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झारखंड के बाजार में खपाया जा रहा है जाली नोट, रांची पुलिस ने जाली नोट के साथ दो सप्लायर को किया गिरफ्तार

Ranchi: पुलिस की कार्रवाई के बाद भी झारखंड में जाली नोट का कारोबार रुकने का नाम नहीं ले रहा है. जाली नोट का धंधा करनेवाले झारखंड में बड़े पैमाने पर जाली नोट खपा रहे हैं. बुढ़मू थाना पुलिस ने शनिवार को जाली नोट के साथ दो सप्लायरों को गिरफ्तार किया है.

गिरफ्तार नोट सप्लायरों में ऐनुल अंसारी और सागर मंडल शामिल हैं. दोनों के पास से पुलिस ने 85,000 रुपये के जाली नोट बरामद किये हैं. जिसमें 42 नोट 2000 के हैं और एक पांच सौ का नोट है. गिरफ्तार दोनों जाली नोट सप्लायर पश्चिम बंगाल के मालदा से नोट लेकर रांची पहुंचे थे.

मार्केट में सप्लाई करने से पूर्व ही दानों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया. हालांकि इन दानों के अलावा अन्य कई लोग भी शामिल हैं. पुलिस गिरोह के बाकी सदस्यों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी कर रही है.

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बंगाल के रास्ते झारखंड पहुंचते हैं जाली नोट

रांची से जाली नोटों की बरामदगी के बाद एक बार फिर इस बात की पुष्टि हो गयी है कि जाली नोटों के तस्करों के तार बांग्लादेश से जुड़े हुए हैं. पहले भी इस बात का खुलासा होता रहा है कि पाकिस्तान से बांग्लादेश के रास्ते जाली नोट बंगाल व झारखंड की सीमा में प्रवेश कर रहे हैं. बांग्लादेश से पश्चिम बंगाल के मालदा में आसानी से जाली नोट पहुंचते हैं, जहां से भारत के तस्कर विभिन्न राज्यों में जाली नोट पहुंचाते हैं. इस मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआइए) पहले भी कई केस टेक ओवर कर चुकी है और जांच कर रही है. जाली नोटों की तस्करी को रोकने के लिए ही झारखंड पुलिस ने संथाल परगना में साइबर थाना, साइबर डीएसपी आदि के नये कार्यालय खोले  हैं.

झारखंड के बाजारों में खपाया जाता है जाली नोट

नकली नोट का कारोबार करने के आरोप में गिरफ्तार रवि प्रजापति से रांची में पूछताछ के दौरान उसने बताया कि इससे पहले भी वह आठ से दस बार मालदा के अनवर और इलम के जरिए 2000 के नकली नोट मंगा चुका है. वह इन नोटों को झारखंड के बाजारों में खपाता रहा है.

नोटबंदी के बाद 2016 के दिसंबर में मिला था जाली नोट

नोटबंदी के बाद नकली नोटों का पहला ज़खीरा देश में दिसंबर 2016 में आया था. जनवरी 2017 में बीएसएफ ने मालदा में 2000 के नकली नोट पकड़े थे. मिली जानकारी के अनुसार तब से अब तक इसी क्षेत्र में 40 लाख रुपये के नकली नोट पकड़े जा चुके हैं. आइएसआइ ने 2000 के नोटों में 17 में से 10 निशान हू-ब-हू नकल कर लिये हैं. चपई-नवाबगंज, मीरपुर और चिटगांव में नोट छापे जा रहे हैं. यहां से नोटों को शिवपुर लाया जाता है. नकली नोटों को छोटे-छोटे पैकेट में पैक किया जाता है और फिर तारबंदी के ऊपर से भारतीय सीमा में फेंक दिया जाता है.

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अब तक गिरफ्तार जाली नोट के बड़े तस्कर

17 सितंबर 2016 को नकली नोट के एक बड़े सरगना की रांची के रातू रोड से गिरफ्तारी हुई. देश के विभिन्न राज्यों में जाली नोट का कारोबार करने के आरोप में गिरफ्तार अशोक गुप्ता करोड़ों के जाली नोट देश में खपा चुका है.

वर्ष 2015 में पाकिस्तान में छपे 1.15 लाख रुपये के नकली नोट के साथ दो तस्कर गिरफ्तार किये गये थे. निजी बस से पकड़े गये तस्करों में नेजाम नगर, रांची निवासी दानिश अंसारी के पास से 500 के 136 और जगन्नाथपुर, रांची निवासी सत्तार अंसारी के पास से एक-एक हजार के 127 नकली नोट बरामद किये गये थे.

1 दिसंबर 2018 को रांची के स्टेशन रोड स्थित सरकारी बस स्टैंड से 2000 रुपये के 104 जाली नोटों (208000 रुपये) के साथ तस्कर को गिरफ्तार किया गया.

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