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झारखंड के IAS, IPS, IFS के नाम चिट्ठी, क्यों आप ऐसे हो गये ???

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Surjit singh

रहो धरम में धीर, रहो करम में वीर.

रखो उन्नत सिर, डरो ना…

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मैंने यूट्यूब पर सुना. बांग्ला, हिन्दी, तमिल व मराठी भाषा में बना यह गीत. आप भी एक बार फिर से सुनें और गायें.

https://m.youtube.com/watch?v=1Qckul8kgjE पाठक भी सुनें, अच्छा लगेगा

झारखंड के सभी आइएएस, आइपीएस, आइएफएस.

आपको याद ही होगा यह गीत. याद कैसे नहीं होगा. कैरियर की शुरुआत में हर दिन की शुरुआत तो आपने इसी गीत से की थी. लाल बहादुर शास्त्री नेशनल अकाडमी ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन में.

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पर, आप सबको नहीं लगता है कि आपने इस गीत को भुला दिया है. क्यों ? पैसे की लालच. पोस्टिंग की लालसा. सत्ता के करीब होने का ख्वाब. क्या इन भौतिक महत्वकांक्षाओं ने आपको बदल दिया है.

ट्रेनिंग के दौरान आपने दीवारों पर लिखा देखा था- योगं कर्मसु कोशलम् (अर्थात् कर्मों में कुशलता ही योग है)

पर कर क्या रहे हैं?

झारखंड के कुछ आइएएस, आइपीएस, आइएफएस क्या कर रहें हैं. धारा 370 हटने पर खुशी का सार्वजनिक इजहार करते हैं. एक राजनीति पार्टी के पक्ष में सोशल मिडिया पर #JharkhandWithModi अभियान चलाते हैं. एक पार्टी के पक्ष में वोट मैनेज करते हैं. सत्ता शीर्ष के इशारे पर एक कांट्रेक्टर के पक्ष में फाइल पर नोटिंग करते हैं. सत्ता शीर्ष के नजदीक के एक-दो अफसर का कृपा पात्र बनने के लिए, करीब जाने के लिए सिद्धांतों से समझौता करते हैं.

आपका चयन देश की सर्वोच्च सेवा के लिए हुआ है. आपने शपथ ली हैः

कि संविधान के प्रति सच्ची निष्ठा रखूंगा.

कि धर्म जाति से ऊपर उठ कर काम करूंगा.

कि आपकी जाति, धर्म, राजनीतिक सोच न्यूट्रल रहेगी.

कि आपकी सोच का दायरा किसी क्षेत्र या राज्य में सीमित न होकर देश होगा.

क्यों आप अपनी शपथ भूल गये. क्यों भूल गये कि सरकारें तो आती-जाती रहती हैं. हर पांच साल में बदल जाती हैं. आप ही हैं जो स्थायी हैं. संविधान ने जो आपको पावर दिया है, वह असीमित है. उसकी कोई सीमा नहीं. फिर भी क्यों आप इस हाल में पहुंच गये.

ट्रेनिंग के दौरान ही आपने यह भी पढ़ा था- शीलं परम् भूषणम् (अर्थात् शील ही सबसे बड़ा आभूषण है)

अब देखिये, आपके बारे में कैसी-कैसी बातें चर्चा में है. आपकी सेवा के ही कुछ अफसर अब कहने लगे हैं, ब्यूरोक्रेसी में तीन तरह के लोग हैं. पहले नंबर पर वह हैं, जो साधु, संत और नन की तरह व्यवहार करते हैं. उन्हें न मोह है ना माया. दूसरे नंबर पर वैसे अफसर हैं, जो 50-50 हैं. आधे इधर के-आधे उधर के. और तीसरे नंबर पर रहने वाले अफसरों की तुलना जिससे की जाती है, उस शब्द को यहां लिखने में भी मुझे शर्म आती है. जो पोस्टिंग पाने के लिए क्या-क्या नहीं करते हैं.

आपके बारे में दस्तावेजी प्रमाण सार्वजनिक हुए हैं. घोटाला करते हैं. सत्ता को खुश करने के लिए गलत फैसले लेते हैं. विरोधियों को परेशान करते हैं. दुष्कर्म करने वाले राजनेताओं के खिलाफ कार्रवाई नहीं करते. कोयला माफिया को संरक्षण देते हैं. दलालों को पालते हैं. जमीन दलाल बन गये हैं. कंपनियों से कमीशन मांग कर राजनेता को पहुंचाते हैं.

दुखद है. आप अपने कर्तव्य को भूल गये हैं. अब आपको डर भी नहीं लगता. न शर्म आती है. अब आप ब्रांडेड होने लगे हैं. किसी खास राजनीतिक दल के, किसी खास राजनेता के, किसी खास धार्मिक सोच वाले संगठन के आदमी के रूप में आपको पहचाना जाने लगा है. गुजरात कैडर के आइपीएस आरएस भगोरा की बरखास्तगी, पश्चिम बंगाल कैडर के आइपीए-कोलकाता के पूर्व कमिश्नर राजीव कुमार का हस्र भी आपको नहीं डराता.

अंत में यही कहूंगा, वह गीत जो आपने ट्रेनिंग के वक्त हर सुबह गाया था. वह याद नहीं तो इस यूट्यूब लिंक ( https://m.youtube.com/watch?v=1Qckul8kgjE ) को खोल कर सुन लें. शर्त यह है सुनते वक्त खुद को आईने के सामने रखें. बहुत संभव है कि आपको रात में नींद नहीं आयेगी. पर, इस उम्मीद के साथ आग्रह कर रहा हूं कि शायद अगली सुबह से आप वही करेंगे, संविधान जिसकी इजाजत देता है. आपने जिसकी शपथ ली है.

(नोट – लेखक न्यूज विंग के संपादक है. इस खबर पर आप अपनी प्रतिक्रिया अपने नाम व शहर के नाम के साथ इस नंबर 7360005385 पर Whatsapp करें.. हम उसे प्रकाशित करेंगे)
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