
Ranchi: पेसा रुल – 2022 को अंतिम रूप दिए जाने के संदर्भ में माझी पारगना माहाल, धाड़ दिशोम ने सरकार को अपनी आपत्ति दी है। साथ ही इसके लिए सुझाव भी सौंपे हैं. माझी परगना महाल की पिछले दिनों हुई पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था के बैठक में लिए गए निर्णय के अनुसार अपनी आपत्ति और सुझाव उन्होंने सरकार को दिए हैं. माझी परगना के पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य सचिव (झारखंड) एवं निदेशक, पंचायती राज विभाग के साथ मुलाकात कर पेसा कानून प्रारूप पर विस्तृत रूप से चर्चा भी की है.
माझी परगना के प्रवक्ता माझी बाबा दुर्गा चरण मुर्मू के मुताबिक राज्य में विगत 28 वर्षों से पेसा कानून के लागू नहीं होने से आदिवासियों को विभिन्न कठिनाइयों का सामना करना पड़ा है. ग्राम सभा के अधिकारों का हनन हुआ है. पेसा कानून के लागू होने से आदिवासी पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था को सर्वांगीण विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य के क्षेत्र में सुधार लाने, रोजगार सृजन करने, आर्थिक स्वालंबन में सहयोग, पारंपरिक न्याय व्यवस्था के तहत असामाजिक तत्वों पर लगाम लगाने, पारिवारिक आपसी विवाद, दीवानी मामले का निपटारा, अपराध मुक्त शांतिपूर्ण समाज का निर्माण, जल, जंगल जमीन एवं पर्यावरण का संरक्षण, सरकार द्वारा चलाए जा रहे जनहित की योजनाओं का सही क्रियान्वयन, समाज और राज्य के विकास एवं अपने रुढ़ी प्रथा पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था के तहत ग्राम सभा को सशक्त बनाने का अधिकार प्राप्त होगा.ऐसे में सरकार से आग्रह है कि पेसा कानून जल्द लागू करे.




