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ILFS हुई एनपीए, झारखंड की छह योजनाओं पर पड़ेगा प्रभाव

Ranchi : इंफ्रास्ट्रक्चर लीजिंग एंड फाइनेंशियल कंपनी (ILFS) को नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (एनसीलैट) ने नॉन परफॉर्मिंग एसेट्स (एनपीए) घोषित कर दिया है. लॉ बोर्ड के अध्यक्ष जस्टिस एसजे मुखोपाध्याय ने कंपनी को एनपीए घोषित करते हुए बैंकों से आईएलएफएस को एनपीए के दर्जे में शामिल करने का निर्देश दिया है.

जस्टिस मुखोपाध्याय ने अपने फैसले में कहा है कि आईएलएफएस और इसकी सहयोगी कंपनियों को भुगतान नहीं करने के मामले में डीफाल्टर पाया गया है. अदालत ने सभी देनदारों से कहा है कि वे अपना समर्थन आईएलएफएस से तब तक नहीं खींचें, जब तक सामूहिक प्रस्ताव पारित नहीं हो जाता है.

आईएलएफएस ग्रुप की कंपनी का देश भर में 90 हजार करोड़ रुपये का बकाया हो गया है. भारतीय रिजर्व बैंक ने एनसीलैट से यह आग्रह किया था कि नॉन पेमेंट को लेकर आईएलएफएश को एनपीए घोषित किया जाये. आईएलएफएस और इसकी सहयोगी कंपनियों को पुनर्भुगतान करने के लिए भी बैंकिंग नियमों का पालन करने को कहा गया है. रिजर्व बैंक ने आईएलएफएस को एनपीए की रेड श्रेणी में घोषित करने का आग्रह किया था.

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ILFS ने झारखंड में बनी जेवी कंपनी को एसपीवी बनाने की अपील की थी

आईएलएफएस ने झारखंड रोड प्रोजेक्ट्स इंप्लीमेंटेशन कंपनी को अपने निवेशकों का भुगतान नहीं कर पाने की स्थिति में स्पेशल परपज व्हीकल (एसपीवी) बनाने का अनुरोध किया था. कंपनी की तरफ से 76 करोड़ रुपये का भुगतान निवेशकों को नहीं किया गया.

आईएलएफएस की एसपीवी की तरफ से भुगतान नहीं किये जाने से जारी किये गये बॉन्ड पर भी असर पड़ रहा है. झारखंड की सड़क परियोजनाओं पर अब इसका प्रत्यक्ष असर दिख रहा है. एनसीलैट में एसपीवी को लेकर निवेशकों की तरफ से शिकायत की गयी थी.

इसमें कहा गया है कि एसपीवी कंपनी की पैरेंट कंपनी को देनदारियों और उत्तरदायित्व का हिसाब-किताब रखना चाहिए. एसपीवी कंपनी को होल्डिंग कंपनी से अलग रखा जाना चाहिए. झारखंड रोड प्रोजेक्ट्स की तरफ से राज्य के पथों का निर्माण, रख-रखाव किया जाता रहा है. निवेशकों को पैसे नहीं दिये जाने से क्रेडिट रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने भी झारखंड रोड प्रोजेक्ट्स की रेटिंग को घटा दिया गया था.

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345 करोड़ का लिक्विड फंड होने का दावा करती रही है कंपनी

आईएलएफएस की तरफ से झारखंड रोड प्रोजेक्ट्स इंप्लीमेंटेशन कंपनी के लिए 345 करोड़ का लिक्विड (तरल) फंड होने का दावा करती रही है. यह कंपनी के पुर्नभुगतान (रीपेमेंट) की क्षमता से 4.50 गुना अधिक है.

रेटिंग एजेंसी क्रिसिल की तरफ से यह बात कही जा रही है कि झारखंड रोड प्रोजेक्ट्स का 500 करोड़ रुपये म्यूचुअल फंड में भी लगाया गया है. यह पैसा छह योजनाओं में लगाया गया है. यह कंपनी की कुल परिसंपत्ति की तुलना में अधिक है.

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केंद्र ने आईएलएफएस के निदेशक मंडल को किया था भंग

केंद्र सरकार ने अक्तूबर 2018 में निदेशक मंडल को भंग कर दिया था. केंद्र सरकार ने कंपनी प्रबंधन के अधिकतर कामों को अपने अधीन कर लिया था. अक्टूबर 2018 तक आईएलएफएस 91 हजार करोड़ की डिफॉल्टर कंपनी बन चुकी थी.

ऐसा कंपनी की तरफ से कर्ज नहीं चुकाने और वित्तीय संस्थानों से लिये गये पैसे की पुनर्वापसी को लेकर हुआ था. आईएलएफएस से 340 सहयोगी कंपनी जुड़ी हुई हैं, जो कंपनी की इकाइयां और एसपीवी की तरह काम कर रही हैं. कंपनी के एसपीवी भी 60 हजार करोड़ रुपये का भुगतान नहीं कर पा रहे हैं.

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