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#LockDown : मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा- पहले चरण में 34,000 मजदूर वापस लाये आयेंगे, राज्य में 34 कंटेनमेंट जोन चिन्हित

  • रांची रेड जोन में, कोरोना से लड़ाई के लिए 34 कंटेनमेंटे जोन किये गये चिन्हित
  • मुख्यमंत्री आवास में मंत्रिमंडल की उपसमिति और पदाधिकारियों की बैठक में सीएम सोरेन ने दी जानकारी

Ranchi  :  हैदराबाद और कोटा से झारखंडी लोगों को लाने के साथ ही पड़ोसी राज्य में फंसे मजदूरों की राज्य वापसी की कवायद तेज हो गयी है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा है कि पड़ोसी राज्यों में फंसे मजदूरों को चरणबद्ध तरीके से लाने के लिए अधिकारियों ने कार्ययोजना तैयार कर ली है.

पहले चरण में बिहार, पश्चिम बंगाल, ओड़िशा, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के कुछ इलाकों से मजदूरों को बस से वापस लाया जायेगा. यहां लगभग 34 हजार झारखंड के मजदूर फंसे हुए हैं. इनकी पूरी सूची तैयार कर ली गयी है. इसके उपरांत दूर के राज्यों से प्रवासी मजदूरों को विशेष ट्रेन से लाने की प्रक्रिया शुरू होगी.

मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोना संक्रमण को लेकर राज्य में 34 कंटेनमेंटे जोन चिन्हित किये गये हैं. इसके अलावा रांची अभी रेड जोन, 9 जिले ऑरेंज जोन और बाकी 14 जिले ग्रीन जोन में हैं. फिलहाल 800 से 900 सैंपलों की जांच हर दिन की जा रही है. यह जानकारी मुख्यमंत्री आवास में मंत्रिमंडल की उपसमिति और पदाधिकारियों की बैठक में दी गयी है.

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दूसरी बीमारियों के लिए सरकार ने शुरू की टेलीमेडिसीन की सुविधा

सीएम ने कहा कि कोरोना के अलावा दूसरी बीमारियों से ग्रसित मरीजों के इलाज को लेकर सरकार गंभीर है. इस सिलसिले में टेलीमेडिसीन की सुविधा शुरू की जा रही है और ई-संजीवनी की शुरुआत भी हो चुकी है. मरीज इसके माध्यम से स्वास्थ्य परामर्श विशेषज्ञ डॉक्टरों से ले सकते हैं.

उन्होंने कहा कि इसके अलावा जहां कम संख्या में लोग फंसे हैं, उन्हें हवाई जहाज से लाने पर भी सरकार विचार कर रही है. बैठक में मंत्री रामेश्वर उरांव, मंत्री चंपई सोरेन, मंत्री बन्ना गुप्ता और मंत्री सत्यानंद भोक्ता के अलावा मुख्य सचिव सुखदेव सिंह, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव राजीव अरुण एक्का, स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव डॉ नितिन मदन कुलकर्णी और प्रधान सचिव अविनाश कुमार मौजूद थे.

पश्चिम बंगाल के मजदूरों को भेजा गया वापस, उसी बस से झारखंड आयेंगे मजदूर

बैठक में सीएम सोरेन ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस के मौके पर शुक्रवार से प्रवासी मजदूरों की झारखंड वापसी का सिलसिला शुरू हो चुका है. यह तबतक जारी रहेगा, जबतक लॉकडाउन की वजह से दूसरे राज्यों में फंसे मजदूर, किसान, विद्यार्थी और पर्यटक समेत अन्य लोगों को वापस नहीं ले आते हैं.

उन्होंने कहा कि हैदराबाद से 12 सौ मजदूर लौट रहे हैं, वहीं पश्चिम बंगाल के फंसे मजदूरों को बस से वापस भेजा गया है औऱ वहां फंसे झारखंड के मजदूर इसी बस से वापस अपने घर आयेंगे.

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वेल्लोर सहित अन्य अस्पतालों में फंसे लोगों के लिए सरकार ने की तैयारी

राजस्थान के कोटा में फंसे 2883 छात्रों के लिए चली विशेष ट्रेन की व्यवस्था पर खुशी जताते हुए सीएम ने कहा कि अन्य राज्यों में फंसे विद्यार्थियों और वेल्लोर समेत दूसरे राज्यों के अस्पतालों में इलाज कराने गये झारखंड के मरीजों को लाने की दिशा में भी सरकार ने तैयारी शुरू कर दी है. बहुत जल्द इन्हें भी वापस लाया जायेगा.

सीएम को मुख्य सचिव ने बताया कि अंतरराज्यीय और अंतर जिला आवागमन को लेकर भी संबंधित अधिकारियों को दिशा निर्देश दे दिये गये हैं. इसके अंतर्गत जो लोग अपने वाहन से आना चाहंगे, उन्हें संबंधित जिलों के डीसी द्वारा पास निर्गत किया जायेगा. वहीं, राज्य के बाहर जो फंसे हैं, वे संबंधित जिले के उपायुक्त के पास के लिए आवेदन देंगे. अगर उन्हें किसी तरह की दिक्कतें आती हैं तो वे इसके लिए राज्य सरकार से संपर्क कर सकते हैं.

 मजदूरों की होगी स्क्रीनिंग, फिर भेजा जायेगा

सीएम ने कहा कि लौटनेवाले प्रवासी मजदूरों और विद्यार्थियों के चिकित्सीय जांच, भोजन औऱ रहने की व्यवस्था की जा रही है. लौटने के बाद उन्हें भोजन उपलब्ध कराया जायेगा. इसके बाद उनके एक निश्चित की गयी जगह पर रहने की व्यवस्था की जायेगी. फिर, सभी की चिकित्सकीय जांच करायी जायेगी. जो स्वस्थ पाये जायेंगे उन्हें घर भेजा जायेगा औऱ पूरी एहतियात बरतने का निर्देश दिया जायेगा, वहीं जिनमें थोड़ा सा भी संक्रमण का खतरा होगा, उसका कोविड अस्पताल अथवा उनके घर में ही क्वारंटाइन कर इलाज किया जायेगा.

मजूदरों की घर वापसी के बाद बढ़ेगी चुनौती, निपटने के लिए राज्य सरकार तैयार कर रही कार्य योजना

मुख्यमंत्री ने कहा कि लाखों प्रवासी मजदूरों की वापसी के बाद चुनौतियां बढ़ेंगी. खास कर उनको रोजगार देना सबसे बड़ा चैलेंज होगा. इस वजह से अभी से ही इस दिशा में कार्ययोजना तैयार की जा रही है. ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में रोजगार सृजन के लिए अलग-अलग वृहद कार्ययोजना बनायी जा रही है. राज्य के सभी उद्योग-धंधों का आकलन किया जा रहा है. इन उद्योग धंधों में लगभग 75 प्रतिशत स्थानीय लोगों को रोजगार देना सुनिश्चित करने के लिए सरकार कदम उठायेगी. उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में मजदूरों के वापस लौटने पर उनके सामने रोजगार सबसे बड़ी समस्या होगी. ऐसे में इन मजदूरों को उनके घर पर ही रोजगार देने के लिए सरकार ने विस्तृत कार्ययोजना बनायी है. इसके तहत मनरेगा का बजट बढ़ाया जायेगा. इसमें नयी योजनाओं को शामिल किया जायेगा और मनरेगा मजदूरी दर बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार को पत्र भेजा जायेगा.

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