
- झारखंड राज्य पत्थर उद्योग संघ की ओर से बैठक की गयी
Ranchi: लघु खनिज व्यवसाय में लगे लोगों के सामने आजीविका की समस्या आ गयी है. पूर्व सरकार के कुछ निर्णयों का इसमें महत्वपूर्ण योगदान है.
साल 2017 के बाद से लगातार सरकार ने लघु खनिज और व्यवसायियों को नजरअंदाज कर बड़े व्यवसायियों के लिए नियम बनाये.
उक्त बातें किशोर खेमानी ने कही. वे मंगलवार को झारखंड राज्य पत्थर उद्योग संघ की ओर से आयोजित बैठक को संबोधित कर रहे थे. बैठक का आयोजिन ग्रीन होराइजन में किया गया.
इस दौरान खेमानी ने कहा कि खनन अधिसूचना 2017 के अनुसार सभी रैयतों और गैर आबाद खनन पट्टों का रिन्यूअल 31 मार्च 2020 तक कराना है जिसका विरोध किया जाना चाहिये.
साल 2017 में जब सरकार ने इसे लागू किया, तब भी इसका विरोध किया गया था. इस निर्णय से राज्य के सभी छोटे-छोटे व्यवसायी तथा खनन क्षेत्रों में कार्यरत श्रमिकों के सामने आजीविका की समस्या उत्पन्न हो गयी है. वर्तमान सरकार से उन्होंने ऐसे में नियमों को बदलने की मांग की.
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नये खनन पट्टा में रकबा तीन हेक्टेयर से अधिक नहीं होने का किया विरोध
पंकज कुमार सिंह ने विरोध जताते हुए कहा कि राज्य खनिज संपदा से भरपूर है. यहां के लोगों की मुख्य आजीविका का साधन भी खनन है.
पूर्व सरकार ने खनन पट्टा का कुल रकबा तीन हेक्टेयर से अधिक नहीं होने का प्रावधान किया था जो गलत है.
सिंह ने कहा कि लघु खनिज में नये खनन पट्टों की स्वीकृति उनके उपलब्ध रकबे के अनुसार की जानी चाहिए. साथ ही खनन अधिसूचना 2019 में पत्थर स्वामित्व दर में की गयी वृद्धि का लोगों ने विरोध किया.
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स्वामित्व दर में वृद्धि अव्यवहारिक
बताया गया कि पिछले साल पत्थर के स्वामित्व दर में 138 प्रतिशत वृद्धि की गयी जो अव्यवहारिक है. पत्थर को दो भाग में बांटा गया. पत्थर को बोल्डर चिप्स और बोल्डर के रूप में सरकार के लिया जाने वाला स्वामित्व बिल्कुल ही गलत है.
एक ही खनिज के स्वामित्व दर में दो भागों में बांट कर स्वामित्व कभी भी लिया नहीं गया था जिसके कारण यहां के पत्थर चिप्स का मूल्य बगल के राज्यों से बहुत ही अधिक हो गया.
पंकज ने बताया कि इस संबध में छोटानागपुर पत्थर उद्योग संघ की ओर से पूर्व में ही मुख्यमंत्री को ज्ञापन दिया गया. मुख्यमंत्री ने सकारात्मक कार्रवाई करने का आश्वासन दिया था.
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