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राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के निर्देशों की #Bccl को नहीं परवाह,  जहरीले धूल-कण से लोगों का जीना मुश्किल

Dhanbad : झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के निर्देश के बाद भी बीसीसीएल कोलियरी और साइडिंग एरिया में पीएम -10 एनलाइजर मशीन नहीं लगायी गयी है. इस मशीन से कोलियरी और साइडिंग क्षेत्र में प्रदूषण की मॉनिटरिंग की जानी थी.

धनबाद के सबसे प्रदूषित शहरों में से एक है. इसी को देखते हुए झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने बीसीसीएल को यह निर्देश दिया था, लेकिन बीसीसीएल को आज तक इन निर्देशों की कोई परवाह नहीं है.

धनबाद के झरिया को देश में सबसे प्रदूषित शहर घोषित किये जाने के बाद झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने बीसीसीएल प्रबंधन को कई निर्देश जारी किये थे. धनबाद एक्शन प्लान को लेकर आयोजित बैठक में बोर्ड के चेयरमैन ने कहा था कि धनबाद की स्थिति (प्रदूषण  मामले में) बहुत खराब है. अगर स्थिति नहीं सुधरी तो हम नये उद्योग लगाने पर प्रतिबंध लगा सकते हैं.

धनबाद को किसी भी सूरत में दिल्ली नहीं बनने देंगे. साथ ही प्रदूषण नियंत्रण के लिए बीसीसीएल समेत सभी कोयला कंपनियों को अपनी कोलियरी और साइडिंग में पीएम-10 एनलाइजर मशीन लगाने का निर्देश दिया गया था. लेकिन अब तक किसी भी कोलियरी में पीएम-10 एनलाइजर मशीन नहीं लगायी गयी.

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क्या है पीएम -10 और क्यों जरूरी है मॉनिटरिंग

पीएम 10 हवा में मौजूद इतने छोटे कण होते हैं, जो स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकते हैं. जब इन कणों का स्तर वायु में बढ़ जाता है तो सांस लेने में दिक्कत होती है. आंखों में जलन की समस्या होने लगती है.

पर्टिकुलेट मैटर, वातावरण में मौजूद ठोस कणों और तरल बूंदों का मिश्रण है. हवा में मौजूद कण इतने छोटे होते हैं कि आप खुली आंखों से भी नहीं देख सकते हैं. कुछ कण तो इतने छोटे होते हैं कि इन्हें केवल इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप का उपयोग करके पता लगाया जा सकता है.

ये कण प्रदूषण में पीएम-10 हैं, जो बहुत खतरनाक होते हैं. बीसीसीएल और अन्य कंपनियों में कोयला उत्खनन, स्टोरिंग और उनकी ट्रांसपोर्टिंग के दौरान भारी मात्रा में धूलकण हवा में जा मिलते हैं. जो हमारे स्वास्थ्य के लिए काफी हानिकारक हैं. वहीं हवा में धूलकण की मात्रा को मॉनिटरिंग के लिए पीएम -10 एनलाइजर मशीन लगाने की बात कही गयी थी. उस मशीन को लगाने में 3. 54 लाख रुपये लगते हैं.

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जान से खिलवाड़ कर रही है ऊर्जा देने वाली कंपनियां

उमेश प्रसाद कहते हैं कि देश को ऊर्जा देने के नाम पर कोयला कंपनियां जान से खिलवाड़ कर रही हैं. बीसीसीएल न सड़कों पर पानी का छिड़काव करती है और न ही कवर करके कोयला की ट्रांसपोर्टिंग की जाती है. वहीं कोयले के उत्खनन के दौरान जो ओबी निकाले जा रहे हैं, उससे भी भारी मात्रा में धूलकण हवा में मिल रहे हैं.

धनबाद के कोलियरी क्षेत्रो में तय मानक से ज्यादा पाये जाते हैं पीएम-10.  व्यवसायी राजू सिंह ने कहा कि व्यवसाय के कारण कोलियरी क्षेत्र में रहने को मजबूर हैं. लेकिन अब स्थिति भयावह हो चुकी है, इसलिए जान की कीमत पर व्यवसाय चलाना गलत फैसला होगा. साथ ही कहा कि अब हमलोग दूसरे क्षेत्रों में जाकर रोजगार करना चाहते हैं क्योंकि यहां रहना खतरे से खाली नहीं है.

प्रदूषण से बचने के लिए लोग लगायें मास्क

इस मामले में सिंफर के वैज्ञानिक ने जो बातें बतायी, उसके अनुसार PM-10  का सामान्यत: लेवल 100 माइक्रो ग्राम क्यूबिक मीटर और PM2.5 का लेवल 60 माइक्रो ग्राम क्यूलबिक मीटर होना चाहिए. अगर हवा में PM2.5  और PM10  का लेवल बढ़ रहा है तो समझिये की हवा में प्रदूषण बढ़ रहा है. इसके बढ़ने से कई तरह की बीमारियां हो सकती हैं. इससे बचने के लिए लोगों को मास्क लगाना चाहिए.

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