
झारखंड में 3 से 18 साल के बच्चों का होगा सर्वे, स्कूल से बाहर मिले तो फिर होगा दाखिला

10 नवंबर से 10 जनवरी तक चलेगा घर-घर अभियान, होटल-ढाबों और रेलवे स्टेशनों पर भी होगी बच्चों की तलाश
Ranchi: झारखंड में कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे, इसके लिए शिक्षा विभाग राज्यभर में बच्चों का नया ब्योरा जुटाने जा रहा है। झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद (जेईपीसी) शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए शिशु पंजी अपडेट करेगी। इसके तहत तीन से 18 वर्ष तक के बच्चों की पहचान के लिए घर-घर सर्वे किया जाएगा। खास तौर पर उन बच्चों को चिह्नित किया जाएगा, जिन्होंने अब तक स्कूल में दाखिला नहीं लिया है या किसी कारणवश बीच में ही पढ़ाई छोड़ दी है। ऐसे बच्चों को दोबारा शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने और उनका नामांकन सुनिश्चित करने पर जोर रहेगा।
सर्वे को व्यवस्थित तरीके से पूरा करने के लिए पहले गांवों, टोलों और अलग-अलग बसावटों की हैबिटेशन मैपिंग की जा रही है। इसे नौ नवंबर तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके बाद 10 नवंबर 2026 से 10 जनवरी 2027 तक घर-घर जाकर सर्वे किया जाएगा। सर्वे से संबंधित सभी जानकारियां डहर (DAHAR 2.0) पोर्टल पर दर्ज की जाएंगी। इसके लिए जेईपीसी ने जिला और प्रखंड स्तर के अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए हैं।
हर बच्चे की शैक्षणिक स्थिति का जुटेगा ब्योरा
सर्वे के दौरान क्षेत्र में रहने वाले बच्चों की कुल संख्या, स्कूलों में नामांकन, कभी विद्यालय नहीं जाने वाले बच्चों और बीच में पढ़ाई छोड़ चुके विद्यार्थियों की जानकारी जुटाई जाएगी। तीन से पांच वर्ष तक के बच्चों का भी ब्योरा लिया जाएगा, ताकि उन्हें शुरुआती शिक्षा से जोड़ने की योजना बनाई जा सके। वहीं, छह से 18 वर्ष तक के बच्चों के नामांकन और पढ़ाई जारी रखने की स्थिति पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
सर्वे से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर स्कूल से बाहर बच्चों की पहचान, उनके दोबारा नामांकन और समग्र शिक्षा अभियान की आगामी कार्ययोजना तैयार की जाएगी। पिछले शैक्षणिक सत्र के सर्वे में झारखंड में 29,995 बच्चे स्कूल से बाहर चिह्नित किए गए थे। नए सर्वे से यह स्पष्ट हो सकेगा कि वर्तमान में कितने बच्चे अब भी शिक्षा से दूर हैं।
शिक्षकों को गांवों और घरों की मिलेगी जिम्मेदारी
अभियान के तहत प्रखंड स्तर पर सरकारी विद्यालयों को आसपास के गांवों और टोलों से जोड़ा जाएगा। इसके बाद प्रधानाध्यापक शिक्षकों के बीच सर्वे क्षेत्र और परिवारों की जिम्मेदारी बांटेंगे। शिक्षकों की उपलब्धता, परिवारों की संख्या और विद्यालय से संबंधित टोले की दूरी को ध्यान में रखकर कार्यक्षेत्र तय किया जाएगा।
हैबिटेशन मैपिंग और शिक्षकों की टैगिंग डहर पोर्टल पर की जाएगी। इससे प्रत्येक शिक्षक को अपने निर्धारित क्षेत्र की जानकारी रहेगी और सर्वे का रिकॉर्ड डिजिटल रूप में दर्ज किया जा सकेगा। इस प्रक्रिया में सरकारी विद्यालयों के साथ गैर-सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालयों को भी शामिल किया जाएगा। विभाग का उद्देश्य सर्वे में किसी क्षेत्र के छूटने और एक ही परिवार की दोबारा गिनती होने की आशंका को कम करना है।
होटल-ढाबे और रेलवे स्टेशन भी सर्वे के दायरे में
बच्चों की पहचान के लिए सर्वे केवल घरों तक सीमित नहीं रहेगा। होटल, ढाबे, दुकान, बाजार, मंडी, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, ट्रैफिक सिग्नल और झुग्गी-बस्तियों जैसे स्थानों को भी मैपिंग में शामिल किया जाएगा। इन जगहों पर रहने वाले या काम करने वाले परिवारों के बच्चों की जानकारी जुटाई जाएगी।
इसका उद्देश्य उन बच्चों को भी सर्वे में शामिल करना है, जो अपने परिवार के अस्थायी ठिकाने या कामकाजी परिस्थितियों के कारण नियमित रूप से स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। विभाग की कोशिश है कि कोई भी बच्चा सर्वे से बाहर न रहे।
माता समिति और सरस्वती वाहिनी भी करेंगी सहयोग
घर-घर सर्वे के दौरान शिक्षकों को विद्यालय प्रबंध समिति, माता समिति और सरस्वती वाहिनी के सदस्यों का सहयोग मिलेगा। ये सदस्य परिवारों तक पहुंचने, बच्चों की जानकारी जुटाने और सर्वे को पूरा कराने में मदद करेंगे। सर्वे के बाद जुटाए गए आंकड़ों का सत्यापन भी किया जाएगा।
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, 20 नवंबर से 20 दिसंबर तक राज्यस्तरीय अनुश्रवण किया जाएगा। वहीं, 15 दिसंबर से चार जनवरी के बीच जिला, प्रखंड, संकुल और विद्यालय स्तर पर नमूना जांच होगी। विद्यालय प्रबंध समिति और पंचायत समिति के स्तर पर 21 दिसंबर से पांच जनवरी तक आंकड़ों की पुष्टि की जाएगी। इसके बाद 12 जनवरी 2027 तक डहर पोर्टल पर आंकड़े फ्रीज करने का लक्ष्य रखा गया है।
शिक्षा विभाग को उम्मीद है कि इस सर्वे से स्कूल से बाहर बच्चों की वास्तविक स्थिति सामने आएगी और उनके लिए नामांकन से लेकर पढ़ाई जारी रखने तक की प्रभावी कार्ययोजना तैयार की जा सकेगी।




