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रांची विश्वविद्यालय : अनुबंधित असिस्टेंट प्रोफेसर बकाया मानदेय की मांग को लेकर 29 अक्तूबर से अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार पर रहेंगे

Ranchi : झारखंड असिस्टेंट प्रोफेसर अनुबंध संघ के तहत रांची विश्वविद्यालय के अनुबंधित अस्सिटेंट प्रोफेसर 29 अक्तूबर से कार्य बहिष्कार पर रहेंगे. संघ की ओर से कहा गया है कि इस दौरान वे किसी भी तरह का शैक्षणिक और गैर शैक्षणिक कार्य नहीं करेंगे. दरअसल, अनुबंधित असिस्टेंट प्रोफेसरों के प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को बकाया मानदेय की मांग को लेकर रांची विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रमेश कुमार पांडेय, प्रति कुलपति प्रो. कामिनी कुमार और कुलसचिव डॉ. अमर कुमार चौधरी से मिल कर संयुक्त रूप से वार्ता की. वार्ता के असफल रहने की वजह से कार्य बहिष्कार का निर्णय लिया गया है.

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अनुबंधित असिस्टेंट प्रोफेसरों के प्रतिनिधिमंडल ने लॉकडाउन के समय से लेकर वर्तमान समय तक के बकाया मानदेय भुगतान की मांग की. प्रतिनिधिमंडल के अनुसार, उच्च शिक्षा एवं कौशल विकास विभाग के निदेशक ने 16 अक्टूबर को पत्र जारी किया था, इसमें लॉकडाउन के समय का मानदेय न्यूनतम तीस हजार रुपये देने की बात कही गयी है.

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मार्च से मानदेय का नहीं हुआ है भुगतान

रांची विश्वविद्यालय अनुबंध संघ के अध्यक्ष डॉ राकेश किरण महतो ने कहा कि यदि विश्वविद्यालय प्रशासन हमारी मांगों पर विचार नहीं करता है तो अनुबंध शिक्षक अनिश्चितकालीन आंदोलन करेंगे. उन्होंने कहा कि शिक्षकों का पिछले 8 माह से मानदेय लंबित है. यह स्थिति तब है जब गवर्नर सह चांसलर ने लॉकडाउन काल में किसी का भी वेतन नहीं रोकने का निर्देश दिया था. मार्च माह से शिक्षकों को मानदेय का भुगतान नहीं हुआ है.

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विश्वविद्यालय प्रशासन का रवैया शिक्षकों के प्रति उदासीन

संघ के उपाध्यक्ष डॉ रीझू नायक ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन का रवैया हम शिक्षकों के प्रति काफी उदासीन है. विश्वविद्यालय प्रशासन साफ तौर पर हमें लॉकडाउन अवधि के मानदेय की राशि का भुगतान करने के पक्ष में नहीं है. उन्होंने कहा कि वार्ता के दौरान कुलपति डॉ रमेश कुमार पांडे ने कहा कि आप बकाया मानदेय राशि को भूल जायें. यह सरासर तानाशाही रवैये को दर्शाता है. डॉ नायक ने कहा कि जब तक हमारी मांगों पर विचार नहीं किया जायेगा तब तक हम सभी प्रकार के शैक्षणिक एवं गैर शैक्षणिक कार्यों का बहिष्कार करेंगे. यह तब तक जारी रहेगा जब तक विश्वविद्यालय और सरकार द्वारा हमारी मांगों को नहीं मान लिया जाता. हम सरकार से भी यह मांग करते हैं कि लॉकडाउन अवधि की एक निश्चित मानदेय राशि का भुगतान करे. साथ ही लॉकडाउन के पश्चात भी यह व्यवस्था बनी रहे.

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अनुबंध पर असिस्टेंट प्रोफेसर के 600 रिक्त पदों पर नियुक्ति हुई थी

डॉ नायक ने बताया कि अनुबंध के आधार पर नियुक्त असिस्टेंट प्रोफेसर के रिक्त पदों पर 600 शिक्षकों की बहाली की गयी थी. इन्हें प्रति घंटे 600 रुपये मानदेय भुगतान करना था. विश्वविद्यालय और कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर के रिक्त पदों पर कई वर्षों से नियुक्ति नहीं हुई है. शिक्षकों की कमी का असर शैक्षणिक कार्यों पर भी पड़ रहा है. शिक्षकों के हड़ताल पर चले जाने से शैक्षणिक कार्यों पर काफी प्रभाव पड़ेगा.

प्रतिनिधिमंडल में प्रदेश अध्यक्ष डॉ. निरंजन महतो, रांची विश्वविद्यालय अध्यक्ष डॉ. राकेश किरण, उपाध्यक्ष डॉ रीझू  नायक, महासचिव किशोर सुरीन, डॉ संगीता कुजूर, डॉ त्रिभुवन साही, डॉ अजय शाहदेव, बीरेंद्र उरांव, रवि कुमार, डॉ आश्रिता कुमारी, डॉ अंजू कुमारी, शंकर मुंडा सहित विभिन्न कालेजों एवं स्नातकोत्तर विभाग के सहायक प्राध्यापक शामिल थे.

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