
Ranchi: नए हाईकोर्ट भवन निर्माण मामले में हाईकोर्ट में शुक्रवार को पहली सुनवाई हुई. सुनवाई झारखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस अनिरुद्ध बोस और जस्टिस डीएन पटेल के बेंच ने की. पीआईएल पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस ने कहा कि सरकार 14 दिसंबर तक मामले पर अपना जवाब दें. बता दें कि हाईकोर्ट निर्माण का इस्टीमेट 300 फीसदी बढ़कर 265 करोड़ से 699 करोड़ का हो गया था. सरकार ने मामले को लेकर एक जांच कमेटी बनायी थी. जांच रिपोर्ट मीडिया में आने के बाद अधिवक्ता राजीव कुमार ने हाईकोर्ट में पीआईएल दायर की थी. पीआईएल पर शुक्रवार (2 नवंबर) को पहली सुनवाई थी. हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब सरकार को 14 दिसंबर तक अपना जवाब कोर्ट को सौंपना है. न्यूजविंग से बात करते हुए याचिकाकर्ता और अधिवक्ता राजीव कुमार ने कहा कि मामले में हाईकोर्ट एसोसिएशन भी पिटिशन फाइल करेगा.
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कमेटी करेगी जांच, विभाग ने सीएम से मांगा अप्रूवल
नये हाइकोर्ट भवन निर्माण में अनियमितता किसकी वजह से हुई. किसकी वजह से बार-बार इस्टीमेट बढ़ाया गया. 265 करोड़ से बढ़ कर बजट 699 करोड़ कैसे हो गया. इन सब के पीछे कौन है. विभाग इन बातों को जानने के लिए जांच कमेटी बनाने जा रही है. भवन निर्माण विभाग की तरफ से कमेटी बनाने के लिए मंत्री का अप्रूवल जरूरी है. भवन निर्माण विभाग के मंत्री खुद मुख्यमंत्री रघुवर दास हैं. इसलिए विभाग ने कमेटी बनानेवाली फाइल अप्रूवल के लिए सीएम ऑफिस भेजी है. सीएम की अनुमति मिलते ही कमेटी जांच शुरू करेगी और यह तय करेगी कि इन सभी अनियमितता के पीछे कौन है.
265 करोड़ से बढ़कर 699 करोड़ हो गया इस्टीमेट
झारखंड हाइकोर्ट के निर्माण कार्य की लागत दो साल में ही 265 करोड़ रुपये से बढ़कर 699 करोड़ हो गयी है. वर्ष 2016 में मेसर्स रामकृपाल कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड को टेंडर मिला था. उस समय योजना का इस्टीमेट 265 करोड़ रुपये था. बाद में इसका इस्टीमेट बढ़ा दिया गया. इस्टीमेट बढ़ाने के दौरान किसी तरह की स्वीकृति नहीं ली गयी और उसी ठेकेदार को बिना टेंडर के ही काम दे दिया गया. मामले की सूचना मुख्यमंत्री को मिली तो उन्होंने इसकी जांच उच्चस्तरीय कमेटी से कराने का आदेश दिया. इसके बाद विकास आयुक्त डॉ डीके तिवारी की अध्यक्षता में छह सदस्यीय कमेटी बनी. इस कमेटी ने जांच में बड़ी वित्तीय गड़बड़ियां पायी है. जांच के बाद कमेटी ने यह रिपोर्ट भवन निर्माण विभाग को सौंप दी है. जांच कमेटी ने यह भी पाया कि योजना के निर्माण के दौरान कई चीजों की स्वीकृति नहीं ली गयी है. कमेटी ने लिखा है कि अगर कुछ अतिरिक्त काम कराने की आवश्यकता थी, तो उसकी स्वीकृति ली जानी चाहिए थी. उसका टेंडर भी अनिवार्य रूप से करना चाहिए था.
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सवाल जो कमेटी ने उठाए
– योजना की तकनीकी स्वीकृति गलत थी, तो उसे अनुमोदित कैसे किया
– योजना के इस्टीमेट से राशि निकाल कर टेंडर करने की स्वीकृति कैसे हुई
– इस्टीमेट में लगातार राशि की बढ़ोतरी करके बिना टेंडर के काम उसी ठेकेदार को कैसे दिया जाता रहा
– जमीन व मिट्टी की जांच के बाद इस्टीमेट तैयार करने में इंजीनियर कैसे इतनी बड़ी चूक कर सकते हैं कि कोई भी चीज छूट जाये.
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यह है योजना
• प्रशासनिक स्वीकृति 366 करोड़
• निविदा आमंत्रित की गयी 267.66 करोड़
• (31 करोड़ निकाल कर)
• कार्य आबंटन की राशि 264.58 करोड़
• मात्रा में वृद्धि के कारण बढ़ा 40.16 करोड़
• अतिरिक्त आइटम पर बढ़ा 77.67 करोड़
• नये कार्य पर बढ़ा 214 करोड़
• दर बढ़ने, लेबर सेस, आकस्मिकता, बिजली-पानी प्रबंध पर बढ़ा 99.66 करोड़
• एग्रीमेंट के बाद राशि में बढ़ोतरी 431.49




