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जांच रिपोर्टः हाइकोर्ट भवन निर्माण के टेंडर में ही हुई घोर अनियमितता, क्या तत्कालीन सचिव राजबाला वर्मा और मंत्री पर होगी कार्रवाई?

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Akshay Kumar Jha

Ranchi: नए हाइकोर्ट भवन के निर्माण में शुरू से ही अनियमितता होती आ रही है. इस बात की पुष्टि पांच सीनियर आइएएस अधिकारियों की जांच रिपोर्ट में हुई है. टेंडर के वक्त ही मनचाही कंपनी को काम देने के लिए एक बड़ा खेल हुआ. जिसका खुलासा जांच रिपोर्ट में हुआ है. इसी जांच रिपोर्ट को एक आधार मानते हुए अधिवक्ता राजीव कुमार ने हाइकोर्ट में पीआइएल दायर की है. जिसपर सुनवाई शुरू हो गयी. पहली सुनवाई में कोर्ट के रुख से माना जा रहा है कि कोर्ट ने मामले को काफी गंभीरता से लिया है. कोर्ट ने सरकार को 14 दिसंबर तक अपना जवाब देने को कहा है. अब आगे कोर्ट की सुनवाई के साफ होगा कि क्या होता है. इस बीच लाख टके का सवाल यह है कि क्या टेंडर के वक्त हुई घोर अनियमितता को लेकर सरकार कार्रवाई करेगी. जिस वक्त टेंडर हुआ उस वक्त विभाग की सचिव पूर्व मुख्य सचिव राजबाला वर्मा थीं और मंत्री खुद सीएम रघुवर दास थे.

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टेंडर के वक्त ही हुई घोर अनियमितता

पांच सदस्यीय टीम की जांच रिपोर्ट में पहले ही भाग में टेंडर के वक्त घोर अनियमितता की बात सामने आयी है. जांच रिपोर्ट में लिखा है कि योजना की प्रशासनिक स्वीकृति 36 6.0 3 करोड़ रुपए थी. लेकिन इसमें से 3 0.9 1 करोड़ रुपए के काम को हटा कर टेंडर निकाला गया. भवन निर्माण विभाग के सचिव ने समिति को बताया कि टेंडर की राशि और प्रशासनिक स्वीकृति की राशि में अंतर महंगाई बढ़ने, लेबर सेस, आकस्मिक व्यय की राशि को हटा देने के कारण ऐसा हुआ है. लेकिन समिति सचिव के बातों से संतुष्ट नहीं है. रिपोर्ट में लिखा है कि समिति के सामने यह स्पष्ट नहीं किया जा सका कि निर्माण से संबंधित 30 करोड़ रुपए के काम को टेंडर करते वक्त क्यों हटा दिया गया. अगर किसी वजह से इन कामों को हटा देना जरूरी भी हो गया था, तो इन कामों के लिए दोबारा टेंडर क्यों नहीं निकाला गया. दोबारा उसी कंपनी से काम करवा लिया गया. जो कि घोर अनियमितता है.

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25 के बदले बढ़ा दिया 300 फीसदी खर्च, विभाग को पता ही नहीं

किसी भी योजना में इस्टीमेट का ऊपर जाना लगभग स्वाभाविक हो जाता है. लेकिन जिस तरह से हाइकोर्ट निर्माण को लेकर इस्टीमेट बढ़ा वो कई तरह के सवाल खड़े करता है. कार्यपालक अभियंता, अधीक्षण अभियंता और मुख्य अभियंता योजना में अपनी तरफ से 10-25 फीसदी तक की वृद्धि कर सकते हैं. इसके लिए उन्हें विभाग से अनुमति नहीं लेनी पड़ती है. लेकिन हाइकोर्ट निर्माण मामले में 300 फीसदी तक इस्टीमेट को बढ़ा दिया गया. जांच समिति ने पाया कि ऐसा करना पीडब्ल्यूडी के कोड के मुताबिक गलत है. 300 फीसदी इस्टीमेट में वृद्धि होने से ये भी सवाल उठ रहा है कि क्या विभाग को इतने बड़े इजाफे की जानकारी नहीं हुई होगी. तत्कालीन सचिव राजबाला वर्मा के समय से ही इस्टीमेट में इजाफा होता रहा था.

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