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पत्रकारों की पिटाईः हेलमेट पहन कर पत्रकार पहुंचे थाना, प्रशासन के खिलाफ एफआइआर के लिए दिया आवेदन

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Ranchi: ऐसा शायद पहली बार हो रहा होगा, जब पत्रकार अपनी पिटाई के विरोध में प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई के लिए कानूनी लड़ाई लड़ने के मूड में हों. झारखंड स्थापना दिवस के कार्यक्रम के दौरान पारा शिक्षकों के हंगामे का कवरेज करनेवाले कुछ पत्रकारों को पुलिस के जवानों ने बुरी तरह पीटा था. जबकि पत्रकार के गले में प्रशासन का मीडिया पास और कैमरा मौजूद था. फिर भी टारगेट कर पुलिसवालों ने पत्रकारों की पिटाई की. गंदी-गंदी गाली देने से भी नहीं चूके. इस मामले पर प्रशासन की तरफ से किसी तरह का कोई संज्ञान फिलवक्त नहीं लिया गया है. रांची के प्रेस क्लब के सदस्यों ने मामले को गंभीरता से लेते हुए शुक्रवार को एक बैठक बुलायी. अध्यक्ष राजेश सिंह की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में यह निर्णय लिया गया कि मामले में कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए. सभी पत्रकारों ने इस बात का समर्थन किया.

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200 की संख्या में पत्रकार पहुंचे लालपुर थाना, हेलमेट लगा करा किया विरोध

बैठक में कानूनी लड़ाई के निर्णय के बाद करीब 200 की संख्या में पत्रकार नारा लगाते हुए लालपुर थाना पहुंचे. सभी विरोध स्वरूप हेलमेट पहने हुए थे. उनका कहना था कि पुलिस-प्रशासन का कोई भरोसा नहीं है, इसलिए हमलोग हेलमेट पहने हुए हैं. ताकि अगर पुलिस डंडे बरसाने लगी तो हम अपना बचाव कर सकें. कुछ देर तक थाना में नारेबाजी करने के बाद वहीं बैठ कर आवेदन तैयार किया. आवेदन में कहा गया कि 15 नवंबर को मोरहाबादी मैदान में झारखंड स्थापना दिवस समारोह के दौरान ड्यूटी पर तैनात पुलिस ने हमें बेरहमी से पीटा. हम सभी लोग बुरी तरह से घायल हुए. समारोह के कवरेज के लिए हम सभी बाकायदा प्रशासन के आमंत्रण पत्र पर मोरहाबादी मैदान पहुंचे थे. इस दौरान पारा शिक्षकों के द्वारा प्रदर्शन की तस्वीरें जब हम लोग उतारने लगे तो हम लोगों को टारगेट कर लाठियों से पीटा जाने लगा. हम लोगों के नाजुक अंगों पर प्रहार किया गया. इसके अलावा ग्रामीण एसपी अजीत पीटर डुंगडुंग, सिटी एसपी अमन कुमार, एसडीओ गरिमा सिंह और ट्रैफिक एसपी संजय रंजन सिंह की मौजूदगी में सभी मीडिया कर्मियों का कैमरा छीन कर फोटो डिलीट कराया गया. कई मीडियाकर्मियों के कैमरे भी क्षतिग्रस्त हुए हैं. खबर लिख रहे पत्रकारों को भी पहचान कर पीटा गया. अतः अनुरोध है की घटना का संज्ञान लेते हुए इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों और पुलिस कर्मियों के विरुद्ध उचित कानूनी कार्रवाई की जाए. इस संबंध में प्राथमिकी दर्ज की जाए.

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डीएसपी ने कहा, अध्ययन करेंगे और कुर्सी छोड़ कर उठे  (देखें वीडियो)

आवेदन दिये जाने के बाद पत्रकारों के सवालों से सिटी डीएसपी प्राण रंजन बचते दिखे. कई बार पूछे जाने के बाद भी सिटी डीएसपी ने कैमरे के सामने यह नहीं कहा कि किस मामले को लेकर पत्रकार एफआइआर दर्ज करने की मांग कर रहे हैं. वहीं अविलंब एफआइआर दर्ज करने की बात पर उन्होंने कहा कि एफआइआर दर्ज करने की एक प्रक्रिया होती है. आपके आवेदन को भी उसी प्रक्रिया से गुजरना पड़ेगा. एफआइआर जब दर्ज होगा तो आपको इस बात की सूचना दे दी जाएगी.

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