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झमाडा कर्मियों को बिना केस किये नहीं मिलता सेवानिवृत्ति का लाभ

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Dhanbad: धनबाद झमाडा (खनिज क्षेत्र विकास प्राधिकरण) के कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति लाभ बिना कोर्ट का दरवाजा खटखटाये नहीं मिलता है. झमाडा में पत्र और आवेदन दे-देकर सेवानिवृत्त कर्मी थक जाते हैं, फिर भी उनकी गुहार सुननेवाला यहां कोई नहीं है. झमाडा को वर्षों अपनी सेवा देने के बावजूद कर्मचारी जब अपने कार्य से सेवानिवृत्त हो जाते हैं, तब उन्हें भविष्य निधि की राशि के साथ-साथ सेवानिवृत्ति लाभ प्राप्त करने के लिए कार्यालयों और अधिकारियों के आगे चक्कर काटने को मजबूर होना पड़ता है.

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जबकि यह उनकी वर्षो की गाढ़ी कमाई का ही हक है. ऐसे में उनके परिवार के सामने रोजी-रोटी के अलावा बच्चों की स्कूल फीस चुकाने की समस्या उठ खड़ी होती है. कई कर्मियों की बेटी की शादी भी पैसे के अभाव में टूट जाती है. ऐसे में अपना हक लेने के लिए उन्हें मजबूरन झमाडा के खिलाफ केस करना पड़ता है.

केस करने के बावजूद भी 50-50 हजार की राशि कई किस्तों में मिलती है

झमाडा के सेवानिवृत्त कर्मचारी सुरेश प्रसाद गुप्ता ने बताया कि उनको अब तक सेवानिवृत्ति का लाभ नहीं मिला है. कई बार प्रबंध निदेशक के आदेश के बावजूद भी पूर्व लेखा पदाधिकारी शिवकांत सिंह ने फंड नहीं है, कहकर भुगतान नहीं किया. मजबूरन जब उन्होंने केस किया तब उनकी सेवानिवृत्ति राशि लगभग 20 लाख रुपये 50-50 हजार के कई किस्तों में दी जा रही है. ऐसा ही झमाडा के कई कर्मचारियों के साथ हो चुका है.

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1200 कर्मचारियों को भी नहीं मिला है 35 माह से वेतन

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झमाडा कर्मचारियों की कई हड़ताल और आवेदन के बाद भी वर्तमान में कार्यरत लगभग 1200 कर्मचारियों को वेतन 35 महीने से नहीं मिला है. जिससे कर्मचारियों के समक्ष भूखमरी की समस्या हो गई है. कर्मचारियों के वेतन भुगतान की मांग पर प्रबंध निदेशक फंड नहीं होने का रोना रोते हैं. गौरतलब है कि जुलाई में कर्मचारियों की हड़ताल के बाद राज्य सरकार ने पांच महीने का भुगतान एकमुश्त करने की बात कही थी. लेकिन सिर्फ 4 महीने का ही भुगतान किया गया. जबकि बाकी की राशि कुछ दिनों में देने की बात कही गयी थी, जिसका भुगतान अब तक नहीं हुआ है.

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झमाडा के 300 करोड़ राज्य सरकार के पास फिर भी नहीं हुआ कोई कार्य

राज्य सरकार के पास झमाडा के 300 करोड़ रुपये जमा होने के बावजूद न ही कहीं कोई पाइप मरम्मत करायी गयी और न ही कर्मियों का भुगतान हुआ. इसके अलावा झमाडा को विकास कार्य के लिए भी कोई फंड मुहैया नहीं कराया गया. उक्त जानकारी झमाडा में कार्यरत गणेश उपाध्याय ने दी. बताया कि झमाडा की स्थिति खराब होने का मुख्य कारण राज्य सरकार का बीसीसीएल से अब खुद रॉयल्टी लेना है. जबकि बीसीसीएल पहले सारी रॉयल्टी झमाडा को देती थी. इससे यहां फंड में पर्याप्त राशि भी रहती थी और कर्मियों का नियमित भुगतान भी होता था.

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