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विधानसभा चुनाव लड़ने का मामला : जमशेदपुर के प्रभारी सिविल सर्जन के इस्तीफे का रिकॉर्ड खोज रही सरकार

बिहार के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी और स्वास्थ्य अपर मुख्य सचिव को पत्र लिखकर मांगी गयी है जानकारी

सिविल सर्जन का दावा-2005 में चुनाव लड़ने से पूर्व दिया था त्यागपत्र, नहीं हुआ मंजूर तो चुनाव से रहे थे दूर
Jamshedpur : जमशेदपुर के प्रभारी सिविल सर्जन डॉ एके लाल पर बिहार के स्वास्थ्य विभाग एवं निर्वाचन विभाग से रिपोर्ट आने के बाद विभागीय कार्रवाई होगी. झारखंड के स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त सचिव विद्यानंद शर्मा पंकज ने बिहार के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी एवं स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव को पत्र भेज कर प्रभारी सिविल सर्जन डॉ एके लाल द्वारा बिहार में चुनाव लड़ने के पहले नौकरी से त्यागपत्र के बारे में जानकारी मांगी गयी है.

बिहार के स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव से जानकारी मांगी गयी है कि डॉ एके लाल के त्यागपत्र के आवेदन पर कब क्या कार्रवाई हुई. इसके लिए विभागीय संचिका की हर पन्ने की छायाप्रति उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया है. दूसरी ओर, मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी से चुनाव में डॉ एके लाल की चुनावी सक्रियता पर रिपोर्ट मांगी गयी है. दरअसल, विभागीय जांच के दौरान डॉ लाल ने जवाब दिया था कि उन्होंने चुनाव के लिए 2005 में झंझारपुर सीट से नामाकंन किया था, लेकिन उनका त्यागपत्र मंजूर नहीं हुआ था. इस बीच नाम वापसी का समय गुजर चुका था, इससे नामांकन रह गया, लेकिन वह चुनाव में सक्रिय नहीं हुए थे.
बिहार से रिपोर्ट आने पर होगी कार्रवाई
प्रभारी सिविल सर्जन डॉ एके लाल द्वारा बिहार में चुनाव लड़ने से पूर्व त्यागपत्र देने के दावे की जांच सरकार के आदेश पर शुरू की गयी है, ताकि नौकरी में रहकर चुनाव लड़ने से पूर्व त्यागपत्र देने की पुष्टि हो सके. सिविल सर्जन ने भी दस्तावेज दिया है. उम्मीद है कि बिहार के स्वास्थ्य विभाग और निर्वाचन पदाधिकारी की रिपोर्ट के आधार पर ही पूर्वी सिंहभूम के सिविल सर्जन डॉ एके लाल के खिलाफ आगे की कार्रवाई होगी.
विधायक सरयू राय ने उठाया है मुद्दा
जमशेदपुर पूर्वी के विधायक सरयू राय ने झारखंड विधानसभा में यह मुद्दा उठाया है. इससे एक बार फिर प्रभारी सिविल सर्जन के खिलाफ कार्रवाई शुरू हो गयी है. इस मामले में सिविल सर्जन से जवाब भी मांगा गया था. विधायक सरयू राय ने सेवा बर्खास्तगी की मांग उठायी थी. झारखंड सरकार इन दावों की जांच करा रही है. राज्य के स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता भी मामले पर नजर रखे हुए हैं, लेकिन विभागीय कार्रवाई अब तक नहीं हुई है.

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