एक बार फिर से भू अर्जन अधिकारियों और कर्मचारियों के द्वारा ही हड़पने की कोशिश की गयी. लातेहार के टोरी-महुआ मिलान नयी वीजी रेल लाइन निर्माण के लिए अधिग्रहित भूमि की राशि फर्जी दस्तावेजों के सहारे हड़पने की कोशिश की गयी. भूमि माफिया के साथ मिलकर राजस्व अधिकारियों ने सरकारी भूमि की दस्तावेजों के फर्जी हुकूमनामे को जायज बनाकर, मुआवजे की राशि हड़पने की योजना बनाई. इसके तहत ही भू-अर्जन पदाधिकारी जय प्रकाश झा ने मुआवजे के 20 करोड़ रूपये रातों-रात भारतीय स्टेट बैंक से एक्सिस बैंक में हस्तांतरित करा दिये.

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मामले की जानकारी तब हुई जब जाली दस्तावेजों के सहारे भूमि अधिग्रहण की राशि प्राप्त करने वाले कई फर्जी रैयतों का खाता भारतीय स्टेट बैंक ने खोलने से इनकार कर दिया. जिसके बाद प्राइवेट बैंकों से सम्पर्क किया गया तब तक इसकी भनक जिला प्रशासन को लग गयी और उपायुक्त ने प्रभारी भू-अर्जन पदाधिकारी जय प्रकाश झा को उक्त पद से हटा कर कार्यपालक दंडाधिकारी जोसेफ कंडुलना की पोस्टिंग गत 11 सितंबर को कर दी.

रातों-रात नया खाता खुलवा कर 20 करोड़ की राशि हुई ट्रांसफर

अपनी पदस्थापना रद्द होते देख, झा ने आनन-फानन में उसी तिथि को भारतीय स्टेट बैंक से भू-अर्जन की आवंटित जमा राशि 20 करोड़ रूपये को नीजी बैंक में हस्तांतरित करने का आदेश जारी कर दिया. रातों-रात बैंक में नया खाता खुलवा कर उक्त 20 करोड़ की राशि ट्रांसफर की गई. सबसे दिलचस्प तो यह है कि तब तक जय प्रकाश झा ने अपने पद का प्रभार नव पदस्थापित पदाधिकारी को नहीं दिया, जब तक की राशि बैंक में डिपोजिट नहीं हो गयी.

उपायुक्तों को राष्ट्रीयकृत बैंकों में ही राशि रखने का सख्त आदेश

राज्य में सरकारी हित हेतु अधिग्रहित भूमि की मुआवजा की राशि राष्ट्रीयकृत बैंकों में रखने का आदेश है. मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में गत 18.10.2017 राजस्व की बैठक में उक्त निर्णय लिया गया है. इसके उपरांत 18.11.2017 को राजस्व परिषद की बैठक में भी उक्त राशि को राष्ट्रीयकृत या विशेष परिस्थिति में सहकारी बैंकों में जमा रखने का निर्णय लिया गया. उक्त निर्णयों के आलाकों के राज्य के मुख्य सचिव ने पत्रांक 439 दिनांक 17.04.2018 के माध्यम से राजस्व निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग को उपरोक्त निर्देश जारी किया. उक्त निर्देश के आलोक में राज्य के राजस्व निबंधन एवं भूमि सुधार सचिव कमल किशोर सोन ने अपने पत्रांक 251 दिनांक 03.05.2018 को राज्य के सभी उपायुक्तों को राष्ट्रीयकृत बैंकों में ही राशि संधारित करने का सख्त आदेश दिये थे.

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शामिल पदाधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जायेगी : सोन

उपरोक्त मामलों में पूछे जाने पर राज्य के राजस्व निबंधन एवं भूमि सुधार सचिव कमल किशोर सोन ने कहा कि यह सरकार के आदेशों की घोर अवहेलना है. जो घोर वित्तीय अनियमितता की श्रेणी में आता है. कमल किशोर सोन ने आगे कहा कि मामले की जांच करा कर इसमें शामिल पदाधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जायेगी.

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अवलोकन करने के बाद ही कुछ बता पायेगें.: डीसी

इधर मामले में सवाल पूछे जाने पर उपायुक्त राजीव कुमार का कहना है कि उन्हें इस विषय की जानकारी नहीं है. अभिलेखों का अवलोकन करने के बाद ही कुछ बता पायेगें.

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अनुमोदन अपर समार्हत्ता एवं उपायुक्त से ली: जय प्रकाश झा

इस संबंध में पूछे जाने पर सदर अनुमंडल पदाधिकारी सह तत्कालीन जिला भू-अर्जन पदाधिकारी (डीएलएओ) जय प्रकाश झा का कहना है कि सरकारी बैंक से नीजी बैंक में भू-अर्जन की राशि हस्तांतरित करने के आदेश का अनुमोदन अपर समार्हत्ता एवं उपायुक्त से लिए गये थे.

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