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नियम-कानून को ताक पर रख कर वन विभाग ने निकाला था विज्ञापन, नियुक्ति प्रक्रिया करनी पड़ी स्थगित

  • कांट्रैक्ट पर रिटायर 70 वन क्षेत्र पदाधिकारी की करनी थी नियुक्ति, फंस गया आरक्षण का पेंच
  • 30 साल बाद भी नहीं हो पायी है वन क्षेत्र पदाधिकारियों की नियुक्ति, 159 पद हैं रिक्त

Ranchi: सीएम के अधीन वन विभाग में नियम-कानून की अनदेखी निरंतर होती रही है. चाहे वह जंगल की जमीन के अतिक्रमण का मामला हो या नियुक्ति का. एक बार फिर रेंजरों (वन क्षेत्र पदाधिकारी) की नियुक्ति में पेंच फंस गया है. जिसके कारण वन विभाग ने रेंजर नियुक्ति की प्रक्रिया स्थगित कर दी है. वन विभाग ने रिटायर रेंजरों को जंगल की सुरक्षा में लगाने का फैसला लिया था. इसके लिए 70 पदों पर रिटायर रेंजर को कांट्रैक्ट पर नियुक्त करने का विज्ञापन 15 फरवरी को जारी किया था. इसमें शर्त रखी गई थी कि जनवरी 2019 तक आवेदक की उम्र 64 साल से कम होनी चाहिए. आवेदन भी आये, लेकिन विज्ञापन में आरक्षण के नियमों का पालन नहीं किया गया. इसमें आर्थिक रूप से कमजोर स्वर्णों के आरक्षण का जिक्र ही नहीं था. अब फिर से रोस्टर तैयार किया जायेगा. फिलहाल वन विभाग ने नयुक्ति स्थगित करने का आदेश जारी कर दिया है.

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किस श्रेणी में कितने पदों के लिए निकला था विज्ञापन

अनारक्षित वर्ग में 35, अनुसूचित जाति में सात, अनुसूचित जनजाति में 18, ओबीसी में 10 पदों पर नियुक्ति का विज्ञापन जारी किया गया था. इसमें कहा गया था कि संविदा पर नियुक्त रेंजर की सेवा कभी भी समाप्त करने की शक्ति प्रधान मुख्य वन संरक्षक की होगी. संविदा की अवधि की समाप्ति पर यह नियोजन स्वत: समाप्त समझा जायेगा. इसके लिए अलग से कोई आदेश निर्गत नहीं किया जायेगा. उम्मीदवारों के अंतिम रूप से चयन का पूर्ण अधिकार चयन के लिए गठित विभागीय समिति का होगा. चयनित उम्मीदवारों को पहली बार एक वर्ष के लिए नियोजित किया जायेगा. संविदा के आधार पर नियोजन के बाद सरकारी सेवा में पुन: विनियमितीकरण का कोई दावा स्वीकार्य नहीं होगा. चयनित पदाधिकारियों का आवश्यकता अनुसार किसी भी वन प्रमंडल में पदस्थापना किया जायेगा.

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30 साल बाद भी रेंजरों की नहीं हो पायी है नियुक्ति

पहली बार 1989 में रेंजरों की नियुक्ति हुई थी. 30 साल गुजर जाने के बाद भी आज तक रेंजरों की बहाली नहीं हो पायी है. राज्य में रेंजर के 383 पद हैं, इसमें 224 रेंजर कार्यरत हैं. कुल 159 पद रिक्त हैं. जबकि वन क्षेत्र पदाधिकारी(रेंजर) सेवा संवर्ग नियमावली बन चुकी है. रेंजर को राज्य सेवा में भी शामिल कर लिया गया है. फिर भी सीधी नियुक्ति की प्रक्रिया अब तक लंबित है.

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रेंजर एसोसिएशन ने जताया था विरोध

रेंजर एसोसिएशन ने कांट्रैक्ट पर रेंजर नियुक्ति का विरोध भी जताया था. कहा था कि जब वन क्षेत्र पदाधिकारी संवर्ग सेवा नियमावली बन चुकी है तो कांट्रैक्ट पर नियुक्ति का कोई औचित्य नहीं है. वहीं वन क्षेत्र पदाधिकारी संवर्ग सेवा नियमावली में एडहॉक पर नियुक्ति का कोई प्रावधान नहीं है. यह नियुक्ति प्रक्रिया पूरी तरह से गलत है.

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