
Ranchi : कृषि, पशुपालन विभाग का आकलन है कि राज्य के 24 में से 22 जिलों में इस बार सुखाड़ की स्थिति ज्यादा ही गंभीर है. ऐसे में किसानों को अन्य प्रयासों के अलावा मनरेगा से भी जोड़ कर राहत दी जा सकती है. इस संबंध में विभाग के स्तर से रिपोर्ट तैयार किये जाने की सूचना है. इस काम में आपदा प्रबंधन विभाग, झारखंड से भी रायशुमारी और अन्य प्रक्रियाओं को पूरा किया जाना बाकी है. राज्य में इस साल अल्पवृष्टि के कारण सुखाड़ की स्थिति जिन 22 जिलों में अधिक दिखी है, वहां के 21 लाख 42 हजार 476 किसानों को सूखा राहत के तहत वित्तीय मदद दिये जाने का प्रयास होगा. इस क्रम में कुल किसान परिवारों में 2 या कम से कम एक व्यक्ति को मनरेगा योजनाओं से जोड़ा जा सकता है. इसके लिए उन्हें प्रतिदिन के कार्यदिवस के लिए 237 रुपये (प्रतिदिन) के आधार पर एक महीने से लेकर 3 महीने तक काम का अवसर दिया जा सकता है.
गढ़वा, देवघर में असर ज्यादा
गढ़वा, देवघर, हजारीबाग, पलामू, रांची सहित कई जिले ऐसे हैं जहां किसानों को 30 दिनों से लेकर 90 दिनों तक के लिए किसानों को मनरेगा के जरिये थोड़ा सबल किये जाने की चिंता कृषि विभाग ने की है. इसमें गढ़वा के लिए 30 दिनों तक मनरेगा स्कीम में काम किए जाने पर किसान श्रमिकों के लिए 302.95 करोड़ रुपये (प्रतिदिन 237 रुपये), देवघर के लिए (30 दिन) 302.52 करोड़, हजारीबाग के लिए 252.10, पलामू के लिए 223.20 करोड़ रुपये तक का प्रावधान किये जाने पर विचार हो रहा है. इसी तरह अन्य जिलों के लिए भी मनरेगा के तहत राशि रखे जाने पर विचार है.
17 हजार तक की सब्सिडी
कृषि विभाग ने पिछले दिनों सुखाड़ प्रभावित इलाकों का दौरा किया था. इस आधार पर यह देखा गया कि खरीफ-2022 के अंतर्गत कुल 224 प्रखंडों में सुखाड़ का गहरा असर पड़ा है. खरीफ फसलों के लिए कुल आच्छादन एरिया 11 लाख 62 हजार 276 हेक्टेयर में से 70 फीसदी एरिया (8 लाख 13 हजार 593 हेक्टेयर) बारिश की कमी से प्रभावित हुआ है. टोटल एरिया जो अल्पवृष्टि से प्रभावित हुआ है और जो बाकी एरिया के किसानों को प्रति हेक्टेयर 8500 रुपये और 17,000 रुपये प्रति हेक्टेयर तक सब्सिडी मुहैया करायी जा सकती है. सब पैसा DBT होगा. यह सब demand, Drought manual 2016 के आधार पर होगा. अन्य विभाग (यथा-ग्रामीण/सिंचाई/स्वास्थ्य/शिक्षा विभाग) आदि भी अपना डिमांड भेजेंगे जिसे आपदा विभाग एकीकृत कर भारत सरकार को भेजेगा. अभी तत्काल 3500 रुपये तक किसानों को मिलेंगे. इसे बाद में डिमांड की पूर्ति के बाद एडजस्ट कर लिया जायेगा.
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