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कोलियरी में लेवी का काला खेल : चार साल में एक SIT तक गठित नहीं कर सकी सरकार, अनुशंसा-अनुशंसा खेलते रहे अधिकारी

10 महीने लगे पुलिस को SIT की अनुशंसा करने में, अब धूल चाट रही है अनुशंसा वाली फाइल

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Ranchi : एनआईए (नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी) ने मंगलवार को एक के बाद एक करीब आठ जगहों पर छापामारी की. एनआईए की टीम हजारीबाग और चतरा में चल रही सीसीएल परियोजनाओं में हो रही अवैध वसूली में टीपीसी और भाकपा माओवादी का कनेक्शन ढूंढ रही है. दोनों जिलों समेत पूरे झारखंड के लिए यह एक सनसनीखेज खबर है, क्योंकि कोयले के इस काले खेल में राज्य भर के कई सफेदपोश लोगों का नाम सामने आ रहा है. मामला आज से नहीं चल रहा है. 2015 से ही लेवी की बात सामने आ रही है. लेकिन, गौर करनेवाली बात यह है कि मौजूदा सरकार आज तक इसकी जांच के लिए एसआईटी नहीं बना सकी. मामले को लेकर न्यूज विंग के हाथ गृह विभाग और पुलिस की कुछ चिट्ठियां लगी हैं. चिट्ठियों को देखकर साफ लगता है कि पुलिस, गृह विभाग और सरकार के स्तर से लीपापोती की गयी है. आखिर क्या वजह रही कि एसपी आईजी को, आईजी सचिव को, मुख्य सचिव विभाग के सचिव को चिट्ठी दर चिट्ठी लिखते रहे, लेकिन एसआईटी बनाने की जहमत किसे ने नहीं उठायी?

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चिट्ठी-चिट्ठी खेलती रही पुलिस और होती रही करोड़ों की बंदरबांट

17.04.2015 को बड़कागांव की विधायक निर्मला देवी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह को पत्र लिखकर इस बात की जानकारी दी कि हजारीबाग और चतरा जिलों की कोलियरियों से रोजाना करीब 2.5 लाख रुपये की वसूली हो रही है. यानी, हर महीने करीब 7.5 करोड़ रुपये की वसूली.

चतरा एसपी अपनी चिट्ठी में खुद ही उलझते नजर आये

तीन महीने के बाद, यानी 02.07.2015 को एसपी चतरा ने आईजी अभियान को एक रिपोर्ट दी. रिपोर्ट में एसपी चतरा क्या कहना चाह रहे हैं, स्पष्ट नहीं है. उन्होंने अपनी चिट्ठी में कहा कि अवैध उगाही करने के संबंध में सहायक पुलिस अधीक्षक और अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी टंडवा ने संयुक्त रूप से जांच की है. जांच रिपोर्ट में सामने आया है कि रघुराम रेड्डी आम्रपाली प्रोजेक्ट में ओबी हटाने का काम करते हैं. आम्रपाली प्रोजेक्ट में हैदराबाद के मजदूरों के संबंध में आक्रोश या उग्रवादी के नाम से भय का माहौल नहीं पाया गया. उन्होंने अपनी चिट्ठी में यह तो कहा है कि सीसीएल के कर्मचारियों और रघुराम रेड्डी टीपीसी का सहयोग लेते थे. यह भी कहा कि रघुराम रेड्डी की टीपीसी के साथ बातचीत होने की बात सही है. लेकिन, अगली ही लाइन में उन्होंने लिखा है कि आम्रपाली प्रोजेक्ट में उग्रवादियों द्वारा अवैध मासिक उगाही और उसके बंटवारे के संबंध में स्पष्ट साक्ष्य नहीं मिले हैं. ऐसे में सवाल यह उठता है कि टीपीसी जैसा संगठन बिना आर्थिक फायदे के किसी से बात या किसी तरह का कोई रिश्ता क्यों रखेगा. अपनी चिट्ठी में एसपी ने आय-व्यय की विवरणी पर उच्चस्तरीय निगरानी रखने की आवश्यकता की बात कही. यह भी उल्लेख किया कि क्षेत्र के आर्थिक मूल्य को देख भाकपा माओवादी टीपीसी उग्रवादी संगठन के साथ अन्य संगठन भी अपना वर्चस्व बनाने में लगे हुए हैं.

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कमिटी के सदस्यों पर हैं मुकदमे, लेकिन वसूली की बात से इनकार

फिर से तीन महीने के बाद, यानी 30.10.2015 को आईजी (मुख्यालय) ने गृह विभाग के उपसचिव को एक रिपोर्ट सौंपी. रिपोर्ट में आईजी ने कहा कि एसपी हजारीबाग के पूरे मामले की जांच की है. जांच में पाया गया कि लोकल सेल संचालन समिति द्वारा मजदूरों के बीच व्यवस्थित ढंग से कोयला लोडिंग की यह व्यवस्था वर्षों से चली आ रही है. इससे मजदूरों के बीच ट्रकों का वितरण बारी-बारी से होता रहता है. जेपीसी और टीपीसी उग्रवादी संगठन को पैसा भुगतान के संबंध में जांच में कोई सूचना नहीं पायी गयी. चतरा जिले के पिपरवार सेल प्रोजेक्ट में कांटा कमिटी चलती है. जिन सदस्यों के नाम का जिक्र रिपोर्ट में है, उन पर आस-पास के थानों में कई तरह के मामले चल रहे हैं. रिपोर्ट में इस बात का साफ जिक्र है कि कांटा में लोडिंग के नाम पर डीओ होल्डर, ट्रांसपोर्टर, हाईवा आदि से वसूली मजदूरों के नाम पर की जाती है, जो अवैध वसूली का भी जरिया है. यहां चल रही कमिटी को तत्काल प्रभाव से भंग कर नये सिरे से अनुमंडल पदाधिकारी के नेतृत्व में कमिटी गठन के लिए उपायुक्त ने अनुशंसा की है. कई लोगों के नाम का उल्लेख कर आईजी ने कहा कि अवैध वसूली और गलत तरीके से अधिक संपत्ति की जांच के लिए एसआईटी का गठन करने के लिए गृह कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग से अनुरोध किया गया है. यहां गौर करनेवाली बात यह है कि आईजी जो भी चिट्ठी गृह विभाग को लिखते हैं, उसमें साफ तौर से डीजी लेवल से निर्देश प्राप्त रहते हैं. एसआईटी गठन कर जांच करने का अधिकार पुलिस मुख्यालय को है. लेकिन, यहां एसआईटी के लिए गृह विभाग को लिखा जा रहा है.

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सीएस ने फिर से पल्ला झाड़ा, एसआईटी के लिए विभाग को कहा

दो महीने के बाद 21.12.2015 को राज्य के मुख्य सचिव राजीव गौबा ने गृह विभाग को एक चिट्ठी लिखी. उन्होंने अपनी चिट्ठी में कहा कि आम्रपाली और पिपरवार में लोकल सेल का परिचालन वहां की सेल कमिटी करती है. ये कमिटियां संचालन के नाम पर करोड़ों रुपये की उगाही का काम करती हैं. संचालन कमिटी के कुछ सदस्यों ने पूरी कमिटी पर वर्चस्व बनाकर अवैध कमाई से अकूत संपत्ति बनायी है. इसमें कुछ लोगों के नाम भी शामिल थे. अपनी चिट्ठी में मुख्य सचिव ने गृह विभाग के सचिव को निर्देश दिया कि सभी प्रोजेक्ट में कार्यरत लोकल सेल संचालन कमिटी को भंग कर नयी कमिटी का गठन जल्द से जल्द किया जाये और आपराधिक सांठगांठ से वसूली करनेवाले के ऊपर जांच के आधार पर कार्रवाई सुनिश्चित की जाये. साथ ही कहा कि अगर जरूरत पड़े, तो एसआईटी के गठन का प्रस्ताव भी दें. यहां पर एक बार फिर से एसआईटी गठन का सीधा निर्देश नहीं दिया गया.

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धूल फांकने को निकली एसआईटी गठन करने की अनुशंसा

दो महीने के बाद 20.02.2016 को एसआईटी टीम की अनुशंसा की गयी. गृह विभाग के विशेष सचिव शेखर जमुआर ने एसआईटी के गठन की चिट्ठी निकाली. इस टीम का अध्यक्ष डीआईजी बोकारो को बनाया गया. वहीं, सदस्य के तौर पर खनन विभाग के अपर समाहर्ता, वन विभाग के अपर समाहर्ता, वाणिज्य कर विभाग के अपर समाहर्ता, परिवहन विभाग के अपर समाहर्ता और अन्य विभाग के अपर समाहर्ता को सदस्य बनाया गया. लेकिन, गौर करनेवाली बात यह है कि एसआईटी सिर्फ कागजों पर ही तैयार हुई. आला कमान के यहां से इसे शुरू कराने का आदेश आज तक नहीं आया.

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