
- बाजार की दवा से कई गुना सस्ती होती है पीएम जन औषधि केंद्र की दवा
- चिकित्सकों की इच्छा शक्ति की भी देखी जाती है कमी
Anwar Hussain
Jamtara: जिस उद्देश्य के साथ प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र को खोला गया था, उस उद्देश्य से वह काफी दूर दिखायी दे रहा है. जन कल्याण के तहत गरीबों को लाभ पहुंचाने के लिए केंद्र सरकार ने सभी सदर अस्पतालों में पीएम जन औषधि केंद्र खोलने का निर्देश दिया था. लेकिन वर्तमान में पीएम जन औषधि केंद्र अपनी बदहाल स्थिति में दिखाई दे रहा है.
गिने-चुने लोगों को ही थोड़ा-बहुत लाभ मिल रहा है. पीएम जन औषधि केंद्र में दवा की कमी रहती है. जितनी दवा की मांग की जाती है, उतनी मात्रा में दवा समय पर मिल नहीं पाती है. जो दवा जन औषधि केंद्र वाले मंगाते हैं, उसी दवा को सदर अस्पताल प्रबंधन मंगवा लेता है, जिससे जन औषधि के संचालक को परेशानी होती है.
चिकित्सकों की इच्छा शक्ति की कमी भी जिम्मेदार
जन औषधि केंद्र की दवा को सरकारी चिकित्सक भी जल्द लिखना नहीं चाहते हैं. जब चिकित्सक अस्पताल में दवा लिखेंगे तभी संचालक दवा मंगवाएंगे. चिकित्सक को हजारों बार याद दिलाने के बाद ही एक दो दवा लिखते हैं. संचालक जितनी मात्रा में दवा का ऑर्डर देते हैं, उतनी मात्रा में नहीं मिलना भी दूसरा कारण है.
जन औषधि केंद्र की दवा बाजार की दवा से कई गुना है सस्ती
बता दें कि जन औषधि केंद्र की दवा बाजार की दवा से कई गुना सस्ती होती है. इससे गरीबों को काफी राहत मिलती है. इसी मकसद से ही जन औषधि केंद्र को सभी सदर अस्पताल में खोला गया था. लेकिन कई तरह के दांव पेंच के कारण जन औषधि केंद्र सफल नहीं हो पा रहा है.
जन औषधि केंद्र में एंटीबायोटिक दवा अमोक्सिसिल्लिन क्लेवम 625 एमजी की 10 गोली की कीमत मात्र 51 रुपये पड़ती है जबकि वही दवा बाजार में 200 रुपये के आसपास मिलती है.
दवा की दर एक नजर में
एंटीबायोटिक
अमोक्सिसिल्लिन क्लेवम केंद्र में 10 गोली की कीमत 51 रुपये, बाजार में लगभग 200 रुपये
Cefexime 10 गोली की कीमत 50 रुपये, बाजार में 90 रुपये
गैस की गोली
रेबिप्रजोल 10 गोली 8 रुपये, बाजार में 50 रुपये
Pan D यानी pentaprazole की 10 गोली की कीमत 20 रुपये, बाजार में 120 रुपये
कफ सिरप
Grilinctus BM 24 रुपये, बाजार में 90 रुपये
पेशाब में जलन की सिरप
Alkacitron 20 रुपये, बाजार में 90 रुपये पड़ती है
क्या कहते हैं संचालक
सदर अस्पताल जन औषधि केंद्र के संचालक अजय कुमार ने कहा कि पहले की तुलना में केंद्र की स्थिति ठीक हुई है. अभी कुछ चिकित्सक एक दो दवा लिखते हैं. सदर में एंटीबायोटिक नही है. इसलिए भी लिखते हैं. जितनी दवा की मांग की जाती है, उतनी नहीं मिल पाती है.
क्या कहते हैं डीएस
डीएस चन्द्र शेखर आज़ाद ने कहा कि दवा लिखी जाती है. और ज्यादा लिखने के लिए सभी चिकित्सकों से बात की जाएगी ताकि लोगों को अधिक से अधिक लाभ मिले.




