
Manoj Kumar Pintu
Giridih: तीन करोड़ की राशि से बुढ़वा अहार तालाब का हो रहा सौदर्यींकरण कार्य विवादों में घिर चुका है. मामले में सत्तारुढ़ दल के प्रतिनिधियों के दबाव ने गिरिडीह नगर निगम को ड्रामा देखने के लिए मजबूर कर दिया है. जबकि निगम की उप नगर आयुक्त स्मृति कुमारी इशारों में पहले ही मान चुकी है कि सौदर्यींकरण का काम जिस क्वालिटी में होना चाहिए, वो नहीं हो रहा है. इशारों-इशारों में उप नगर आयुक्त ने बुढ़वा अहार तालाब मामले को लेकर सिर्फ इतना ही कहा कि योजना की जांच होगी. उनके इस बयान को करीब दो सप्ताह बीत चुका है लेकिन उप नगर आयुक्त के बयान के बाद भी अब तक इस मामले में कोई जांच शुरू नहीं हुई है. बताते चलें कि 13 एकड़ में फैले बुढ़वा अहार तालाब के सौदर्यींकरण का काम केन्द्र सरकार के अमृत योजना के तहत तीन करोड़ की राशि से किया जा रहा है.
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विधानसभा समिति ने भी मामले का लिया संज्ञान
बुढ़वा अहार तालाब सौदर्यींकरण कार्य में हो रही गड़बड़ी मामले में सबसे पहले इसका विरोध स्थानीय भाजपा नेता संदीप डंगाईच और हरमिंदर सिंह बग्गा ने की थी. लेकिन भाजपा की जिला कमेटी के द्वारा इस संबंध में मामले को लेकर कोई विरोध नहीं हुआ और ना ही विपक्ष में बैठे दलों के पूर्व जनप्रतिनिधियों द्वारा ही इस दिशा में कोई आवाज तक उठायी गई. यहां तक कि कुछ दिनों पहले गिरिडीह आए झारखंड विधानसभा के प्राक्कलन समिति के सदस्यों सह विधायकों अमर बाउरी, नियेल पूर्ति ने भी बुढ़वा अहार तालाब पहुंच कर योजना की जांच की और जांच के क्रम में उन्होंने माना कि तालाब निर्माण में घटिया सामानों का इस्तेमाल हो रहा है, साथ ही प्राक्कलन के अनुसार तालाब के सौदर्यींकरण का कार्य भी नहीं हो रहा है. इस दौरान समिति के सदस्यों ने कुछ सैंपल भी कलेक्शन किए थे. इस दौरान मौके पर ही योजना के ठेकेदार प्रमोद साव और भाजपा नेता पंकज कंधवे के बीच जमकर बहस हुई.एक तरफ बुढ़वा अहार तालाब के समीप रहने वाले भाजपा नेता पंकज कंधवे समेत अन्य स्थानीय लोग थे, तो दूसरी तरफ ठेकेदार और उनके सिडिकेंट के सदस्य.

इस मामले को लेकर चर्चा यह भी है कि ठेकेदार और उनके सिडिकेंट के कई सदस्यों का नाता झामुमो से होने के कारण सत्तारुढ़ दल के दबाव ने नगर निगम की उप नगर आयुक्त समेत निगम के पदाधिकारियों को चुप रहने को मजबूर कर दिया है और अब स्थिति ऐसी है कि सिडिकेंट के सदस्यों में शामिल सत्तारुढ़ दल का फायदा उठाकर सीधे तौर पर शिकायतकर्ताओं को फोन पर धमका भी रहे है. वैसे योजना का काम लेने वाले ठेकेदार का झामुमो से दूर तक कोई नाता नहीं है, लेकिन उनके सिडिकेंट में शामिल अन्य लोगों का कनेक्शन झामुमो से जरुर है. ऐसे में शिकायकर्ताओं की कोई सुनवाई नहीं होना तो लाजिमी है और इसी का फायदा ठेकेदार प्रमोद साव व उनके सिडिकेंट के सदस्यों का उठाना भी तय है. लिहाजा, केन्द्र सरकार के तीन करोड़ के लागत से ठेकेदार और सिडिकेंट अपने तरीके से सौदर्यींकरण का कार्य तेजी से करा रही है. इस बीच जब मामले में उप नगर आयुक्त स्मृति कुमारी से बात करने का प्रयास किया गया, लेकिन कई कॉल के बाद भी उनका कॉल रिसीव नहीं हुआ.





