
Divy Khare/Manoj Kumar
Giridih: सीबीआइ के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने मंगलवार को गिरिडीह में फैक्ट्री मालिक से 5 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए कोलकाता की नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) की बेंच द्वारा नियुक्त एक अंतरिम रिज़ॉल्यूशन प्रोफेशनल (IRP) को रंगे हाथ पकड़ा. गिरफ्तार संजय कुमार अग्रवाल चार्टेड अकाउंटेंट और श्रेया इन्सॉल्वेंसी प्रोफेशनल्स प्राइवेट लिमिटेड, कोलकाता के निदेशक हैं.
श्री अग्रवाल मंगलवार को कोलकाता से गिरिडीह में दो लोन डिफॉल्टर कंपनियों आदि इस्पात लिमिटेड और श्री बीर इस्पात प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ कॉरपोरेट इनसॉल्वेंसी रिजॉल्यूशन प्रक्रिया शुरू करने के लिए आये थे. उन्होंने प्रक्रिया के दौरान फैक्ट्री मालिक से रिश्वत की मांग की थी. सीबीआइ के अनुसार, आरोपी श्री अग्रवाल को कंपनियों की दिवालिया प्रक्रिया शुरू करने के लिए NCLT, कोलकाता द्वारा IRP के रूप में नियुक्त किया गया था.
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20 लाख की मांग की थी

श्री अग्रवाल ने फैक्ट्री मालिक से रिश्वत के रूप में 20 लाख रुपये की मांग की थी और पहले 5 लाख रुपये नकद और बाकी 2 लाख रुपये प्रति माह की आसान किस्तों में स्वीकार करने का सौदा तय किया था. उन्होंने मंगलवार को कंपनी का निरीक्षण किया और फैक्ट्री मालिक से 5 लाख रुपये लिये, उसी वक्त सीबीआइ टीम ने छापा मारा और उसे रंगे हाथ पकड़ा. एसपी, सीबीआइ (एसीबी), धनबाद, नागेन्द्र प्रसाद ने पुष्टि की कि अग्रवाल को 5 लाख रुपये की रिश्वत लेते गिरफ्तार किया गया है.
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वर्ष 2007 से 2013 के बीच भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की शाखा SME से Adi Ispat Limited और Shree Bir Ispat दोनों कंपनियों ने 74 करोड़ रुपये और 3.6 करोड़ रुपये की क्रेडिट सुविधा का लाभ उठाया था. लेकिन वे ऋण का भुगतान नहीं कर सके. जिस कारण एसबीआइ ने अगस्त 2014 को इन दोनों कंपनियों को गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (एनपीए) घोषित किया गया था. बाद में एसबीआइ ने एनसीएलटी का दरवाजा खटखटाया और इन दोनों कंपनियों के खिलाफ कॉर्पोरेट दीवाला समाधान प्रक्रिया शुरू करने की मांग की.
रंगे हाथ पकड़ा
हालांकि NCLT ने 22 नवंबर, 2019 को दिवालिया प्रक्रिया शुरू करने का आदेश दिया और अग्रवाल को दोनों कंपनियों के लिए IRP के रूप में जनवरी, 06, 2020 को नियुक्त किया. अग्रवाल इस प्रक्रिया में फैक्ट्री मालिकों का पक्ष मजबूत करने के लिए रिश्वत की मांग की थी. जिसके बाद मामला सीबीआइ धनबाद के पास पहुंचा और आगे की कार्रवाई करते हुए सीबीआइ की टीम ने अग्रवाल को रंगे हाथ पकड़ा और एफआइआर दर्ज की.
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