
Patna : आपने राजनीतिक जीवन में परिवार के लिए अकूत बेनामी संपत्ति अर्जित कर ली है. अपने पुत्रों को भी राजनीति में सेट कर ही दिया तो फिर अब क्या शेष रह गया? आप तो राजनीतिक गुरु बन अपने पुत्रों को भी अपने रास्ते पर चलने के लिए प्रशिक्षित कर चुके हैं. यह जेल में सजा काट रहे राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव द्वारा बुधवार को बिहार के लोगों को लिखे पत्र का जवाब है. बता दें कि सत्तारूढ़ नीतीश कुमार के जदयू ने पत्र लिखकर तंज कसा है.
जदयू ने लालू यादव को संबोधित इस पत्र में उन पर कटाक्ष करते हुए कहा है कि देश में चल रहे लोकतंत्र के उत्सव में जब आप शामिल होने के ही योग्य नहीं हैं, तो इस पर लिखने या अफसोस जताने से क्या लाभ? साथ ही जदयू ने बिहार में लालू के शासनकाल का जिक्र करते हुए कहा कि लोग उस लालटेन युग और जंगल राज को भूलकर नये बिहार की पटकथा लिख रहे हैं.
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लालू की व्यग्रता जेल में रहने के कारण बढ़ गयी है
लालू को लिखे पत्र में जदयू प्रवक्ता नीरज कुमार लिखा, यहां के लोग बिहार के गौरवशाली अतीत की तरह ही वर्तमान को गौरवशाली बनाने के लिए व्यग्र हैं. इसकी पटकथा सुशासन की इस सरकार ने लिखी है. वैसे, आपकी व्यग्रता और छटपटाहट उस कालखंड का परिणाम है, जिसके लिए अदालत ने भी उस काल को जंगल राज कहा था. पत्र में कहा गया है, आपकी (लालू) व्यग्रता जेल में रहने के कारण बढ़ गयी है, लेकिन आप कोई स्वतंत्रता संग्राम की लड़ाई के कारण या फिर अल्पसंख्यकों या सामाजिक न्याय की लड़ाई लड़ने के कारण जेल नहीं गये हैं, बल्कि अदालत ने आपको सरकारी राशि में घोटाला करने का दोषी पाया है. ऐसे में आपको सजा तो होनी ही थी.
पत्र में तंज कसते हुए लिखा गया है, आपने राजनीतिक जीवन में परिवार के लिए अकूत बेनामी संपत्ति अर्जित कर ही ली. अपने पुत्रों को भी राजनीति में सेट कर ही दिया तो फिर अब क्या शेष रह गया? नीरज कुमार ने लालू प्रसाद पर संविधान, लोकतंत्र और आरक्षण बचाने के नाम पर भ्रम फैलाने की कोशिश करने का आरोप लागते हुए कहा कि लोकतंत्र और संविधान में ही अदालत का भी समावेश है. उन्होंने कहा, आपकी करनी के कारण देश की सुप्रीम अदालत आपको जमानत तक देने को तैयार नहीं हैं. आप को उसी संविधान के तहत सजा सुनाई गयी है, जिसे बचाने की आप दुहाई दे रहे हैं. पत्र के अंत में नीरज ने लालू को नसीहत देते हुए कहा कि संविधान पर विश्वास करना सीखिए.
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44 वर्षों में पहला चुनाव है, जिसमें मैं आपके बीच नहीं हूं
बुधवार को लालू प्रसाद ने बिहार के लोगों को पत्र लिखकर कहा था कि इस चुनाव में सब कुछ दांव पर है. उन्होंने अफसोस जताते हुए कहा था, 44 वर्षों में पहला चुनाव है, जिसमें मैं आपके बीच नहीं हूं. चुनावी उत्सव में आप सब के दर्शन नहीं होने का अफसोस है. लोकसभा चुनाव के पहले चरण के मतदान के पूर्व लालू ने पत्र लिखकर लोगों से लोकतंत्र और संविधान बचाने की अपील करते हुए कहा था, आपकी कमी खल रही है इसलिए जेल से ही आप सब के नाम पत्र लिखा है. आशा है आप इसे पढि़एगा और लोकतंत्र और संविधान को बचाइएगा.
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