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6 मई को दो पूर्व सीएम और एक केंद्रीय मंत्री के अलावा कई दिग्गजों के बीच है कड़ा मुकाबला

Akshay Kumar Jha 

Ranchi: 6 मई को देश के 5वें (झारखंड के दूसरे) चरण का मतदान होना है. झारखंड का दूसरा चरण पहले चरण से ज्यादा रोमांचक होनेवाला है.  राजधानी रांची के अलावा हजारीबाग, खूंटी और कोडरमा में छह मई को मतदान होना है. दूसरा चरण इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि बीजेपी के अलावा वर्तमान मुख्यमंत्री रघुवर दास और पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा की साख दांव पर लगी है. वहीं हाई प्रोफाइल कैंडीडेट केंद्रीय मंत्री और बीजेपी के बागी दिग्गज नेता यशवंत सिन्हा के बेटे जयंत सिन्हा की भी साख दांव पर है. कोडरमा में बीजेपी की तरफ से राजद का साथ छोड़ कर आयीं अन्नपूर्णा देवी हैं, तो वहीं उनके सामने जेवीएम के सुप्रीमो और महागठबंधन के धाकड़ नेता बाबूलाल मरांडी चुनावी समर में आमने-सामने हैं. कोडरमा से राजकुमार यादव भी समीकरण बदलने का माद्दा रखते हैं. ऐसे में देखना होगा कि जनता किसके साथ है.

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जानते हैं, किस सीट पर है क्या समीकरण

रांची

उम्मीदवार तो बहाना है, मोदी को लाना है. शायद इसी थीम पर फिलहाल रांची की जनता फोकस कर रही है. जब रांची सीट से उम्मीदवार की घोषणा हुई थी, तो साफ तौर से कहा जा रहा था कि महागठबंधन के उम्मीदवार सुबोधकांत सहाय को वॉकओवर मिल गया है. लेकिन पीएम मोदी के रोड शो और बीजेपी के धुआंधार प्रचार के बाद ऐसी बातों पर विराम सा लगता दिख रहा है. अंदाजा लगाया जा रहा है कि दोनों उम्मीदवार एक-दूसरे को बेजोड़ टक्कर देंगे. वहीं रामटहल चौधरी को बेटिकट किये जाने के बाद बागी तेवर के साथ उन्होंने पर्चा भरा. जातीय समीकरण की वजह से जीत की लालसा लेकर वो आगे बढ़ रहे थे. लेकिन बीजेपी और कांग्रेस के चुनावी प्रचार के आगे मानो उन पर विराम सा लग गया है. सीधी टक्कर अब पीएम मोदी या कहें संजय सेठ और सुबोधकांत सहाय के बीच है. यहां यह भी जानना जरूरी है कि रांची लोकसभा सीट पर झारखंड के सीएम रघुवर दास की भी साख दांव पर लगी है, क्योंकि रामटहल का टिकट कटने के बाद संजय सेठ को टिकट दिलवाने में सीएम रघुवर दास का पूरा सहयोग था.

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हजारीबाग

झारखंड की सबसे हाइप्रोफाइल सीटों में हजारीबाग की सीट की गिनती आती है. दूसरी बार बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ रहे जयंत सिन्हा काफी दमदार उम्मीदवार माने जा रहे हैं. केंद्र के साथ-साथ हजारीबाग सीट में इनकी सक्रियता काफी रही है. वहीं इनके सामने कांग्रेस से गोपाल साहू खड़े हैं. चुनाव प्रचार और बाकी समीकरणों में बीजेपी फिलवक्त आगे निकलती दिख रही है. लेकिन ऐन वक्त पर क्या होगा. कहना काफी मुश्किल है. चुनाव से पहले गोपाल साहू पर गैरकानूनी तरीके से 22 लाख रुपये रखने का आरोप लगा है. लेकिन इससे कांग्रेस को इलाके में कतई कमजोर नहीं आंका जा सकता.

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खूंटी

खूंटी सीट बीजेपी से ज्यादा पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा के लिए चैलेंज है. गौर करनेवाली बात यह है कि यहां बीजेपी के उम्मीदवार अर्जुन मुंडा के सामने बीजेपी से खूंटी विधायक और झारखंड सरकार के मंत्री नीलकंठ सिंह मुंडा के भाई कालीचरण मुंडा मैदान में हैं. हालांकि मौजूदा सांसद कड़िया मुंडा का आशीर्वाद अर्जुन मुंडा को मिला है. फिर भी इस लोकसभा क्षेत्र में भीतरघात की बात हो रही है. साथ ही पत्थलगढ़ी को लेकर सरकार की तरफ से की गयी कार्यवाही को लेकर समाज के एक तबके में आक्रोश भी है. इन सबके बीच शहरी इलाकों में बीजेपी दिखती है, तो ग्रामीण इलाके का वोट किसके खाते में जायेगा, अंदाज लगाना मुश्किल है.

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कोडरमा

यह सीट एक ऐसी सीट है, जहां मौजूदा सांसद का टिकट काट कर राजद की रीढ़ मानी जानेवाली अन्नपूर्णा देवी को बीजेपी में शामिल करा कर टिकट दिया गया है. ऐसे में जाहिर तौर पर यह सीट बीजेपी के लिए जीतना काफी अहम है. लेकिन जीत इतनी आसान भी नहीं है. क्योंकि तीन बार कोडरमा से सांसद रह चुके जेवीएम के प्रमुख बाबूलाल मरांडी भी मैदान में हैं. हालांकि पिछले लोकसभा चुनाव में इन्हें हार मिली थी. लेकिन कोडरमा से जीतने की इनकी पुरानी आदत है. वहीं तीसरी लड़ाई राजकुमार यादव के साथ है. पिछले दो बार से राजकुमार यादव दूसरे नंबर आ रहे हैं. ऐसे में राजनीति का यह ऊंट कोडरमा में किस करवट बैठेगा कहना मुश्किल है.

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