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दोषी करार नेताओं पर आजीवन प्रतिबंध लगाने की याचिका पर सुनवाई को तैयार SC

सुनवाई के क्रम में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मामला गंभीर है.  चार दिसंबर को सुनवाई की जायेगी.

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 NewDelhi :  SC उस याचिका पर विचार करने को तैयार हो गया है, जिसमें मांग की गयी है कि  आपराधिक मामले में दोषी करार दिये जाने वाले नेताओं के चुनाव लड़ने पर ताउम्र प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए.  SC ने माना कि मामला गंभीर है. बता दें कि सीजेआई रंजन गोगोई की अगुआई वाली बेंच ने याचिकाकर्ता से कहा कि वह अपनी मांग से न भटकें.  याचिकाकर्ता अश्विनी उपाध्याय द्वारा दायर  अर्जी में कहा गया है कि जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा-8 (3) के अनुसार अगर किसी को दो साल से ज्यादा सजा होती है तो वह सजा काटने के बाद छह साल तक चुनाव नहीं लड़ सकता.  याचिका में मांग की गयी है कि जैसे ही नेता को आपराधिक मामले में दोषी करार दिया जाता है उसे उम्र भर के लिए चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए. कहा कि सरकारी अधिकारी को सजा होने के बाद उम्रभर के लिए उसकी नौकरी खत्म हो जाती है तो फिर नेताओं को ज्यादा तरजीह क्यों दी जाये?

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मामले की सुनवाई के लिए देश के हर जिले में एक सेशन कोर्ट हो

सुनवाई के क्रम में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मामला गंभीर है.  चार दिसंबर को सुनवाई की जायेगी.  सुनवाई के क्रम में कोर्ट सलाहकार ने कहा कि दागी नेताओं के खिलाफ मामले की सुनवाई के लिए देश के हर जिले में एक सेशन कोर्ट हो. एक मैजिस्ट्रेट कोर्ट को ऐसे मामले की सुनवाई के लिए तय किया जाना चाहिए.  इस पर बैंच ने कहा कि सरकारी नौकरशाह और न्यायिक अधिकारी दोषसिद्धि के बाद वापस नहीं लौट सकते हैं.  केन्द्र की ओर से पेश सालिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सरकार को निर्वाचित जनप्रतिनिधियों से जुड़े आपराधिक मामलों की विशेष रूप से सुनवाई करने के लिए विशेष अदालतें गठित करने पर कोई आपत्ति नहीं है.  सुनवाई के दौरान  कहा गया कि दागी सांसद व विधायकों के खिलाफ दर्ज आपराधिक मुकदमे से निपटने के लिए स्पेशल कोर्ट बनाने से बेहतर यह होगा कि हर जिले में एक सत्र न्यायालय और एक मजिस्ट्रेट कोर्ट को विशेष तौर ऐसे मामलों के निपटारे लिए सूचीबद्ध कर दिया जाये. जिससे कहा कि दागी सांसदों व विधायकों के खिलाफ दर्ज आपराधिक मुकदमों से निपटने के लिए 70 स्पेशल कोर्ट बनाये जाने की आवश़्यकता है.

 

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