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स्थापना दिवस : रैफ वालों ने मीडियाकर्मियों को टारगेट कर पीटा और कैमरा छीना, SSP ने कहा- ऐसा करना गलत, पत्रकारों ने कहा- कार्रवाई हो

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Ranchi : पारा शिक्षकों की झारखंड स्थापना दिवस समारोह का विरोध करनेवाली घोषणा के बाद रांची का मीडिया जगत ने जनता तक खबर का हर पहलू पहुंचाने के लिए अपने तरीके से प्लान किया. हर मीडिया हाउस के पत्रकार सुबह होते ही मोरहाबादी मैदान में तैनात हो गये. हर हाउस से दो से तीन टीम बनायी गयी थी. कोई अंदर का कवरेज कर रहा था, तो बाकी बाहर हो रहे हंगामे के कवरेज में लगे हुए थे. इस बीच पुलिस ने कई बार पारा शिक्षकों को खदेड़ा, लाठीचार्ज किया और कैंप जेल भेजा. लेकिन, गौर करनेवाली बात यह है कि पारा शिक्षकों को रोकने के लिए लगायी गयी रैफ की टीम बार-बार मीडियाकर्मियों को टारगेट करती दिखी. न्यूज विंग संवाददाता ने खुद चार से पांच बार देखा कि रैफ के जवान-जिला पुलिस मीडियाकर्मियों को पीट रहे थे और फिर उनसे कैमरा छीनकर फुटेज डिलीट करने का दबाव बना रहे थे. शाम तक खबर आयी कि करीब 10 पत्रकारों को टारगेट कर रैफ और जिला पुलिस के जवानों ने पीटा है. जबकि, पत्रकार के गले में मीडिया का पास लटका था, जिसे खुद जिला प्रशासन की तरफ से दिया गया था. वहीं, कैमरामैन के हाथ में कैमरा होना ही इस बात का सबसे बड़ा सबूत होता है कि वह मीडियाकर्मी है. बावजूद इसके रैफ और जिला पुलिस के जवानों ने मीडियाकर्मियों से बदतमीजी की और उन्हें डंडे से पीटा.

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किस-किस को आयी चोट

स्थापना दिवस : रैफ वालों ने मीडियाकर्मियों को टारगेट कर पीटा और कैमरा छीना, SSP ने कहा- ऐसा करना गलत, पत्रकारों ने कहा- कार्रवाई हो
घायल पत्रकार राजेश तिवारी.

प्रभात खबर के वरीय संवाददाता राजेश तिवारी के हाथ में गहरी चोट आयी है. इनके अलावा दैनिक जागरण आई नेक्स्ट के फोटो जर्नलिस्ट पिंटू दुबे, पायनियर के विनय मुर्मू, न्यूज 18 के कैमरामैन राजीव, संवाददाता बैद्यनाथ, ताजा टीवी के कमलेश, न्यूज 11 के मुकेश भट्ट समेत कई ऐसे पत्रकार हैं, जिनके साथ कवरेज के दौरान रैफ व जिला पुलिस के जवानों ने बदतमीजी की और धक्का-मुक्की की.

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ऐसा करना गलत : SSP

इस पूरे मामले पर रांची के एसएसपी अनीश गुप्ता ने कहा, “मीडियावालों को टारगेट करने का दिशा-निर्देश कभी भी पुलिस विभाग की तरफ से नहीं दिया जाता है. मैं किसी का पक्ष नहीं ले रहा हूं, लेकिन सिपाही वगैरह डर जाते हैं कि उनकी तस्वीर आ रही होगी. उन्हें लगता है कि वीडियो आने के बाद उन पर कार्रवाई हो जायेगी. उस तरह के तनाव से बचने के लिए हो सकता है उनलोगों ने ऐसा किया हो. रैफ को किसी भी हाल में ऐसा नहीं करना चाहिए. अगर ऐसा किया है, तो गलत है. हमलोग देखेंगे कि किस तरह की कार्रवाई हमलोग इस पर कर सकते हैं.”

स्थापना दिवस : रैफ वालों ने मीडियाकर्मियों को टारगेट कर पीटा और कैमरा छीना, SSP ने कहा- ऐसा करना गलत, पत्रकारों ने कहा- कार्रवाई हो
मीडियाकर्मी पर लाठी चलाता रैफ का जवान.
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पत्रकारों ने की निंदा, कहा- कार्रवाई हो

झारखंड स्थापना दिवस समारोह और पारा शिक्षकों पर लाठीचार्ज के कवरेज के दौरान पत्रकारों पर लाठीचार्ज की रांची प्रेस क्लब ने तीखी भर्त्सना करते हुए दोषी पुलिसकर्मियों को चिह्नित कर उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की है. क्लब के अध्यक्ष राजेश सिंह और कार्यकारिणी के पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने कहा है कि पत्रकार समारोहस्थल पर बाकायदा सरकार के आमंत्रण पर पहुंचे थे. उन्हें प्रशासन ने ही पास निर्गत किया था, इसके बावजूद पत्रकारों और छायाकारों को जान-बूझकर निशाना बनाया गया. हमले में एक दर्जन पत्रकार घायल हुए हैं या उन्हें चोट आयी है. क्लब ने सरकार से मांग की है कि जिन पुलिसकर्मियों ने जान-बूझकर हमला किया, उन्हें अविलंब बर्खास्त किया जाये. वहीं, क्लब के उपाध्यक्ष सुरेंद्र सोरेन ने कहा, “यह कोई पहला मौका नहीं है, जब पुलिस ने ऐसा किया हो. हम शिकायत भी करते हैं, लेकिन कार्रवाई नहीं होती है. इस बार तो पुलिसवालों ने कुछ ज्यादा ही किया है. इस बार पुलिस ऐसा करनेवालों की पहचान कर कार्रवाई करे. आखिर पुलिसवालों की ही तरह पत्रकार भी अपना काम कर रहे थे.”

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लाठीचार्ज में पारा शिक्षक और सफाईकर्मी भी हुए घायल

मोरहाबादी मैदान में लाठीचार्ज के दौरान घायल हुए लोगों का इलाज रिम्स में किया जा रहा है. लाठीचार्ज में पारा शिक्षकों, मीडियाकर्मियों और सफाईकर्मियों के साथ-साथ अन्य व्यक्ति भी घायल हुए हैं. इनमें कई महिलाएं भी शामिल हैं. पुलिस द्वारा किये गये लाठीचार्ज में किसी को हाथ में चोट लगी, तो किसी के पांव में फ्रैक्चर आ गया है. झारखंड का 18वां स्थापना दिवस समारोह इन सभी घायलों के लिए एक यादगार समारोह बन गया. अब तक के आंकड़ों के अनुसार 14 लोगों का इलाज रिम्स में कराया जा रहा है. घायलों में सफाईकर्मी डोमन बख्शी और चंद्रेश्वर राय, पारा शिक्षक आनंद कुमार, तुलसी महतो, विजय कुमार मिश्रा, निकिम सिंह मुंडा, रामपुकार पांडेय, महावीर मंडल, अभिलाषा झा, मो. इम्तियाज अहमद, मो. अरशद आलम और विश्वनाथ यादव भी शामिल हैं.

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