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SC शुक्रवार को चुनावी बॉन्ड पर अपना फैसला सुनायेगा, सुनवाई पूरी

इलेक्टोरल बॉन्ड सुनिश्चित करते हैं कि भुगतान केवल चेक, ड्राफ्ट और प्रत्यक्ष डेबिट के माध्यम से किया जाता है. कोई भी काला धन चुनाव में नहीं लगाया जा सकता.

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NewDelhi : SC शुक्रवार की सुबह 10.30 बजे चुनावी बॉन्ड पर अपना फैसला सुनायेगा कि बॉन्ड पर रोक लगाई जाये या नहीं. बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में चुनावी बॉन्ड को लेकर सुनवाई पूरी हो गयी.  जान लें कि केंद्र ने योजना की वकालत की है. अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल सुप्रीम कोर्ट से कहा कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान चुनावी बांड के मुद्दे पर कोर्ट आदेश न पारित करे.  केंद्र ने कोर्ट से आग्रह किया कि न्यायालय को इस मामले में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए और चुनाव प्रक्रिया के पूरा होने के बाद इस मुद्दे पर निर्णय लेना चाहिए. बता दें  कि इलेक्टोरल बॉन्ड्स पर मोदी सरकार को सुप्रीम कोर्ट में फजीहत का सामना करना पड़ा है.

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सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को कहा कि सरकार की काले धन पर लगाम लगाने की कोशिश के रूप में इलेक्टोरल बॉन्ड्स की कवायद पूरी तरह से बेकार है. कोर्ट ने कहा कि जिस तरह से इलेक्टोरल बॉन्ड्स की बिक्री को लेकर बैंकों को कोई जानकारी नहीं दी जा रही है, इससे लगता है कि यह ब्लैक मनी को व्हाइट करने का तरीका है.  सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया.

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चुनाव आयोग ने कहा था कि वह चुनावी बॉन्ड के खिलाफ नहीं है

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अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने केंद्र के लिए बहस करते हुए कहा कि चुनावी बांड राजनीतिक दान के लिए पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए एक बड़ा कदम है. एजी का कहना है कि चुनावी बांड से पहले, अधिकांश दान नकद के माध्यम से किये गये थे, जिससे बेहिसाब धन चुनाव में डाला गया था.  इलेक्टोरल बॉन्ड सुनिश्चित करते हैं कि भुगतान केवल चेक, ड्राफ्ट और प्रत्यक्ष डेबिट के माध्यम से किया जाता है. कोई भी काला धन चुनाव में नहीं लगाया जा सकता. इससे पहले बुधवार को सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग ने कहा था कि वह चुनावी बॉन्ड के खिलाफ नहीं है बल्कि चंदा देने वाले की पहचान गुप्त रखने के खिलाफ है.

सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को याद दिलाया कि उसने केंद्र को लिखे अपने पत्र में चुनावी बॉन्ड को प्रतिगामी कदम करार दिया था. कोर्ट ने पूछा कि क्या आयोग अपना रुख बदल रहा है. EC ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि इलेक्टोरल बॉन्ड में कुछ भी गलत नहीं है, लेकिन दानकर्ता के नाम सार्वजनिक किये जाने चाहिए क्योंकि लोगों और चुनाव आयोग को राजनीतिक दलों की फंडिंग के बारे में जानने का अधिकार है.

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