
Ranchi : स्टेट डेडिकेटेड कोविड अस्पताल रिम्स में बेड लगभग फुल हो चुके हैं. सामान्य लक्षणवाले मरीजों की क्षमता से अधिक मरीज रिम्स कोविड सेंटर में भर्ती हैं. गंभीर बीमारीवाले कोरोना संक्रमित मरीजों के लिए भी अब बेडों की संख्या कम पड़ने लगी है. बता दें कि गंभीर बीमारी के मरीजों के लिए यह संक्रमण जानलेवा साबित हो रहा है.
रिम्स के कोविड सेंटर में राज्य के विभिन्न जिलों के गंभीर बीमारी के पीड़ित संक्रमितों को ईलाज के लिए भेजा जा रहा है. ऐसे में अगर चार पांच नये गंभीर बीमारी से संक्रमित मरीज सामने आ जाते हैं तो उनके ईलाज में दिक्कत हो जायेगी. रिम्स में वेंटिलेटर को छोड़ दिया जाये तो 100 के करीब ही बेड हैं. जिसमें 15 आइसीयू के एक्टिव बेड हैं. जिसमें भी मरीज फुल हैं. किडनी से संबंधित केस में एक मरीज दो बेड को ऑक्यूपाइ कर लेते हैं. क्योंकि पांच बेड पर डायलिसिस होती है. जिसको काउंट नहीं ही किया जा सकता. गंभीर बीमारी से पीड़ित लोग अधिक संख्या में संक्रमित हो रहे हैं. ऐसे में रिम्स में उनके ईलाज में मुश्किल होगी. 24 जिलों से मरीजों के गंभीर होने की स्थिति में सभी अस्पताल रिम्स ही रेफर कर रहे हैं.
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राज्य में 33 की कोरोना से मौत, अधिकतर गंभीर बीमारी से थे पीड़ित
राज्य में अबतक कोरोना से 33 लोगों की जान जा चुकी है. अधिकतर मामलों में ऐसे लोगों की जान गयी है जो पहले से गंभीर बिमारी से पीड़ित थे. समान्य मरीजों के लिए बीमारी घातक हो न हो पर गंभीर बीमारी के रोगियों के लिए कोरोना खतरनाक है. किडनी और हार्ट की बीमारी से पीड़ित मरीजों के लिए यह ज्यादा खतरनाक है. हालांकि रिम्स में सोमवार की रात को 10 मरीजों को छुट्टी दी जा सकती है. यह राहत भरी खबर होगी.
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रांची में सिर्फ पारस अस्पताल में ही बेड खाली
रांची में कुल एक्टिव संक्रमितों की संख्या 188 (खबर लिखे जाने तक) है. रिम्स में कुल 82 मरीज भर्ती हैं. सीसीएम गांधीनगर में 60 बेड में 59 बेड भरे हुए हैं. पारस अस्पताल में 55 बेड हैं और आधे बेड खाली हैं. इसके अलावा कुछ मरीज प्राइवेट अस्पताल में भी ईलाज करा रहे हैं. मतलब साफ है कि अगर संक्रमण की रफ्तार इसी तरह बढ़ती रही तो बेड को लेकर मुश्किल हो जायेगी.
रिम्स अपने सेंटर में एसिंप्टोमेटिक मरीजों को नहीं लेगा भर्ती
कोरोना के नोडल पदाधिकारी डॉ ब्रजेश मिश्रा ने बताया कि अब रिम्स में कोरोना के एसिंप्टोमेटिक मरीजों को रिम्स में भर्ती नहीं किया जायेगा. ऐसे मरीजों को दूसरे कोविड सेंटर में भर्ती किया जायेगा. उन्होंने कहा कि ऐसे मरीजों को भर्ती कर रिम्स के बेडों को ऑक्यूपाई नहीं किया जा सकता. एसिंप्टोमेटिक और कम उम्र के मरीजों में इम्यूनिटी अधिक होती है. उन्हें रिम्स की आवश्यकता नहीं पड़ेगी.
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