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रांची विवि में परीक्षण कार्यों से डिबार हो चुके प्रोफेसर जांच रहे हैं #JPSC की कॉपी

Kumar Gaurav

Ranchi : सरकार जेपीएससी, छठी सिविल सेवा परीक्षा को जल्द पूरा कराने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती. सिविल सेवा के मुख्य परीक्षा के परिणाम घोषित किये बिना ही इंटरव्यू की तारीख भी सरकार ने तय कर दी है. कॉपी जांचने की प्रक्रिया भी अंतिम चरण में है. लेकिन जेपीएससी का तो विवादों से पुराना नाता रहा है. इस बार भी इसमें विवाद कम नहीं है. इसी बीच जेपीएससी नागपुरी भाषा की कॉपी की जांच डिबार किये जा चुके प्रोफेसर से करा रही है.

नागपुरी भाषा के प्रोफेसर उमेश नंद तिवारी को तत्कालीन कार्यवाहक वीसी डॉ रजिउद्दीन ने परीक्षण कार्यों से डिबार कर दिया गया था. प्रोफेसर तिवारी को अनियमितता के आरोप में छह साल के लिए डिबार किया गया था. बाद में उन्हें डॉ रमेश कुमार पांडे ने मुक्त कर दिया.

लेकिन सवाल यह है कि अनियमितता के आरोपी रहे उमेश नंद तिवारी से जेपीएससी जैसे अति महत्वपूर्ण परीक्षा की कॉपी जांच करवाना कितना उचित है. क्या इससे जेपीएससी के कॉपी जांचने की प्रक्रिया संदेह के घेरे में नहीं आयेगी.

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2015 में परीक्षण कार्यों से एक्टिंग वीसी ने किया था डिबार

2015 में तत्कालिन एक्टिंग वीसी डॉ रजिउद्दीन ने परीक्षण कार्यों में अनियमितता बरतने के आरोप में डिबार कर दिया था. उन्हें छह साल के लिए डिबार किया था. उमेश नंद तिवारी रांची विश्वविद्यालय में नागपुरी भाषा के सहायक प्रोफेसर हैं.

डॉ त्रिवेणी नाथ साहू जो फिलहाल जेपीएससी के सदस्य हैं, वे नागपुरी भाषा के विभागाध्यक्ष थे और उसी वक्त उमेश नंद तिवारी को डिबार किया गया था. उन्होंने बताया कि सच है कि उन्हें डिबार किया गया था, पर वे कॉपी जांच रहे हैं, इस बात की जानकारी मुझे नहीं है.

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कड़ी निगरानी में हो रही है जांच

जेपीएससी की कॉपियां त्रुटिपूर्ण तरीके से जांची जाये, इसके लिए पूरी सख्ती बरती गयी है. सभी विषयों की कॉपियां सीसीटीवी की निगरानी में जांची गयी है. जांच प्रक्रिया सीबीआई की निगरानी में पूरी की गयी है.

इसके बावजूद ऐसे प्रोफेसरों से जेपीएससी जैसे मुख्य परीक्षा की जांच कराना संदेह उत्पन्न करता है. जेपीएससी छठी सिविल सेवा परीक्षा शुरु से ही विवादों में है. मामला कोर्ट में भी है. चार साल होने के बाद भी परीक्षा पूरी नहीं हो सकी है.

इस मामले पर प्रोफेसर उमेश नंद तिवारी से बात करने पर उन्होंने कहा, “मुझे बुलाया जायेगा तो मैं जांचूंगा. अभी नहीं जांच रहा हूं. मुझे डिबार किया गया था पर अब नहीं हूं.”

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